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हुसैन की मौत-राष्ट्रीय क्षति या राष्ट्रीय मुक्ति?

Posted On: 11 Jun, 2011 Others में

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दो दिन पूर्व सभी समाचार चैनलों में एक ही खबर थी “”प्रख्यात चित्रकार मकबूल फ़िदा हुसैन की मृत्यु हो गई”” .. मृत्यु तो सभी की होनी है और किसी की भी मृत्यु अशुभ ही होती है .. कोई उसे भारत का पिकासो कह रहा था तो कोई राष्ट्रभक्त बता रहा था तो कोई बहादुरशाह की उपाधि दे रहा है ..,,पर मुझे अपार क्षोभ हुआ जब मैंने देखा की भारत के प्रधानमंत्री हुसैन की मौत को राष्ट्रीय क्षति बता रहे थे .. मेरे मानस पटल पर उस कुंठित व्यक्ति द्वारा बनाई गई वे सारी पेंटिंग्स घुमने लगी जिसके माध्यम से उसने भारत की आत्मा और उसके मान बिदुओ पर प्रहार किया था …….. हम कैसे भूल गए एक घटिया और चरित्रहीन व्यक्ति ने किस तरह भारत में ही रहकर भारत की आत्मा के साथ बलात्कार किया और हम नपुन्सको की तरह उसे बर्दाश्त करते रहे और कुछ नमकहराम उसे कला में अभिव्यक्ति का दर्जा देकर तालिया पीटते रहे. उस घ्रिडित व्यक्ति को तो देश की मिटटी भी नसीब नहीं हुई .. ये उसकी सजा थी नियति ने लिख रखी थी ..

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यह हिन्दुस्तान ही था जिसने हुसैन को बर्दाश्त किया .. अन्यथा दुनिया के किसी और कोने में किसी अन्य मानबिंदु के साथ ऐसा खिलवाड़ करने पर हुसैन का मुख काल करके उसकी गर्दन उतार दी जाती . न की उसे राष्ट्रीय धरोहर कहा जाता .. मुझे नहीं पता प्रधानमंत्री जी को कौन सी क्षति नजर आई राष्ट्र की .. मै तो इसे राष्ट्रीय मुक्ति ही मानता हु .

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वह कलाकार के वेश में एक धूर्त था जो कलाकार तो कदापि नहीं हो सकता है, क्योकि कोई भी कलाकार संवेदनशील होता है . उसकी संवेदना अपने समाज और राष्ट्र के प्रति होती है और वही उसके कृतित्व में झलकती है . पर हुसैन का कृतित्व जाने कहा से प्रेरणा पाता था की उसने भारतीय आस्था के साथ इतना घिनौना मजाक किया ,, कुछ लोगो का मानना है हुसैन ने प्रयोगवादी कला में भारत की संस्कृति से प्रेरणा पाई .. कितना हास्यास्पद है ये की जिस संस्कृति से प्रेरणा पाई उसे ही भेट चढ़ा दिया अपनी कुंठाओं पर . बाजार में नीलाम कर दिया .

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सभी समस्याओं जिनसे हम आज जूझ रहे है उसका एक बहुत बड़ा कारण यह है की हमारा राष्ट्रीय चरित्र निरंतर समाप्त होता जा रहा है और उसे हम स्वयं अपने हाथो से ख़त्म कर रहे है प्रयोगधर्मिता के नाम पर . सवाल ये है की ऐसे व्यक्ति को भारतीय कला का पिकासो बताकर नए कलाकारों के सामने क्या आदर्श रख रहे है हम ? क्या उन्हें छुट दे दी जाये की वे कला के नाम पर अपनी संस्कृति और मान बिन्दुओ की धज्जिया उड़ा दे ,,और कुख्याति प्राप्त करे .. हुसैन राष्ट्रीय गर्व नहीं राष्ट्रीय शर्म है हम कभी नहीं चाहेंगे की देश के कलाकार उसका अनुगमन करे ..वह कला कभी प्रशंशनीय नहीं हो सकती जो राष्ट्रीय चरित्र का निर्माण न कर सके . हुसैन की मौत को राष्ट्रीय क्षति कितने लोग मानते है ये तो मै नहीं जानता .. पर कितने लोग राष्ट्रीय मुक्ति मानते है ये जरुर जानना चाहता हु . कम से कम मै हुसैन को कलाकार तो कदापि नहीं मान सकता मै तो इसे राष्ट्रीय मुक्ति ही मानता हु .. आप ?

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33 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

AMIT KUMAR GUPTA के द्वारा
August 8, 2011

निखिल जी नमस्कार ,रविवार को समय नहीं मिल पाने के कारण आपका लेख नहीं पढ़ पाया था .आपकी बात से मै बिलकुल सहमत हूँ .यह एक कटु सत्य हैं की हमारे देश में एक ऐसे व्यक्ति को सम्मान दिया गया जिसने हिन्दू धर्म की मर्यादा का क़त्ल किया था. उनमे वाकई प्रतिभा थी लेकिन उन्होंने उस प्रतिभा को अपने देश की सभ्यता संस्कृत को दूषित करने में लगा दिया .उन्होंने पुरे भारतीय का अपमान किया .कहते हैं न जैसी करनी वैसे भरनी .वाही हल उनका हुआ. उन्हें भारत की मिटटी भी नसीब नहीं हुई. आपके सहस को सलाम .

roshni के द्वारा
June 23, 2011

निखिल जी आपका लेख के हर विचार से मै भीपूरी तरह सहमत हूँ .. ये हमारे देश का दुर्भाग्य है की यहाँ जिसे सम्मान मिलना चाइये उसे नहीं मिलता… रामचंद्र जी सच ही कह गए थे हंस चुगेगा दाना दुनका कागा मोती खायेगा.. आभार

    nikhil के द्वारा
    July 6, 2011

    सही कहा रौशनी जी यहाँ कौवे ही मोती खा रहे है

rahulpriyadarshi के द्वारा
June 23, 2011

हुसैन बड़ा शातिर कलाकार था,उसके मन में पहले से ही चोर बैठा था,इसीलिए तो जो चित्र विवादों में आये उन्हें उसने पहले से ही कोई शीर्षक नहीं दिया था,ताकि कानूनन बेगुनाह साबित हो सके…उसने अपनी बेबाकी अपने धार्मिक प्रतीकों के साथ कभी नहीं दिखाई,जो वास्तव में बेहद ही शर्मनाक है. मैं आपके इस आलेख का समर्थन करता हूँ.

    nikhil के द्वारा
    July 6, 2011

    समर्थन के लिए आभार राहुल जी

Ravi Tiwari के द्वारा
June 20, 2011

klakar ka n to koye jati hoti hai aur na koye majhab, shab dhaye vote ka ganith hai sab nahi to makbul sab jail mai hi dam todte, ab jab vo milengey apney Khuda sai to vo ye shaval jror krega apni hi maa ki nagn tashvir bnatey tumhey sharm kyu nahi aaye?????????

    nikhil के द्वारा
    June 23, 2011

    ये आक्रोश उचित है रवि जी ..ऐसे लोगो का पूर्ण रूप से बहिष्कार होना चाहिए .

Shailesh Kumar Pandey के द्वारा
June 17, 2011

मैं मकबूल फ़िदा हुसैन की मौत को राष्ट्रीय मुक्ति ही मानता हूँ क्योंकि इस तरह की घृणित सोच रखने वाले को कलाकार कहें तो कला को इससे बड़ी कोई दूसरी गाली नहीं होगी | जिस किसी क्षण किसी व्यक्ति की सोच स्तर से नीचे गिर जाती है, उसी क्षण वह अधम हो जाता है |

    nikhil के द्वारा
    June 23, 2011

    शैलेश जी नमश्कार प्रतिक्रिया के लिए आभार ..सही ही शब्द आपने कहा है वह निश्चित रूप से एक अधम मानसिकता का व्यक्ति था

subhash mittal के द्वारा
June 17, 2011

I also feels him a national shame .i get upset when our P.M and others gave tribute to him.and called his demise a national loss.that P,m was justifying laathicharge and teargas on sleeping women and children

    nikhil के द्वारा
    June 23, 2011

    वास्तव में वह राष्ट्रीय शर्म था .जिसे घटिया राजनीती ने राष्ट्रीय गौरव की उपाधि दे रखी थी ..

Dr. Naveen Pandey के द्वारा
June 13, 2011

आदरणीय बड़े भैया नित्य दिनों का प्रणाम आपका आज का लेख निश्चय ही एक गंभीर प्रश्न की ओर इंगित करता है जो देश की अश्मिता से सम्बंधित है निश्चित ही एक सच्चा हिन्दुस्तानी किसी की कला की प्रशंसा देश की कीमत पर नहीं कर सकता , बड़े पद पर आसीन कोई व्यक्ति ही क्यों न हो.. यदि ऐसा है तो वह अपने भारतीय होने के गौरव पर प्रश्नचिंह लगा रहा है और इस परिवेश में ये कदापि स्वीकार नहीं हो सकता………… भारत सर्वधर्म समभाव का देश जरुर है परन्तु अपने भारतीयता के धर्म से कदापि अलग नहीं , वरन ये ऐसी विभिन्न धर्मो की शरणस्थली है इसका ये मतलब नहीं की कही से आया कोई मानसिक उत्कंठा से भरा मकबूल फ़िदा हुसैन सरीखा व्यक्ति अपनी अमर्यादित कला का घिनौना प्रदर्शन करके प्रशंसा का पात्र बन जाये और देश का नेतृत्व कर रहे विचारहीन कुत्सित राजनेता उसे राष्ट्र के गौरव का मान दे ……. राष्ट्र की गरिमा का विश्व पटल पर जो माखौल बना रहे प्रतिनिधित्व करने वाले तुगलक सरीखे प्रधानमंत्री को देश का आम देशभक्त बर्दास्त नहीं करने वाला. और अंत में आपसे उस आम देश्बक्त के तौर पर कहना चाहूँगा की ये राष्ट्रीय मुक्ति है उस कलंक से जो एक कुत्सित कला के व्यक्ति ने लगे थी………… वन्देमातरम…..जय हिंद, हिंदी, हिंदुस्तान

    nikhil के द्वारा
    June 23, 2011

    डा साहब राष्ट्र की व्यवस्था ऐसी बन चुकी है की हम अपना राष्ट्रीय चरित्र दिन प्रतिदिन गिराते चले जा रहे है ..और उसका ही परिणाम है किया ऐसे लोग उठते चले जा रहे है ..जिनका प्रहार राष्ट्र की संस्कृति के मान बिन्दुओ पर होता है ..विस्तृत प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद

satish tiwari के द्वारा
June 13, 2011

आपने जो लिखा उसके आलावा मुझे यह भी लग रहा है की हुसैन ने इस देश के संविधान और कानून और नयायपालिका की भी परवाह नहीं किया और देश छोड़ कर भाग गए.उनको इस देश पर भरोसा नहीं था.दुर्भाग्य से इस समय देश में धर्म निरपेक्षता का भूत बहुत लोगो को डरा रहा है . सच बोले तो कमुनल घोषित हो जाओगे.

    nikhil pandey के द्वारा
    June 13, 2011

    बिलकुल सही कहा सतीश जी आपने ..और हमारे देश में मुकेश भट्ट जैसे लोग है जो इस लिए अफ़सोस मानते है की हुसैन को भारत से बाहर जाना पड़ा .. सर कम्युनल घोषित होने के डर से हम ऐसे लोगो के हाथ में अपनी अस्मत नहीं दे सकते कम्युनल होना स्वीकार है .. आपकी अनमोल प्रतिक्रिया के लिए आभार

Shailu Mishra के द्वारा
June 12, 2011

भाई सर्वप्रथम आपको इस लेख के लिए धन्यवाद जो आपने सब तक ये सन्देश ओउर जानकारी पहुचई हम तो बस यही कहेंगे हुसैन की मौत देश की मुक्ति ही इतने पापी इंसान से जिसने करोडो भारतीयों को लज्जित करने का नारकीय कार्य किया हो जिसे माता का स्थान दिए गया हो उसे नग्न फोटो पर बनाना क्या है शायद वो किसी माता की नहीं जानवर की ओउलाद था तभी तो माता क्या होती है जान न सका नहीं तो शायद ये करते समय उसकी रूह कांप जाती जन्हा तक आपने प्रधानमंत्री जी की बात की अब हम आप किसी (*********************) ऐसे इसान के बारे में क्या कह सकते है जो खुद शायद आपनी मर्जी से छीक भी नहीं सकता तो वो बेचारा तो वही बलेगा जो बोलने को कहा जायेगा नहीं तो वोट बैंक खराब हो जायेगा न हाँ अगर बाबा रामदेव पर लड़ी चलने की बात हो तो आदेश तुरंत आजाता है ओउर क्या कहे

    nikhil pandey के द्वारा
    June 13, 2011

    शालू जी इस विस्तृत प्रतिक्रिया के माध्यम से आपने बता दिया है की देश का हर वर्ग हुसैन जैसो को देश के लिए शाप समझता है ..

manoranjan thakur के द्वारा
June 12, 2011

श्री निखिलजी हुसैन बहुत विवादों में रहे है उनपर आपकी सटीक बेबाक post

    nikhil pandey के द्वारा
    June 13, 2011

    धन्यवाद ..हमें ऐसे लोगो के साथ कोई नरमी नहीं बरतनी है

Dr. SHASHIBHUSHAN के द्वारा
June 11, 2011

हुसैन जैसे निम्न प्रवॄति वाले कलाकार इस देश मे तॊ क्या विदेशो मे भी पैदा नही होना चाहिये । उसकी मृत्यु पर   तॊ राष्ट्रीय समारॊह हॊना चाहिये कि एक पाप से मुक्ति मिली ।

    nikhil pandey के द्वारा
    June 13, 2011

    डा साहब सही कहा .. हमें तो खुद उसका विरोध करके अपने पापो के लिए मुक्ति का काम करना चाहिए जो हमने ऐसे व्यक्ति को प्रश्र देकर किये

tripathivasudev के द्वारा
June 11, 2011

निखिल जी आपके शब्दों में भारतीय आत्मसम्मान व राष्ट्रीय गौरव प्रतिबिंबित होता है| यह एक सबक होना चाहिए उन लोगों के लिए जो निर्लज्जता को सहनशीलता व राष्ट्रद्रोह को कला की संज्ञा देते हैं| कोटि-कोटि धन्यबाद.

    nikhil pandey के द्वारा
    June 13, 2011

    वासुदेव जी धन्यवाद आपको ..जो आपने इस तरह खुलकर समर्थन किया अन्यथा कोई भी कम्युनल नहीं कहलाना चाहता है

chaatak के द्वारा
June 11, 2011

निखिल भाई, सबसे पहले तो इस राष्ट्रीय शर्म के विषय पर बेबाक लेखन पर मैं आपको बधाई देते हुए सत्य को बिना किसी लाग लपेट के रखने के साहस की प्रशंसा करता हूँ. एक दुश्चरित्र व्यक्ति भी कलाकार हो सकता है बस मीडिया और चरित्रहीन राजनेता होने चाहियें और उसकी हमारे देश में कोई कमी भी नहीं है मरदूद फ़िदा को आप उन कलाकारों की श्रेणी में रख सकते हैं जो मानसिक रूप से निहायत बीमार हों और उनके प्रशंसकों को आप नग्नता को कला कहने वाले उन विद्वानों की श्रेणी में रख सकते हैं जो लिव-इन-रिलेशन और समलैंगिक संबंधों की वकालत करते हैं. वन्देमातरम

    nikhil pandey के द्वारा
    June 13, 2011

    वन्दे मातरम चातक जी .. जो बात मैंने इन दिनों समझी है वह ये है की यदि आप किसी विषय का विरोध करते है तो उसे समझकर उसका पूरी ताकत से विरोध करे .. कोई समझौता नहीं कोई भय नहीं की मै कम्युनल कहलाऊ .. किसी दर से हमें अपने रष्ट्रीय चरित्र से समझौता नहीं करना है …ऐसे लोग इस देश में नहीं रह सकते जय हिंद

    sunildubey के द्वारा
    June 23, 2011

    ऐसे लोगो को पनपने ही नहीं देना चहिये .. भारत सरकार को तो इसपर कोई प्रतिक्रिया नहीं देनी चाहिए थी .. कम से कम राष्ट्रीय क्षति तो नहीं ही कहा जाना चाहिए पर वोट की राजनीती है .. गटर के पानी से भी मुह धो लेंगे ये नेता

    nikhil के द्वारा
    June 23, 2011

    सुनील जी सही कहा आपने ये नेता गन्दी नाली की कीड़े ही है जो कही भी झुक जाते है

allrounder के द्वारा
June 11, 2011

ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे और उन्हें सदबुद्धि दे की ईश्वर द्वारा प्रदत्त कला का जो दुरपयोग उन्होंने अपने ही देशवासियों की भावनाओं को ठेश पहुँचाने के लिए किया था ! अगले जनम मै उसे दोहराने से बचें !

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    June 11, 2011

    यह सब तो ठीक है सचिन भाई लेकिन अगले जन्म में भी उनकी गजगामिनी जैसी फिल्मे भी हमको बर्दाश्त करनी ही पड़ेगी ……. वैसे उनके जाने का उनके परिवार के इलावा शायद ही किसी को दुःख हुआ हो ? धन्यवाद

    nikhil pandey के द्वारा
    June 13, 2011

    सचिन भाई इश्वर करे वो अगले जन्म में अरब में पैदा हो या पकिस्तान में .. वह जो मर्जी वो करे

    nikhil pandey के द्वारा
    June 13, 2011

    राजकमल जी की समस्या सही है अब वे मुक्त हो जाये तो ही ठीक है अन्यथा गजगामिनी फिर देखनी पड़ेगी ..

sunildubey के द्वारा
June 11, 2011

मकबूल फ़िदा हुसैन को एक कलाकार के तौर पर पुरे देश में विदेशो में जाना जाता है .. भारत में ही उन्होंने ऐसा किया जिसने भारतीयों के मन में हुसैन के प्रति नफरत के बीज बो दिए अब जबकि हुसैन की मृत्यु हो गई है हमें कम से कम ऐसे व्यक्ति को तो रोल माडल नहीं बनाना चाहिए जिसपर इतने संगीन विवाद हो ,,, हुसैन की मृत्यु को राष्ट्रीय क्षति तो मई भी नहीं मानूंगा ..

    nikhil pandey के द्वारा
    June 13, 2011

    सुनील जी प्रतिक्रिया देने के लिए आभार


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