सर झुकाकर आसमा को देखिये ...........

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जूता कारगर नहीं कुछ और जरुरी है आज....“Jagran Junction Forum”

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कांग्रेस के एक नेता जनार्दन दिवेदी जब सत्याग्रहियों के गुण बता रहे थे अपनी प्रेस कांफ्रेंस में तब एक व्यक्ति जूता लेकर पहुच गया ..यद्यपि जनार्दन दिवेदी जी जूता पूजन की एक और घटना से बच गए …. और यकीन माने इस घटना को मै भी अनावश्यक मानता हु .ऐसा करने की कोई जरुरत नहीं थी क्योकि चार जून की रात कांग्रेस ने अपने मुख पर कालिख पुता एक ऐसा जूता स्वयं ही मार लिया है जिसकी छाप लम्बे समय तक उसके मुख पर रहेगी .ये जूता वैसा ही है जैसा आपातकाल के समय और फिर सिख दंगो के समय कांग्रेस ने अपने मुख पर मारा था . उसके बाद भी उसका जूता प्रेम समाप्त नहीं हुआ .. बोफोर्स दलाली खाकर ,क्वात्रोची को फिर एंडरसन को बचाकर भी उसने अपने मुख पर जुते मारे ..फिर कामनवेल्थ , 2G और फिर रामलीला मैदान में निहत्थे सत्याग्रहियों को कुचल कर .. आधी रात को महिलाओं को उठाकर कर अपमानित करके उन्हें घसीट घसीट कर जिस तरह मारा , और जो रावण लीला मचाने की छुट पुलिस को दी उसके बाद मुझे नहीं लगता किसी और को जूता दिखने की जरुरत है ..दिग्विजय सिंह ,कपिल सिब्बल ,बंसल ,चिदंबरम , सोनिया गाँधी और मनमोहन सिंह ने खुद ही जूता उठाया और सरकार के मुह पर मार दिया है …

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आम जन को केवल अपनी जिम्मेदारी समझने और निभाने की जरुरत है .ये समय है की अन्ना हजारे बाबा रामदेव ,गोविन्दाचार्य ,अरविन्द केजरीवाल और उस हर व्यक्ति के साथ देश की सज्जन शक्ति लगे जो परिवर्तन चाहती है क्योकि बदलाव के लिए आधार बन रहा है .अब ये हमारे ऊपर है की इन परिस्थितियों में कैसे अपनी पूरी शक्ति लक्ष्य को पाने में लगा दे . आम आदमी जो कभी बात नहीं करता था वो मुखर होकर विरोध कर रहा है जो केवल आपसी चर्चा करके चुप हो जाने वाला वर्ग था वो सड़क चौराहे पर धरने में शामिल हो रहा है … इसे हम क्या कहे?

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वजह साफ़ है 1 महीने तक गुर्जर आन्दोलन ने देश को बंधक बना कर रखा था सरकार दमन करने की जगह मिमियाती रही , मुम्बई पर हुए हमलो के अपराधियों को सत्ता अपना दामाद बना कर खातिरदारी करती रही .. अरुंधती राय , गिलानी जैसे राष्ट्रद्रोहियो को दिल्ली सरकार बैठकर नाश्ता कराती रही . अफजल की फ़ासी पर नपुंसक सरकार के दोगले मंत्री नेता राष्ट्र में विद्रोह के डर का हवाला देते रहे.. और यकीं मानिए अगर मीडिया ने और न्यायपालिका ने सक्रियता नहीं दिखाई होती तो आज भी कलमाड़ी और राजा जैसे निम्न कोटि के कीड़े किसी आलीशान महल में आराम कर रहे होते . रामदेव अन्ना हजारे और सत्याग्रह करने वालो के लिए दिल्ली के रास्ते बंद कर दिए गए . भूखे ,प्यासे निहत्थे सत्याग्रही ,महिलाओं बच्चो से सरकार इतना डर गई मानो वहा गृह युद्ध हो रहा हो.. जब भी चार जून का दृश्य टेलीविजन पर देखता हु तो मेरा मन सिहर उठता है .

मै व्यथित हु ,मै अभी तक इसका उत्तर नहीं समझ पाया की आखिर सरकार ने ऐसा क्यों किया, .. इसका एक अर्थ तो आसानी से समझा जा सकता है की सबसे ज्यादा भ्रष्ट तो कांग्रेस ही है .वे भ्रष्टाचार के खिलाफ नहीं खड़े होंगे क्योकि इस तरह कांग्रेस की अपनी जड़े खुद जाएँगी .. आजादी के बाद उसका सारा खाद पानी इसी भ्रष्टाचार से ही आया है .

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हम प्रश्न तो करेंगे ? और उतर देना ही होगा इसकी अंतिम परिणिति चुनावों में दिखेगी और दिखनी ही चाहिए .. जनाक्रोश थमेगा नहीं ये अभी और बढेगा लोकतंत्र के हत्यारों को सबक सिखाना जरुरी है .. रामलीला मैदान में जो हुआ वह पुरे राष्ट्र के लिए एक आवाहन है की भारत को अगर जीना है तो खुद उठना होगा ,खुद चलना होगा बैसाखियों को छोड़ना ही होगा ..जिस राष्ट्र ने सत्याग्रह कर के अंग्रेजो को नंगा कर के भगा दिया वह ऐसे दमन से नहीं डर सकता . इस राष्ट्र की सज्जन शक्ति जब एक साथ उठ खड़ी होगी . भ्रष्टाचारी स्वयं निर्वस्त्र हो जायेंगे …

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कहते है न की चरित्रहीन व्यक्ति भयभीत रहता है और अपना परिचय स्वयं दे देता है अपने व्यवहार से .. मेरा अनुरोध है की भ्रष्टाचार का विरोध करने वाले हर व्यक्ति के समर्थन में यथाशक्ति सभागी बने औकांग्रेस की कांफ्रेस में कृपया नंगे पैर जाये .. उन्हें जूते दिखने की जरुरत नहीं . वे स्वयं ही ये काम कर लेंगे …….

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32 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

rahulpriyadarshi के द्वारा
June 19, 2011

निखिल जी,सोलह आने सच कह रहे हैं आप,इन घटनाओं के बारे में विचारने पर अंतर्मन कुछ अजीब ढंग से धिक्कारता है.

    nikhil के द्वारा
    July 6, 2011

    जी राहुल जी ऐसी घटनाये मन में बेचैनी पैदा कर देती है

R K KHURANA के द्वारा
June 13, 2011

प्रिय निखिल जी, बहुत सुंदर लेख ! अपने जूता पुराण के बहाने सारी पोल खोल कर रख दी. राम कृष्ण खुराना

    nikhil के द्वारा
    June 16, 2011

    सर प्रणाम .. धन्यवाद आपकी अनमोल प्रतिक्रिया के लिए

Dr. SHASHIBHUSHAN के द्वारा
June 11, 2011

मेरी प्रतिक्रिया निम्न शब्दॊ मे है-   कौवे गिद्ध सियारॊ से भरा हुआ दरबार ।   घूसखॊर बेईमानॊ की लम्बी लगी कतार ।   लम्बी लगी कतार न इनमे कॊई अच्छा ।   जनता  कॊ  ऐसे  बहलाते   जैसे   बच्चा ।   गरुडृ एक आया है जिसका नाम हजारे ।   नेता काँप रहे सब थर थर डर के  मारे ।   रॊज  जमाते  थे  जॊ  बॊतल अद्धे - पौवे ।   पत्थर  एक देखते  ही दुबके सब कौवे ।।

    nikhil के द्वारा
    June 16, 2011

    डॉ साहब अपनी इस रचना में सबकुछ सटीक ढंग से कह दिया है आपने ..प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद

Munish के द्वारा
June 11, 2011

निखिलजी आपने सही लिखा है, वास्तव में हमें कांग्रेसियों को जूता मारकर जूते की बेइज्जती नहीं करनी चाहिए, जूते का महत्त्व आप समझ सकें इसलिए एक लिंक दे रहा हूँ http://munish.jagranjunction.com/2011/06/10/%e0%a4%9c%e0%a5%82%e0%a4%a4%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%ac%e0%a5%9d%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b5/

    nikhil के द्वारा
    June 16, 2011

    मुनीश जी आपके लेख को पढ़ा मैंने ..जूते पर काफी बढ़िया लिखा है आपने सही कहा इन्हें जूता मरकर जूते की बेइज्जती नहीं करनी चाहिए

Dr S Shankar Singh के द्वारा
June 10, 2011

अच्छा लेख. इस सरकार के मुख पर कालिख पुत चुकी है. 4 जूनकी रात्रि को राम लीला मैदान में जो जलियानवाला बाग़ – II काण्ड हुआ वह इतिहास में काले पृष्ठ के रूप में दर्ज होगा. डायर का स्थान लेंगे मनमोहन सिंह, सोनिया गाँधी, चिदंबरम और कपिल सिब्बल. एक तथ्यपरक लेख के लिए बहुत बहुत बधाई

    nikhil के द्वारा
    June 11, 2011

    आदरणीय डा. साहब प्रणाम सही उपधिया दी है आपने ये सब डायर और डगलस की औलादे है जो देश को अपनी जागीर समझ कर बैठे है आशीर्वाद के लिए आभार

sandeep के द्वारा
June 10, 2011

आपने जो भी लिखा है वोह सच है और यह बात हर देश्बह्क्त जनता है की यह सर्कार भ्र्रस्त है . बस अब यह लोग यह जान ले की इन कीड़ो को गद्दी से गिरा के कुचलना है, अब तो यह बात मने या ना माने बिल बने या ना बने इस सर्कार को नहीं बर्दाश्त कर सकते है हम.

    nikhil के द्वारा
    June 11, 2011

    जी संदीप जी हम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे और इसका जवाब जरुर देंगे

Dr. Naveen Pandey के द्वारा
June 10, 2011

आदरणीय बड़े भैया सादर प्रणाम नित्य दिनों की भांति आज भी आपका लेख पढ़ा जो निश्चित ही वर्तमान लोकतंत्र के काले अध्याय का सारगर्भित संकलन है , इस प्रकार के कायरतापूर्ण कार्य पर भी यदि चेतना नहीं जागृत हो तो यह नितांत कष्टकारी होने वाला है आने वाले दिनों में …………….. आज सत्याग्रह का दमन एक और परतंत्रता की ओर अग्रसरित है………. और अबकी लड़ाई भयावह इसलिए होगी क्योकि आज गाँधी , सुभाष, भगत नहीं मिलने वाले हाँ सिब्बल जैसे डायर दिग्विजय जैसे डगलस की भरमार है…………….. एक संघर्ष देश की आज़ादी के लिए थी और अब जरुरत है अपने हितो के लिए अपनी अपनी लड़ाई स्वयं लड़ना………. वो भी ऐसे देश में जिस पर हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है,

    nikhil के द्वारा
    June 11, 2011

    ऐसी उर्जा की ही जरुरत है देश को जो अपने हितो की लडाई लड़ने के लिए जागरूक है ..प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद

sunildubey के द्वारा
June 10, 2011

लोकतंत्र में राजनीती ने सबकुछ भ्रष्ट कर दिया है सत्ता अपनी मनमानी के रास्ते में कुछ भी रुकावट नहीं बर्दाश्त कर सकती है इसी का परिणाम है ये कार्यवाही .. हम सभी को एक जुट होकर इसके विरोध में खड़े होना पड़ेगा

    nikhil के द्वारा
    June 11, 2011

    जी हा सुनील जी हमें एक जुटता दिखानी होगी तभी समस्याए सुलझेंगी . प्रतिक्रिया के लिए आभार

Baijnath Pandey के द्वारा
June 9, 2011

आदरणीय श्री निखिल जी सादर अभिवादन इस बेहतरीन आलेख के लिए आभार | जुत्ता एवं कांग्रेस की महागाथा को बड़े ही रोचक ढंग से प्रस्तुत किया है | कांग्रेस खुद ही इस देश के मुह पर अंग्रेजों द्वारा मारा गया एक जुत्ता है …………….इनके सामने अन्य जुत्तों की चर्चा क्या |

    nikhil के द्वारा
    June 11, 2011

    धन्यवाद मित्र

Aakash Tiwaari के द्वारा
June 8, 2011

श्री निखिल पाण्डेय जी, अभी हाल ही में मैंने एक लेख लिखा था की हम भी आतंकवादी कसाब बनेंगे..जो की इस देश में हो रही घटनाओं को बहुत अच्छे से दिखा रहा है…इस देश में एक आतंकवादी की सुरक्षा पर दस करोड़ का खर्चा किया जा रहा है और दूसरी तरफ एक सत्याग्रह को सुरक्षा न दे पाने का एक वाहियाद कारण बताते हुए इतना तुच्छ काम किया जाता है..इस देश में अगर अगर सुरक्षित जीना है तो कसब ही बनना पड़ेगा…कांग्रेस को अपने इस तुच्छ कार्य का परिणाम भुगतना ही पड़ेगा.. आकाश तिवारी

    nikhil के द्वारा
    June 11, 2011

    आकाश जी हम सबही में इसके प्रति आक्रोश है . आपकी प्रतिक्रिया के लिए आभारी हु

nishamittal के द्वारा
June 8, 2011

वोट और तुष्टिकरण की राजनीति देश को तोड़ रही है,विघटन के कगार पर लाकर खड़ा कर दिया,परन्तु देशहित की चिंता किसी को नहीं और थोड़ी बहुत किसी को होती भी है,तो दमन के माध्यम से कुचल दिया जाता है.

    nikhil के द्वारा
    June 11, 2011

    राजनीती ने अपने जीवन के लिए ऐसे ऐसे हथकंडे अपना लिए है जिनके द्वारा आमजन का केवल शोषण हो रहा है .. इसके विरुद्ध उठने वालो को कुचलने का प्रयास होता है आर फिर कहा जाता है की देश एक लोकतान्त्रिक देश है .. प्रतिक्रिया के लिए आभार

आर.एन. शाही के द्वारा
June 8, 2011

एक जूता तो आपने भी चला ही दिया निखिल जी, लेकिन इन जूताखोरों को इससे कोई फ़र्क़ पड़ने वाला नहीं है । गधे की पीठ पर जैसे एक जूता, वैसे ही हज़ार जूते । वाह !

    nikhil के द्वारा
    June 11, 2011

    सर प्रणाम सही कहा आपने गधे की पीठ पर जैसे एक जूता, वैसे ही हज़ार जूते

R K KHURANA के द्वारा
June 8, 2011

प्रिय निखिल जी, राजनीतिज्ञों का हलवा -मांड इसी से चलता है इसलिए वे यह सब करने के लिए मजबूर है ! राम कृष्ण खुराना

    nikhil के द्वारा
    June 11, 2011

    सही कहा आपने सर .. सरकार की मजबूरी हम समझ सकते है .. लेकिन अब सरकार को और झेल नहीं सकते.. प्रतिक्रिया के लिए आभार

allrounder के द्वारा
June 8, 2011

निखिल भाई , बहाया सरकार पर करार प्रहार करते लेख पर हार्दिक अभिनन्दन !

    nikhil के द्वारा
    June 11, 2011

    धन्यवाद

alkargupta1 के द्वारा
June 8, 2011

निखिल जी, राष्ट्र के विरुद्ध जब असंख्य जन शक्तियां उठ खड़ी होंगी तब सारे भ्रष्टाचारियों को निर्वस्त्र हो ही जाना है बस उन्हें एक बार संगठित होने की और बुद्धि पर पड़े परदे के अनावरण की जरूरत है…..| कांग्रेस के तो स्वयं ही जूते लग रहे हैं | अच्छे लेख के लिए बधाई !

    nikhil के द्वारा
    June 11, 2011

    अलका जी तभी तो उन्हें और जुटे मारने की जरुरत नहीं है .. उनके कृत्या जनता के सामने स्वयं ही नग्न हो रहे है प्रतिक्रिया के लिए आभार

roshni के द्वारा
June 8, 2011

निखिल जी नमस्कार लोकतंत्र के हत्यारों को सबक सिखाना जरुरी है … बिलकुल सही कहा अपने ……. सरकार को जहाँ जोर दिखाना चहिये वहां तो दिखाती नहीं और देश की भलाई के लिए किये जा रहे आन्दोलन को जोर अजमाइश से दबाना चाहती है .. अच्छे लेख के लिए बधाई

    nikhil के द्वारा
    June 11, 2011

    रौशनी जी लेख की सराहना के लिए आभार


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