सर झुकाकर आसमा को देखिये ...........

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लोकतंत्र जल रहा है,कहा है सम्राज्ञी,देश के युवराज और वह नीरो?

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औरंगजेब के शाशनकाल में एक घटना हुई .जब जजिया उसने लगा दिया तो राजधानी की जनता उससे निजात पाने के लिए बादशाह से रहम की भीख मांगने पहुची , बादशाह हाथी पर सवार होकर निकल रहा था लोगो ने कहा की अगर वह उन्हें जजिया जैसे अमानवीय कर से मुक्त नहीं करेगा तो वे उसके रास्ते पर लेट जायेंगे .और आम जन ने ऐसा ही किया .. इसपर उस निष्ठुर सम्राट ने अपने महावत से कहा की हाथी उनके ऊपर से ही निकाल दे क्योकि जजिया नहीं हटेगा .. और परिणाम स्वरुप सैकड़ो लोग हाथी के नीचे आकर मारे गए ….

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कोई भी काल रहा हो इस देश में नेतृत्व जिनके भी हाथो में रहा वे जवाबदेह रहे और जनता के सामने आकर शाशन या जुल्म करते रहे …

चार जून से जो घटनाक्रम चल रहा है उसपर चर्चा तो होती ही रहेगी पर विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के लिए इससे ज्यादा शर्मनाक क्या होगा की लोकतंत्र की राजधानी में शांतिपूर्ण सत्याग्रह कर रहे एक लाख लोगो पर इतना बड़I गैर-लोकतान्त्रिक ,कायराना और मध्यकालीन बर्बरता को पीछे छोड़ने वाला कुकृत्य हुआ ..सारा देश ,, सारे राजनीतिक दल आश्चर्य से सरकार के सामने प्रश्नवाचक मुद्रा में खड़े है .. और अभी तक 17 घंटे हो गए पर देश के तथाकथित संवैधानिक प्रमुख न जाने किस कुम्भकरणीय निद्रा में है . अभी तक उन्होंने राष्ट्र के सामने आने की जरुरत नहीं समझी शायद वे किसी विशेष निर्देश का इंतज़ार कर रहे है .. और देश को 2 -3 बेहद अतार्किक .चापलूस चारणों के हवाले कर रखा है .. उनपर राष्ट्र क्या विश्वाश करे ये समझ में नहीं आता,

एक तरफ दिग्विजय सिंह जैसे महामूर्ख और मानसिक रूप से पैदल चारण परंपरा के प्रति पूर्ण निष्ठ मंत्री है जो लादेन जैसे नरभक्षियों को लादेन जी संबोधित करते है तो दूसरी तरफ कपिल सिब्बल जैसे धूर्त राजनीतिज्ञ है जिनकी कुटिलता 2g और राष्ट्रमंडल मामलो में ही पता चल गई… मुझे संदेह नहीं की अगर लादेन का शव अमेरिका ले नहीं जाता और पाकिस्तान में कही उसकी अंतिम क्रिया होती तो और कोई जाता या नहीं पर दिग्विजय सिंह जरुर जाते ..और ऐसा व्यक्ति रामदेव ,गोविन्दाचार्य और अन्ना हजारे जैसे राष्ट्रीय रोल माडलों को ठग बता रहा है तो वह महामूर्ख या महा ठग ही कहा जायेगा ..

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मै एक बात स्पष्ट करना चाहता हु की मै किसी का अंध-समर्थक नहीं , मै अन्ना हजारे के समर्थन में भी अनशन पर बैठा , 10 मई को के.एन गोविन्दाचार्य जी के समर्थन में 24 घंटे के उपवास पर भी बैठा और 4 जून को रामदेव जी के भी समर्थन में उपवास पर बैठा .. क्योकि मेरे और हर जागरूक देशवासी के लिए अन्ना हजारे , गोविन्दाचार्य या रामदेव से ज्यादा महत्वपूर्ण है वह मुद्दा जिसके लिए वे लड़ रहे है … और जहा तक हम जानते है लोकशाही में धरना प्रदर्शन करना अपराध नहीं बल्कि लोकतंत्र का खाद – पानी कहा जाता है .. और दुनिया को सत्याग्रह सिखाने वाले गाँधी के देश में हुए इस शांतिपूर्ण सत्याग्रह पर नादिरशाही आक्रमण अक्षम्य है.

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किसने किसे ठगा .कितना ठगा ये पुरे देश ने देखा .. जिस देश में सर्वोच्च पदों पर महिलाये आसीन हो..उसके शाशन में आधी रात को महिलाओं को उठाकर पीट पीट कर घसीटा जाये , संतो को नग्न करके अपमानित किया जाये .देश की राष्ट्रपति और कांग्रेस प्रमुख सोनिया गाँधी के लिए इससे शर्मनाक और कुछ नहीं हो सकता . पूरा घटनाक्रम इस तरह हुआ मानो रामलीला मैदान में सत्याग्रह कर रहे रामदेव और सत्याग्रही नहीं बल्कि लादेन और उसका ट्रेनिंग कैम्प हो…

कहा पर है कांग्रेस की सम्राज्ञी और देश के सामने आम आदमी का मसीहा कहलाने वाले युवराज ??.क्या आधी रात को बच्चो , महिलाओं निर्दोष निहत्थे लोगो पर हो रही तालिबानी कार्यवाही की चीखे उनके कानो तक नहीं पहुची या फिर रामलीला मैदान में बैठे सत्याग्रही उनकी प्रजा नहीं थे ?

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मेरा विषय न तो दिग्विजय सिंह है और न रामदेव .. मेरा विषय सिर्फ ये है की देश के लोकतंत्रक मूल्यों पर हुए इस आक्रमण से लोकतंत्र कराह रहा है और हमारा नीरो न जाने कहा चैन की बंसी बजा रहा है.???? क्या आपको पता है?

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50 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Devendra के द्वारा
July 2, 2011

This is a tough time for Indian Democracy,, actually we are ruiled by rubber stamp. Unfortunatily we have no political face in which we can show honesty, values and feelings for the emotions.This is the requirement of time,,Youth must came in front to guide the society.

    nikhil के द्वारा
    July 6, 2011

    देवेन्द्र जी प्रतिक्रिया के लिए आभार

RAMESH AGARWAL के द्वारा
June 20, 2011

IT SEEMS CONGRESS IS MENTALLY BANKRUPT OTHERWISE COULD NOT FIND ONE PERSON FOR PM OUT OF 115CRORES INDIANS OUTSIDE NEHRU/GANDHI FAMILY.IT SEEMS CONGRESS IS A PARTY OF SYCOPHANS AND CANT THINK BEYOND 10 JANPATH.THIS RAHUL GANDHI WENT TO FARMERS OF BHATTA PARSAUL IN NOIDA EARLY IN THEMORNING INSPITE OF 144 TO EXPRESS SYMPATHY ON SO CALLED POLICE BRUTALITY AND SAID THAT HE IS BEING ASHAMED OF BEING INDIAN BUT WHAT HAD HAPPENED TO 4TH NIGHT POLICE BRUTALITY ON 50000 SUPPORTERS OF RAMDEVJI SUPPORTERS WHO WERE RAISING THEIR VOICES AGAINST CORRUPTION AND FOR BRINGING BACK MONEY .WAS THIS POLICE CRACKDOWN IN MIDNIGHT JUSTIFIED AND AN INCIDENT WHICH WILL RAISE RAHUL!S HEAD WITH PROUD?IF NOT THEN WHY IT WAS NOT CONDEMNED BY HIM AND HIS MOTHER.INSTEAD DIGVIJAYA SINGH IS SHOWERING ABUSES ON A PATRIOTIC SAINT WHO IS DOING EXCELLANT SERVICES TO THE NATION AND GOT APPRECIATION NOT ONLY IN INDIA BUT ALSO ABROAD.SUCH PERSON SHOULD BE RESPECTED AND NOT DESRVE SUCH KIND OF TREATMENT.BY ABSTAING FROM MAKING ANY COMMENTS RAHUL HAS SHOWN HIS DISRESPECT TO INDIAN SAINTS, CULTURE AND INDIANISATION WHICH IS SHAMEFUL.

    nikhil के द्वारा
    July 6, 2011

    thanks for your coment

ashwanikumar के द्वारा
June 18, 2011

ye bharat ki janta ki aawaz hai

    nikhil pandey के द्वारा
    June 20, 2011

    जी अस्वनी जी ये भारत की जनता की ही आवाज है और इसे आप सभी की आवाज से मजबूती मिली है .धन्यवाद

Chen Singh deora के द्वारा
June 14, 2011

Rauol ghandi Kay hai. Unka koei comment nahi aha raha. kauu.

    nikhil pandey के द्वारा
    June 20, 2011

    राहुल गाँधी अभी चापलूसों के घेरे में कैद है … या फिर कही छुट्टिया मना रहे होंगे … या उनके आँख नाक कान और मुह बंद कर दिए गए होंगे ..आखिर युवराज है कांग्रेस के न की देश की जनता के

Dr. Naveen Pandey के द्वारा
June 10, 2011

किन्कर्ताव्यविमुध हो चुकी सरकार अब ये नहीं समझ पा रही है क की किस दिशा में अग्रसर हो……. अपने भ्रस्ता मंत्रियो की गलतियों से उसका मानसिक संतुलन पूरी तरह से अनियंत्रित हो चूका है ऐसी परिस्थिति में अपने मनन ki आकुलता को जिस तरह से रोष में प्रकट कर रही है आने वाले दिनों में जनता का आक्रोश झेलने को टायर रहे……………… जो निकट भविष्य में एक झंझावत की तरह आने वाला है

    nikhil के द्वारा
    June 11, 2011

    डॉ साहब वास्तविक मूल्याङ्कन किया है आपने .. यह झंझावात जरुर आएगा कांग्रेस की राजशाही पर और वास्तविक लोकतंत्र उठ खड़ा होगा , प्रतिक्रिया के लिए आभार

sunildubey के द्वारा
June 10, 2011

वास्तव में महवपूर्ण है मुद्दा उसे चाहे कोई भी उठाये हमें समर्थन करना चाहिए .. आजतक भ्रष्टाचार के मुद्दे पर सामने आकर इस तरह आन्दोलन करने वाला क्यों कोई नहीं खड़ा हुआ .. जे पी आन्दोलन के बाद आज तक भारत के इतिहास मई ऐसा कभी नहीं हुआ जब आम जनता का हर वर्ग भ्रष्टाचार के खिलाफ हुए आवाहन पर सडको पर उतर गया हो.. नेता मंत्री , माफिया और अफसरशाही के गठजोड़ के शाशन से जनता तंग हो चुकी है इसीलिए आम जनता को इस तरह सडको पर उतरना पड़ा.

    nikhil के द्वारा
    June 11, 2011

    सुनील जी सही कहा आपने महत्वपूर्ण है मुद्दा ..जिसके लिए जनता को सड़क पर उतरना पड़ा है ..और वजह यही है की जनता इस व्यवस्था से तंग आ चुकी है .. मुद्दा कोई भी लेकर आगे आता .. जनता उसका साथ देती dhanyawaad

Dr. Naveen Pandey के द्वारा
June 10, 2011

Respected Big Brother, i would like to give you tanks for such beneficial comments upon current issue. now the time for strict action upon these. A good and healthy article is necessary to stimulate common man for upcoming threates.

    nikhil के द्वारा
    June 11, 2011

    प्रतिक्रिया देने के लिए धन्यवाद

Ratnesh के द्वारा
June 10, 2011

Vinas kale viprit buddhi…congresh ka antim samay chal rha hai..

    nikhil के द्वारा
    June 11, 2011

    रत्नेश जी सही कहा आपने ये सरकार पूरी जनता को अँधा और बहरा और गुणगा ही बनाये रखना चाहती थी मगर अब जनता की आँखे खुल रही है और कांग्रेस की जमीं धस रही है …प्रतिक्रिया देने के लिए आभार

Harish Bhatt के द्वारा
June 8, 2011

निखिल जी नमस्ते….. आपने बहुत सही लिखा है. लेख के लिए हार्दिक बधाई.

    nikhil के द्वारा
    June 11, 2011

    हरीश जी नमस्ते . विचारो को जो आपने समर्थन दिया है उसके लिए आभार

shuklaom के द्वारा
June 8, 2011

सारगर्भित लेख के लिए आपका आभार व्यक्त करते शुभकामना अपने बिलकुल वाजिब सवाल उठाया है कि भट्टा-परसौल में जहा किसानो के भेष में आपराधिक तत्यो ने जिन्होने सरकारी कर्मचारियो का अपहरद किया था और उन्हें मुक्त करने गए अधिकारिओ पर असलहो से हमला किया और उसमे जिलाधीश तक को गोली मरी गयी वह यह बहुरुपिया युवराज जिसकी निष्ठां तक संदिग्ध है कानून की धज्जिया उडाता पहुच कर अशांति पहुचने की नाकाम कोशिस की,और मात्र राजनितिक रोटिया सकने के लिए ७४ लोगो की हत्या तथा महिलाओ के साथ बलात्कार का झूठा,और फरेबी बयान ही नहीं दिया प्रधानमंत्री जो एकतरह से उसके घरेलु नौकर की तरह व्यवहार करते हुए उसकी लफ्फाजियो को इतना महत्व दिया और अपने अधिकारों का अतिक्रमद करते हुए सहायता राशी जारी की वह उनकी साम्राजवादी चाकरी का घ्रिदित उदाह्रद है. और आज जब सर्वोच्च न्यायालय तक इसे अलोक्तान्त्रन्रिक घोषित कर नोटिस जारी किया तो हमारे बंधक ध्रितराष्ट्र शिखंडी मनमोहन घटना को दुर्भाग्य्पुर्द लेकिन आवश्यक बताने और सम्राज्ञी तथा युवराज के आगे शिखंडी की भूमिका में फिर अवतरित हुए भट्टा-परसौल के किसानो की तो गलती थी कि उन लोगो ने कानून हाथ में लिया लेकिन शाहरुख़,सलमान को आदर्श मन उन्ही से प्रेरदा ले एक स्टंट कर विदुशाको की टोली में शामिल हो उत्तर प्रदेश को जीतने का ख्वाब कनिष्क सिंह के बेडरूम में देखते रहे यहाँ उनकी नाक के नीचे इतने बड़े पुलिसिया तांडव जिसमे कैमरों के सामने महिलाओ,बच्चो,वृधो पर अमानुषिक कार्यवाही को टी.वी.पर देखते हुए खिलखिला रहे थे माँ-बेटे विजय केक काटते और आन्दोलन की कुचलने की ख़ुशी मानते रहे. यह भारतीय खून नहीं हो सकता इन दोनों के अंदर विदेशी इटालियन जीवाणु है. इनके अंदर मानवीय मूल्यों का सर्वथा आभाव है इसका गुरु भी मध्य प्रदेश से खदेड़ा गया दिग्गी है जिसे तत्काल मानसिक चिकित्सा की आवश्यकता है नहीं तो वह दिन दूर नहीं जब यह लोगो को कटाने दौड़ेगा कि यह आर.एस.एस. का है हमें लगता है कि दिग्गी राजा की बचपन की कोई आर.एस.एस. से जुडी फूहड़ यादे है जो इसे चैन से रहने नहीं देती इसे हर मामले में वही कुछ-नकुछ बकने को विवश कराती रहती है. आखिर यहाँ हो क्या रहा है क्या किसी खास संप्रदाय का होने की वजह से इन अर्ध्विदेशी और अर्धैसी-अर्धाहिंदु खानदान और उसके वारिस के अतिरिक्त किसी को बोलने का अधिकार नहीं है आज से नहीं इंदिरा गाँधी और राजीव गाँधी के विदेशी खातो को जेर्मनी तथा any samachar patro ने नंबर के साथ प्रकाशित किया है और उसका खण्डन भी इस परिवार द्वारा नहीं किया गया है ( सम्पुर्द जानकारी के लिए सुरेशचिपुलकर के महाजाल पर देखे सोनिया गाँधी को कितना जानते है देखे) शायद यही वजह है कि यह सरकार किसी कीमत पर काले धन के बारे में कुछ करना नहीं चाहती नहीं तो एक आम आदमी को भी ज्ञात है कि इस काले धन को वापस लेन से कितना फायदा देश को होगा लेकिन यहाँ तो काले धन की बात करने का मतलब सोनिया रूपी साढ़ को लाल कपडा दिखाना लगता है,इसी के वशीभूत काले धन के मुद्दे बाबा को पहले वी.वी.पी.आई. सम्मान दिया गया जो घूश के रूप में था लेकिन जब बाबा अड़े रहे कि काले धन को राष्ट्रिय संपत्ति घोषित किया जय तो बाबा और उनके साथ के पुरुषो,महिलाओ और बच्चो तक को तोड़ डाला गया. इनदोनो के पास नातो कोई दृष्टि है और नहीं इस देश की मिटटी से कोई मोह आपलोग भूले नहीं होगे जब १९७१ के युध्ध में इसने राजीव को छुट्टी लेने को बाध्य किया और शर्मनाक तरीके से पुरे देश में अकेला पायलेट रहा जो छुट्टी बिताने इटली की रह पकड ली कभी इटली के दूतावास में शरण ली. अबतक तो इनकी निष्ठां संदिग्ध्ध रही लेकिन इस लोमहर्षक घटना के बाद युवराज का अपने मम्मी के पल्लू में छिपने में ही अपनी भलाई समझी. यहाँ की जनता सीधी है नहीं तो इस बहुरूपिए को जूतों से पीटना चाहिए रहा सवाल दिग्गी का तो हम लगभग १५० लोगो ने अभियान चलाया है कि इसकी बाते पढ़े-लिखे लोग अपनी बात-चीत में इसका तिरस्कार करे यह उसी का पात्र है बुध्ध्जिवियो को इसके किसी बात का कोई नोटिस नहीं लेना चाहिए. मई कहा बहक गया बात आपके लेख की हो रही थी,जो बहुत प्रभावशाली तरीके से अपने रखा इसके लिए आपको को पुनह धन्यवाद इसी तरह के लेख लिख हम लोगो की भावनाओ को अभिव्यक्त करते रहे |

    nikhil के द्वारा
    June 11, 2011

    ओम जी आपने इस विस्तृत प्रतिक्रिया में जो भावोभिव्यक्ति की है वह हर उस व्यक्ति के मन की बात है जो लोकतंत्र के विरुद्ध कांग्रेस द्वारा किये गए शर्मनाक कृत्य से आक्रोशित है .. आपने इतनी विस्तृत प्रतिक्रिया में जो विचार बांटे है उसके लिए धन्यवाद .. इस लडाई में हम सभी जुड़े है

    AP Singh के द्वारा
    June 18, 2011

    I am in total agreement with the sentiments expressed.

    nikhil pandey के द्वारा
    June 20, 2011

    सिंह साहब धन्यवाद इस प्रतिक्रिया के लिए

Amardeepsingh के द्वारा
June 7, 2011

congress black money pe isliye chuppi sadhe huye hai kyonki swiss bank me sabse bade khate Nehru family ke hi hai. Congress democracy ki sabse badi dusman and desh ki sabse corrupt party hai inko sabak sikhane ka sabse sahi tarika hai ki sonia-rahul ko jo rajsi respect milta hai ise band kiya jaye aur public ko aware kiya jaye kahi per bhi inka koi progrramme or rally ho to uska bahiskar kiya jaye

    nikhil के द्वारा
    June 11, 2011

    अमरदीप जी जनजागरण ही इसका एकमात्र तरीका है जिस दिन जनता कांग्रेस के खेल को जान जाएगी और जवाब देने लगेगी ..उसदिन ही वास्तविक लोकतंत्र आएगा .. कांग्रेसी चरणों ने लोकतंत्र को उस परिवार का बंधुआ बना कर रख दिया है . प्रतिक्रिया देने के लिए आभार

subhash के द्वारा
June 7, 2011

well said my friend Piyush if government is against corruption why it is refusing to deal with this cancer

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    June 7, 2011

    प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद सुभाष जी

allrounder के द्वारा
June 7, 2011

निखिल भाई नमस्कार , ऊपर सरकार के जिन महानुभावों मंत्रियों का जिक्र आपने किया है उन्होंने हमारे लोकतंत्र मैं एक ऐसा काला अध्याय लिख दिया है, जिसे जब भी पलटा जायेगा भारतीय लोकतान्त्रिक व्यवस्था शर्मसार होगी !

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    June 7, 2011

    सचिन जी सही कहा है आपने लोकतंत्र को शर्मशार करने वाली ही घटना है ये

Alka Gupta के द्वारा
June 6, 2011

निखिल जी , बहुत सही प्रश्न उठाये हैं जिनके शायद जवाब नहीं है…..विचारणीय व सारगर्भित लेख !

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    June 6, 2011

    अलका जी प्रतिक्रिया के लिए आभारी हु जवाब हमें ही ढूंढने होंगे

Rajkamal Sharma के द्वारा
June 6, 2011

अभी तो इक आम आदमी ही हूँ जब लीडर बन जायूँगा तब बतलाऊंगा amjwma

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    June 6, 2011

    राजकमल जी पहले बतलाये तब लीडर बनेंगे .. चुप रहकर लीडर बनेगे तो उसके बाद भी चुप रहना पड़ेगा आज बोलिए ताकि लोग जाने उनका आने वाल लीडर किस योग्य है .. शुभकामनाये

Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
June 6, 2011

निखिल जी……… बाबा का विरोध करने वाले कई लोगों की परेशानी यह है की आखिर कैसे कोई साधारण सा आदमी साइकिल से चर्टेट प्लेन तक पहुँच सकता है…… वो भी एक बड़े जन समर्थन के साथ…… कैसे एक साधारण भगवा धोती पहनने वाला कई कंपनियों का स्वामी हो सकता है….. कैसे कोई आदमी राख मे भी हाथ डाल कर वहाँ से भी सोना निकाल रहा है….. कैसे भगवा धारी एक आदमी अपने पीछे जनसैलाब जमा कर सरकार बदलने की क्षमता दिखा रहा है……. अगर आरएसएस भ्रष्ट है …… अगर बीजेपी भ्रष्ट है …… अगर बाबा रामदेव के पास काला धन है तो फिर क्यों सरकार काले धन के स्वामियों को मृत्युदंड देने की मांग से कतरा रही है॥ क्या काँग्रेस आरएसएस या बीजेपी या भ्रष्ट बाबा से मिली है……. जो उनको बचाने के लिए इस बिल को पास नहीं होने देना चाहती…….. क्यों लोकपाल सरकार के गले की हड्डी बना है……. जब तक आप जैसे लोग ओसामा बिन लादेन को ओसामा जी…… और एक राष्ट्रहित के विषय पर आंदोलन करने वाले को ठग कहने वालों का समर्थन करेंगे………. तब तक भारत केवल शब्दों मे ही आज़ाद रहेगा…….. धरती की कसम अंबर की कसम, ये ताना बाना बदलेगा तू खुद को बदल तू खुद को बदल, तब तो ये जमाना बदलेगा

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    June 6, 2011

    अगर आरएसएस भ्रष्ट है …… अगर बीजेपी भ्रष्ट है …… अगर बाबा रामदेव के पास काला धन है तो फिर क्यों सरकार काले धन के स्वामियों को मृत्युदंड देने की मांग से कतरा रही है॥ क्या काँग्रेस आरएसएस या बीजेपी या भ्रष्ट बाबा से मिली है.. पियूष जी बहुत वाजिब प्रश्न उठाया है आपने … स्वतंत्रता शब्दों में ही है ..अभी तक अब हमपे जिम्मेदारी है की हम इसे आगे बढ़कर व्यवहारिक बना दे.. बहुत ही अच्छी प्रतिक्रिया आपको धन्यवाद दूंगा इसके लिए …जमाना निश्चित रूप से बदलेगा

mangial parjapat के द्वारा
June 6, 2011

नमस्कार निखिल जी सत्य है की जनता का शासन यानि लोकतंत्र और लोकतंत्र में जनता के साथ ही अमानवीय व्यवहार .जनता तो व्यक्तिगत मसला नही थी .आपके विचार सही है ,हमे किसी से व्यक्तिगत बैर नही ,न वो विषय था ,फिर यह सब क्यों ? आपने अच्छा सवाल किया है .कहा है जनता के गुनहगार . धन्यवाद   mangial parjapat

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    June 6, 2011

    प्रतिक्रिया के लिए आभार

Dr S Shankar Singh के द्वारा
June 6, 2011

प्रिय निखिल जी सादर नमस्कार, एक अत्यंत ही सारगर्भित लेख. आपकी आवाज़ जन जन तक पहुंचनी चाहिए. साधुवाद

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    June 6, 2011

    सर प्रणाम .. जी मै इसी प्रयास में हु ..की हर वो आवाज जन जन तक पहुचे जिसका वास्ता इस राष्ट्र की आम जनता और उसके मुद्दों से हो ..उसे कुचलने वाली हर ताकत का मुह तोड़ जवाब दिया जायेगा ..अब जनता अपने कान आँख और सिने की आग को दबा कर नहीं रखेगी .. आशीर्वाद के लिए आभारी हु

narayani के द्वारा
June 6, 2011

नमस्कार निखिल जी सत्य है की जनता का शासन यानि लोकतंत्र और लोकतंत्र में जनता के साथ ही अमानवीय व्यवहार .जनता तो व्यक्तिगत मसला नही थी .आपके विचार सही है ,हमे किसी से व्यक्तिगत बैर नही ,न वो विषय था ,फिर यह सब क्यों ? आपने अच्छा सवाल किया है .कहा है जनता के गुनहगार . धन्यवाद नारायणी

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    June 6, 2011

    नारायणी जी आपका आभारी हु प्रतिक्रिया देने के लिए ..ये सवाल सारी जनता पूछ रही है कहा है देश के सत्ताधीश हमें इन चारणों के बीच में छोड़ कर

rajeevdubey के द्वारा
June 6, 2011

निखिल जी, यह सोनिया-मनमोहन सरकार शासन करने का नैतिक अधिकार खो चुकी है, इस सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए जन जागरण की जरूरत है अब…

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    June 6, 2011

    राजीव जी अब जनता को अपना नैतिक जिम्मेदारी समझने की जरुरत है क्यों की हमारे सत्ताधीश पूरी तरह अनैतिक हो चुके है ..

rajeevdubey के द्वारा
June 6, 2011

निखिल जी, यह सोनिया मनमोहन सरकार शासन करने का नैतिक अधिकार लहो चुकी है, इस सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए जन जागरण की जरूरत है अब…

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    June 6, 2011

    राजीव जी प्रतिक्रिया के लिए आभार

alka singh के द्वारा
June 6, 2011

निखिल जी नमस्कार राहुल बेबी नोयडा के गावों में पुलिस की ज्यादती के खिलाफ बोले थे ,बहुत अच्छा किया था .अब जब कि उनकी सरकार ने ज्यादती की है तो मुहं में निपल लगा कर बैठ गये हैं .राहुल बाबा ऐसे आप इस देश को कैसे चला पाएंगे ?अपनी छवि का कुछ तो ध्यान करो .और सोनिया अम्मा चाहें दुनिया के ताकतवर लोगों में भले ही शुमार होती हों लेकिन अपने देश के लोगों का विश्वास खो रहीं हैं .जो लोग बाबा के समर्थन में पहुंचे थे वे लोग इस देश के नागरिक भी थे इस बात को कैसे भुला दिया गया ?.अब परिणाम भुगतने को भी तैयार रहना चाहिए .

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    June 6, 2011

    अलका जी मौलिक बात ये ही है सबके सामने आप के हित रामदेव से प्रभावित हो रहे थे .. पर वह जो लोग थे जो बहु बेटिया थी वे इस देश की आम जनता थे .स्वतंत्र देश के स्वतंत्र नागरिक .. उनसे ऐसा बर्बर व्यवहार करना इतना शर्मनाक है की की हम कैसे कहे की यह एक आपातकाल जैसी स्थिति नहीं है ? सोनिया और राहुल को अगर शर्म नाम की चीज हो तो चुल्लू भर पानी में डूब जाना चाहिए …महिलाओं के साथ इतना शर्मनाक व्यवहार करने वाली पुलिस और उन्हें आदेश देने वाले सिब्बल और दिग्विजय सिंह जैसे नेताओं को लोकतांतत्रिक मूल्यों को कुचलने के आरोप में राष्ट्रद्रोह के लिए दी जाने वाली सजा देनी चाहिए .. आपकी प्रतिक्रिया के लिए आभारी हु

शिवेंद्र मोहन सिंह के द्वारा
June 6, 2011

निखिल जी मुद्दा ये है की लोगों को मारा क्यूँ? आधी रात को सोये हुए लोगों को जिस बेरहमी से मारा गया उसका प्रतिकार क्या है? क्या वो जानवर थे? या उन्होंने कोई अपराध किया था? जिन मुद्दों को ले वो सामने गए थे, क्या उनका समाधान उनको दे दिया गया था? या आपके समाधान देने बाद भी वो वहीं पे डट गए थे? क्या उनको कोई टाइम दिया गया था वहां से हटने के लिए ? इतने संवेदन हीन हो गए थे की बच्चो बुजुर्गों औरतों को घेर घेर के जानवरों की तरह मारा पीता गया, और तो और इलाज भी नही दिया गया, अब युवराज कहाँ गए? अब शायद उनका माथा गर्व से ऊंचा हो गया होगा? आज सच में दिल रो रहा है, अपने ही देश में अपने ही लोगों के हाथो ये शर्मनाक खेल खेला गया. गुलामों से भी बदतर स्थिति. और लालू, सिब्बल, दिग्विजय और पुलिस के लोग कह रहे हैं की कुछ नही हुआ किसी को कोई चोट नही आई. धिक्कार है ऐसे लोगों पे और उनकी मानसिकता पे.

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    June 6, 2011

    शिवेंद्र जी ..राजनीती और ठगी पूरी तरह से कोई नहीं समझ सकता .. पर यकीं माने टेलीविजन पर महिलाओं बच्चो के साथ ये वहशी हरकत मन को बहुत द्रवित कर गई .. लगा हम किसी सैनिक तंत्र में एक गुलाम की तरह है मै यही सोचता रहा की आखिर क्यों ऐसा किया गया क्या गलती थी उन निहत्थे मासूमो की ? चापलूसों चारणों की सरकार हमें नहीं चाहिए .. हमें लगा मानो भारत पर पाकिस्तानी फ़ौज ने हमला कर दिया .. ऐसा ही व्यवहार था… हम सबकी व्यथा एक ही है शिवेंद्र जी हम व्यथित है क्रोधित है .. और अडिग है .. आपकी अनमोल प्रतिक्रिया के लिए आभारी हु

nishamittal के द्वारा
June 5, 2011

बिलकुल सही कहा निखिल जी आपने बात मुद्दे की है,और वो भी राष्ट्र हित में चाहे कोई भी प्रयास करे हर देशभक्त को समर्थन करना चाहिए,परन्तु हमारी सरकार आँख मूंदे,कान बंद किये तथा मुख से अनर्गल प्रलाप करते हुए अपने राग में खोयी है.

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    June 6, 2011

    आदरणीय निशा जी , अब आँखे भी खुलेंगी और कानो को भी सुनाई देगा और अन्ना हजारे . रामदेव का ये आन्दोलन और पुरे देश में हो रही प्रतिक्रिया यु ही ख़त्म नहीं होगी और न ही जनता इसे यु ही भुला देगी . चारणों की चापलूसी और उन्हें पालने वाले लोग जनता के आक्रोश से नहीं बचेंगे ..


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