सर झुकाकर आसमा को देखिये ...........

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सज्जन शक्तियों से आह्वान-'के.एन.गोविन्दाचार्य'

Posted On: 8 May, 2011 Others में

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प्रख्यात चिन्तक और और विचारक श्री के.एन.गोविन्दाचार्य जी के नाम से सभी जागरूक राष्ट्र भक्त परीचित होंगे .आधुनिक राजनीती की तड़क भड़क भरी दुनिया में उनका जीवन एक मनीषी की छवि प्रस्तुत करता है .. गोविन्द जी ने भ्रष्टाचार , विदेशी धन ,बड़ी करेंसी की समाप्ति, नकारात्मक वोटिंग ,इत्यादि मुद्दों पर कई वर्ष पूर्व कार्य करना प्रारंभ कर दिया था .विदेशी धन के मुद्दे पर वे जन जागरण अभियान के तहत लखनऊ से 24  घंटे के उपवास द्वारा प्रारंभ करने जा रहे है .जनहित से जुड़े इस मुद्दे के साथ जुड़े ,प्रचार द्वारा , स्वयं सम्मिलित होकर व यथा संभव तरीके से इस अभियान में सहभागी बने..
गोविन्द जी से बौधिक ,रचनात्मक ,अन्दोलानात्मक स्तर पर अपनी भूमिका या ऐसे किसी भी मुद्दे पर आप चर्चा कर सकते है उनका संपर्क न. 09810209020 है उनकी वेबसाईट http://www.kngovindacharya.in है  .

के. एन. गोविन्दाचार्य

के. एन. गोविन्दाचार्य

राष्ट्रवादी मोर्चा के आह्वान पर विदेशो में जमा काला धन वापस लाने के मुद्दे पर प्रख्यात विचारक ,चिन्तक श्री के.एन.गोविन्दाचार्य जी द्वारा लखनऊ में 24 घंटे के उपवास के नैतिक समर्थन में आयोजित धरना कार्यक्रम

स्थान- लखनऊ – हनुमान सेतु,झुलेलाल पार्क,

वाराणसी — जिला मुख्यालय ,

गोरखपुरचेतना तिराहा , गोलघर,

हाजीपुर — कचहरी के पास
समस्तीपुर — कर्पूरी ठाकुर की प्रतिमा के पास ,

समय- 10  मई प्रातः 10  बजे से 11  मई प्रातः 10  बजे तक ,
( राष्ट्रहित में आपकी उपस्थिति आवश्यक है )

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“”देश का प्रत्येक व्यक्ति चाहता है की देश का भविष्य अच्छा हो । फिर भी हम आगे बढ़ने की जगह समस्याओ से घिरते चले जा रहे है । आखिर क्यों? यद्यपि देश बदलाव की और गति कर रहा है किन्तु राष्ट्रवादी भावना की कमी और बहुयामी भ्रष्टाचार के कारन हमारे कदमो को मजबूती नहीं मिल पा रही है । हमारी राष्ट्रवादी सोच हर समय नीचे रहती है। अनियंत्रित भ्रष्टाचार से प्रभावित हमारी कमजोर नीतिया क्रियान्वयन के लिए कमजोर शाशन व्यवस्था पर निर्भर है परिणामस्वरूप हमारा विकास जनजात अपंग हो जाता है और लोकतंत्र निस्तेज। प्रायोजित और निजी संस्थान बन चुके राजनितिक दल वंशवाद की बेल को बढ़ाने में लगे है तो दूसरी तरह नेता ,उद्योगपति,नौकरशाह और माफिया व्यवस्था पर हावी है।

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भयभीत कर देने वाली गरीबी ने राजनीतिक प्रयोगों को असफल करार दिया है । ग्रामीण क्षेत्रो में 8 -9 % प्रतिदिन है । 20 % लोगो का शेष 80 % लोगो के रोजगार पर नियंत्रण है । कुल आय का 96.4 % इन 20 % लोगो के खजाने में जाता है और शेष 80 % लोगो की झोली में 3.6 % हिस्सा आता है। देश में 26 करोण लोगो को रोजाना भूखे पेट सोना पड़ता है। सबसे आमिर व्यक्ति और सामाजिक संरचना में सबसे नीचे खड़े व्यक्ति की आय में एक करोण गुने का फर्क है। स्पष्ट है की शोषण चरम पर है आंकड़ो की बाजीगरी दिखाकर खुद को गरीबपरस्त दिखाती सत्ता फ़ोर्ब्स सूची में अरबपति भारतीयों के नामो पर इतराती है पर आत्महत्या को मजबूर करती गरीबी के प्रति असंवेदनशील रहती है। शर्मनाक पहलु ये है की एक तरफ गरीबी उन्मूलन के आंकड़ो की बाजीगरी देश के सामने रखती है और दूसरी तरफ भयंकर गरीबी का रोना लेकर विश्व बैंक और अमीर राष्ट्रों की चौखट पर भीख का कटोरा लेकर बैठने में तनिक संकोच नहीं करती ।

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ऐसा तब है जब देश में अरबपतियो की संख्या लगातार बढ़ रही है और विदेशो में जमा काले धन के मामलो में भारत पहले स्थान पर है। वोट से नोट और नोट से वोट बनाने वाला तबका आजादी के बाद ही सक्रिय हो गया था , पर तब सामाजिक प्रताड़ना के भय से ये गतिविधिया चोरी छिपे चलती थी । समय के साथ ये तबका इतना मजबूत हो गया की खुले आम गतिविधिया चलाने लगा। गद्दार नेता ,भ्रष्ट नौकरशाह , और माफिया ने आम जनता की गाढ़ी कमाई का धन लूट कर विदेशी बैंको में जमा कर रखा है । यह धन इतना है की इसे यदि किसी तरह वापस लाया जाये तो पूरा विदेशी कर्ज एक झटके में चुकाया जा सकता है और उसके बाद भी इतना धन बचेगा जिसके ब्याज से ही पुरे केंद्रीय बजट के लिए धन जुटाया जा सकता है । देश की पूरी राजनीतिक व्यवस्था काले धन पर ही टिकी है। तमाम खुलासो और न्यायपालिका के बार-बार कहने पर भी सरकार राष्ट्रीय संपत्ति के लुटेरो के नाम नहीं बता रही है इसका कारण हम सभी समझ सकते है । आम जनता की खून पसीने की कमाई वापस लाने के लिए कोई राजनीतिक दल ,या व्यवस्था का कोई अंग प्रयास करेगा यह सोचना भी मूर्खतापूर्ण है । यह कार्य केवल देश की वह सज्जन शक्ति करेगी जिसकी जड़े भारत के आम आदमी के बीच फैली है । समस्या ये है की सज्जन शक्ति इधर उधर बिखरी है इस कारण उसके बौधिक रचनात्मक और अन्दोलानात्मक कार्यो का सकारात्मक प्रभाव नहीं दिख रहा है। ऐसे में महत्वपूर्ण कार्य तमाम सज्जन शक्तियों के बीच संवाद ,सहमती और सहकार की प्रक्रिया द्वारा एक सूत्र में बंधकर समग्र दृष्टिकोण का निर्माण करना है ताकि बहुयामी भ्रष्टाचार के विरुद्ध एक शक्तिशाली और अजेय प्रतिरोध खड़ा किया जा सके। मै राष्ट्र की तमाम सज्जन शक्तियों का आह्वान करता हु। आपका समय मूल्यवान है , इसे राष्ट्र हित में लगाये। “

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के. एन. गोविन्दाचार्य मो. न.- 09810209020

संपर्क सूत्र -

दीपक बंका -09415339022 , निखिल पाण्डेय -9648590143  विजय श्रीवास्तव -9307407277
संजय शुक्ल -09455658425 ,विनोद यादव — 09835816672

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4 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

abodhbaalak के द्वारा
May 9, 2011

Nikhil ji kafi din ke baad aapki koi post. aapke lekh, ek alag rang ke hote hain, gyanvardkhak aur saraahneey lekh http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

RaJ के द्वारा
May 9, 2011

गोविन्दाचार्य एक गंभीर चिन्तक है और इसलिए ही उनकी मूल राजनितिक पार्टी के कम के भी नहीं रहे | पर निश्चत ही वे प्रखर सोच रखते हैं

Deepak Sahu के द्वारा
May 9, 2011

nikhil ji! aaj ke samay me gareeb aur bhi gareeb hota ja raha hai, aur ameer aur bhi ameer hota ja raha hai! yahi hai hamara bharat! yahi hai hamara viksit desh! deepak sahu

manoranjanthakur के द्वारा
May 8, 2011

बहुत दिनों बाद आपका पोस्ट पढने को मिला, बहुत सुंदर रचना पर बधाई स्वीकारे


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