सर झुकाकर आसमा को देखिये ...........

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''कौन है उस और ?-Valentine Contest''

Posted On: 12 Feb, 2011 Others में

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मित्रो आप सभी जानते है की पत्नी अपने मायके गई है… पर यकीं मानिए पता ही नहीं चलता .. पहले दिन से उस ख़ुशी का एहसास करने की कोशिश कर रहा हु जो हर व्यक्ति अपनी पत्नी के मायके जाने पर करता होगा.. पर ये मुआ फोन है की महसूस ही नहीं होने देता.. सुबह से रात तक फोन ,………खाना खाया या नहीं.. चाय पी या नहीं ,नहाये या नहीं… वैलेंटाइन कांटेस्ट में कुछ लिखा या नहीं.

मतलब लगता ही नहीं है की वो दूर है और मै आजाद ..कल मैंने सेल फोन का स्विच अफ कर दिया ..और सोचने लगा की ये न होता तो क्या होता.. फिर सोचा अगर सेल फोन न होता ,, तो आज की हर साल सच्चा प्यार करने वाली पीढ़ी ..साल से हफ्ते में उतर जाती.. और इमोशनल अत्याचार टाईप के कार्यक्रमों की बाढ़ आ जाती..

यदि आज के प्रेम पर विचार किया जाये… और आज की पीढ़ी से कह दिया जाये..की प्रेम में सबसे उपयोगी वस्तु क्या है.. तो मुझे विश्वाश है की 99 % आधुनिक प्रेमी कहेंगे.. फोन ,, और लगता है की वे सही भी है… एक गजल सबने सुनी होगी…….……..

आँख से दूर न हो दिल से उतर जायेगा…

वक्त का क्या है गुजरता है गुजर जायेगा………………….

इस लिए फोन आज प्रेम की सबसे महत्वपूर्ण और मजबूत आधारशिला है..क्योकि आँख से दूर होने पर यही प्रेम को स्थिर रखने का मंगल कार्य करता है और यही सोच कर मैंने फोन का स्विच पुनः आन कर दिया,

———————————————————————————————

ये पंक्तिया एक पी सी ओ में रची गई .. सीन ये था की मै वहा बैठा था.. तभी एक युवक आया और उसने फोन किया .. दूसरी तरफ से कोई आवाज आई .. माँ.. रांग नंबर है.. और इधर से युवक ने कहा तुम बस फोन पकडे रहो कुछ मत बोलो.. मै उसके हावभाव को बहुत ध्यान से देख रहा था.. ,, बस वही से कुछ पंक्तिया आई .. मैंने सोचा की अगर मै वहा होता तो क्या सोचता… ..

boy girl telephone

***********************************************************************************************

मेरे फोन उठाने पर ,

जब तुम खामोश रहकर.

मेरी आवाज सुनने का प्रयास करते हो ….

तुम्हे लगता है ,

मै पहचान नहीं पाता की,

कौन है उस और…………………..

————————————————————————-

पर मै ,

महसूस करता हु ,

साफ़ सुनता हु रिसीवर पर ,

तुम्हारी उंगलियों का कम्पन ….

उनकी सरसराहट..उनकी गति

उनका आयाम , उनकी निः शब्दता,

इसका अर्थ समझता हु……..

————————————————————————–

मै,

महसूस करता हु ,

ठहर -ठहर कर उठती -

गिरती तुम्हारी साँसे,

उनकी गति, उनका आयाम,

उनकी निः शब्दता …

इसका अर्थ समझता हु ..

————————————————————

मै……..

महसूस करता हु ,

तुम्हारा सिहर जाना,

अपने शरीर के रोम रोम पर..

मापने का प्रयास करता हु …

तुम्हारी धड़कने ,उनकी गति,

उनका आयाम,उनकी निः शब्दता …….

इसका अर्थ समझता हु.

—————————————————————–

मै…

शांत रहता हु ,

स्थिर रहता हु , मौन रहता हु ,,

तुम्हारी हर सांस को महसूस करने के लिए ,

और तुम समझते हो…मै पहचान नहीं पाता……..

की, कौन है उस और……………………………………..

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36 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

sanjay kumar के द्वारा
February 15, 2011

Nikhil ji gadya ke sath sath padya main bhi aapki pakar bahut behtrin hain ….bahut shubhkamnaye

    nikhil के द्वारा
    February 15, 2011

    धन्यवाद संजय जी

Aakash Tiwaari के द्वारा
February 14, 2011

वाह भाई क्या बात है…. लगे रहिये…और हाँ भाभी जी को जल्दी बुला लाइए …और हमें चाय नाश्ते पर बुलाइए…. आकाश तिवारी

    nikhil के द्वारा
    February 15, 2011

    आकाश जी आपका चाय पर स्वागत है.. वो अब आ चुकी है

Bhagwan Babu के द्वारा
February 14, 2011

बहुत खूब लिखा है जी आपने निखिल भाई बहुत बहुत शुभकामनाएँ http://bhagwanbabu.jagranjunction.com/2011/02/13/%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%ae-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a5%88-%e2%80%93-valentine-contest/#comment-1205

    nikhil के द्वारा
    February 15, 2011

    धन्यवाद  

February 13, 2011

मै… शांत रहता हु , स्थिर रहता हु , मौन रहता हु ,, तुम्हारी हर सांस को महसूस करने के लिए , और तुम समझते हो…मै पहचान नहीं पाता…….. की, कौन है उस और…………………………………… क्या बात है निखिल भाई, शानदार…..बोले तो …..एकदम झकास…..

    nikhil के द्वारा
    February 15, 2011

    सर जी बहुत बहुत धन्यवाद इस सराहना के लिए

Deepak Sahu के द्वारा
February 13, 2011

निखिल जी!  इमोशन पर अच्छी पंक्तियाँ लिखी हैं!  अगर ये सारे मोबाइल ऑपरेटर बंद हो जाएँ,  खुदा कसम सारे 99% प्रेमी अकेले रह जाए!!

    nikhil के द्वारा
    February 15, 2011

    दीपक जी धन्यवाद प्रतिक्रिया के लिए

versha के द्वारा
February 13, 2011

very nice

    nikhil के द्वारा
    February 15, 2011

    धन्यवाद वर्षा ..

priyasingh के द्वारा
February 13, 2011

इन दिनों प्रेम के बारे में बहुत कुछ पढ़ रही हूँ पर उनमे से कुछ रचनाये ही है जो मन को छुती है… आपकी रचना उनमे से एक है ……… हिमांशुजी ने सही कहा इस कविता को पढ़कर सगाई के दिनों की याद आ गयी ………इतनी अछि रचना प्रस्तुत करने के लिए बधाई…..

    nikhil के द्वारा
    February 15, 2011

    प्रिया जी .. इस अनमोल प्रतिक्रिया द्वारा रचना की सराहना के लिए आभार

HIMANSHU BHATT के द्वारा
February 13, 2011

भाई साहब आपने तो कमाल ही कर दिया…. मुझे अपनी सगाई से शादी तक के समय की याद ताज़ा हो गयी… जब मई १० १० घंटे फ़ोन पर बात किया करता था…. धन्यवाद. http://www.himanshudsp.jagranjunction.com

    nikhil के द्वारा
    February 15, 2011

    हिमांशु जी रचना आपको पसंद आई .. इसके लिए धन्यवाद

rajkamal के द्वारा
February 12, 2011

प्रिय निखिल जी …नमस्कार ! बागवान फिल्म की याद दिलाती हुई आपकी यह सुंदर कविता जिसमे की नायिका नायक का झूठ फोन पर ही पकड़ लेती है ….

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    February 13, 2011

    भ्राता श्री-सही कहा आपने मुझे भी ऐसा ही लगा| भाई निखिल जी आपकी ये रचना भी बहुत अच्छी है|

    nikhil के द्वारा
    February 15, 2011

    राजकमल जी आपकी प्रतिक्रिया पाकर रचना धन्य हुई आभार

    nikhil के द्वारा
    February 15, 2011

    वाहिद जी धन्यवाद

rameshbajpai के द्वारा
February 12, 2011

अपने शरीर के रोम रोम पर.. मापने का प्रयास करता हु … तुम्हारी धड़कने ,उनकी गति, उनका आयाम,उनकी निः शब्दता ……. इसका अर्थ समझता हु. —————————————— निखिल जी बहुत बहुत बधाई

    nikhil के द्वारा
    February 15, 2011

    सराहना के लिए आभारी हु सर

RaJ के द्वारा
February 12, 2011

एक खुबसूरत सा एहसास है कविता में शारीर की शाख शाख जब कांप रही हो जिस्मों की ताप जब अग्न लगा रही हो क्यों फिर अपने को आदर्शों मैं अपने को छुपा लेते हो कहकर प्रेम कवल अलोकिक अध्यात्मिक आत्मिक होता है

    nikhil के द्वारा
    February 15, 2011

    राज जी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद

baijnathpandey के द्वारा
February 12, 2011

आदरणीय निखिल जी ,,,,,,,,पत्नी से इतना प्रेम भी करते है और उसके जाने पर झूठी खुशी का इजहार भी लेख के आरम्भ में मैंने सोंचा था कि आपसे कहूँ कि चाँद लाइने उनपर भी लिख दे …सभी प्रेम रस में सराबोर है किन्तु आपने सारी शिकायतें दूर कर दी | महसूस करने लायक पोस्ट | बधाई |

    nikhil के द्वारा
    February 15, 2011

    पाण्डेय जी आपकी शिकायत दूर हो गई ये रचना सफल हो गई स्नेह बनाये रखे.. आभार

alkargupta1 के द्वारा
February 12, 2011

निखिल जी , बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति ! शुभकामनाएं !

    nikhil के द्वारा
    February 15, 2011

    अलका जी धन्यवाद

Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
February 12, 2011

मै, महसूस करता हु , ठहर -ठहर कर उठती – गिरती तुम्हारी साँसे, उनकी गति, उनका आयाम, उनकी निः शब्दता … इसका अर्थ समझता हु .. ———————————————— सुंदर रचना….. बधाई…..

    nikhil के द्वारा
    February 15, 2011

    पियूष जी धन्यवाद..

vinitashukla के द्वारा
February 12, 2011

अभिव्यक्ति की अच्छी कोशिश. शुभकामनाएं.

    nikhil के द्वारा
    February 15, 2011

    धन्यवाद

आर.एन. शाही के द्वारा
February 12, 2011

गद्य में व्यंग्यात्मक पुट, और कविता में अत्यंत सूक्ष्म संवेदनशील भाव, वाह निखिल जी, क्या खिचड़ी पकाई है । बधाइयां ।

    nikhil के द्वारा
    February 15, 2011

    आदरणीय शाही जी अभिवादन…. इस आशीष के लिए आभारी हु..

rita singh \\\'sarjana\\\' के द्वारा
February 12, 2011

निखिल जी , बहुत खूब ! सुन्दर कविता प्रेम को दर्शाता हुवा l बधाई

    nikhil के द्वारा
    February 15, 2011

    रीता जी धन्यवाद


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