सर झुकाकर आसमा को देखिये ...........

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''मुगल-ए-आजम का वैलेंटाइन डे-Valentine Contest''

Posted On: 11 Feb, 2011 Others में

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सीन 1

————————————————-

अकबर -”शहजादे इतना सबेरे- सबेरे सेंट मार के कहा का तैयारी है ?

सलीम-” अब्बा हुजुर आज वैलेंटाइन डे है और हम अनारकली से मिलने जा रहे है “.

अकबर-” खामोश गुस्ताख ,, अबे लाल चौक से लेकर दलाल चौक तक पूरा मुल्क परेशान है, हमारे मनसबदारो ने इतना खा लिया है की हमारा पेट ख़राब हो गया है और तुम बेटा अनारकली-अनारकली लगाये हुए हो… अनारकली न हुई कोई मुन्नी या शीला हो गई….

सलीम- ” अब्बा आ आ .. हुजुर सलीम की मुहब्बत किसी डाइरेक्टर की फिल्म की आइटम नहीं है उसे मुन्नी या शीला न कहे.. वो सल्तनत-ए- मुगलिया की होने वाली मल्लिका है माईंड योर लैंग्वेज.

अकबर -” अबे चुप्प बेहुद्दा .. बिना दिमाग का आदमी .. लप्पड़ मरूँगा खीच के अगर अनारकली का नाम दुबारा लिया तो

सलीम-” जहापनाह सलीम की मुहब्बत किसी जहापनाह की रहमदिली की मोहताज नहीं.. हम जा रहे है ये गुलाब का फूल और ढेर सारी चाकलेट लेके.. अनारकली को बस मेरा प्यार चाहिए आपका हिंदुस्तान नहीं.. खुदा हाफिज “”

सीन 2

—————————————————

अकबर मुंह लटकाए खड़े है ..बीरबल का प्रवेश , घुसते ही बोले—-”"जहापनाह का हो गया एतना टेंशन में काहे है..?”

अकबर–अरे यार वही सलीम अनारकली का लफड़ा .. है साला दिमागे काम नहीं कर रहा है कि कैसे इज्जत बचाए..? यार कुछ तुम ही बताओ न.. कब तक मुफ्त की पगार लोगे..?

बीरबलजिल्ले इलाही बस ये बात है .. हुजुर अनारकली का इमोशनल अत्याचार पे लायल्टी टेस्ट करवा दीजिये न आजकल कौनो प्रेम -व्रेम स्थाई नहीं होता .. आज के जुग में लैला मजनू भी होते न तो वो भी इधर उधर सेटिंग करते रहते रहे…

अकबर -”नहीं यार अगर वो लायल निकल गई तब..?”

बीरबलअरे हुजुर घबराइए नहीं कुछ ले दे के सेट्टिंग कर लेंगे .. राखी का इन्साफ में नहीं देखे थे का.. सब काम पैसा से हो जाता है जिससे चाहे जो करवा लो…”

सीन 3

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बातचीत जारी है तभी मान सिंह दौड़ते हुए आते है .….

“” हुजुर गजब हो गया शहजादे को .. शहजादे को….“‘

“का हुआ यार भाग गए दोनों का ?“”– अकबर ने पूछा,

मान सिंह – ‘” नहीं हुजुर टीवी पे इमोशनल अत्याचार पे अनारकली आ सलीम का देखा रहा है .. सलीम को खूब धो रही है अनारकली .. आ बीच बीच में आपको कुछ गरिया भी रही है लेकिन तब्बे बीप का आवाज आ रहा है .”"


‘अबे जल्दी टीवी खोलो कौनो .. यार हमारा बेटा नाम इज्जत सब डूबा रहा है.ससुरा गाली सुनवा रहा है…. अब्बे चैनल वाले माइक्रोफोन लेके प्रतिक्रिया जानने पहुच जायेंगे.. आग लगे इस वैलेंटाइन डे को .. लईका टीवी पे चप्पल खा रहा है… जरुर साइड में कौनो और को सेट किया होगा…अबे बीरबल.. ये बताओ ये लायल्टी टेस्ट वाला आइडिया पाहिले हमसे पाहिले अनारकली को दे आये हो का.“”..—– अकबर एक साँस में बोलते गए..

बीरबल .. “‘ हुजुर उ तो ख़त्म हो गया होगा .. अब रात को 11 बजे फेर से देखायेगा.. तब देखिएगा..ही ही ही “‘

अकबर _ “”हम जान रहे थे बेटा तुम रात रात भर यही सब देखते रहते हो.. तब्बे तो इतना आइडिया देते रहते हो..आ दरबार में सब कहते है व्हाट एन सर जी “”

सीन 4 ———————————————————————-——————————————-

(रात के 11 बजे टीवी खुलती है , सामने अत्याचार के सेट पे अनारकली और एंकर ….)

अकबर-“‘ अमा यार बीरबल का घुस जाओगे का टिबिया में पीछे हटो ,चिल्ल्वाओ मत यार पेट ख़राब है “”

एंकर -” आज अत्याचार के सेट पे हमारे सस्पेक्ट है सलीम ,, हमारी अन्डर कवर एजेंट है मुन्नी और ये लायल्टी टेस्ट करवाया है अनारकली ने…..तो बताइए अनारकली जी आपने ये टेस्ट क्यों करवाना जरुरी समझा

अनारकली — “”प्लीज काल मी अन्नू ओके …. अक्चुली हुआ ये की मैंने सलीम से कहा की अगर तुम्हारा बाप शादी नहीं होने देता है तो कोई बात नहीं हम लिव इन रिलेशन में रहले.. या फिर बुड्ढ़े को दीवार में चुनवा दो..या तो अपना हिस्सा मांग लो ..पर उसने कुछ भी नहीं किया .. तब मुझे लगा की वो लायल नहीं है शायद ..”"

एंकर–” ओके .. तो अन्नू आइये देखते है सलीम का टेस्ट

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Maan Gaye Mughal-e-Azam

पहला दिन

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सलीम हमारी अन्डर कवर एजेंट से मिले और पहले ही दिन उसकी पुच्ची ले ली

अनारकली– “”तो इसमें सलीम की क्या गलती है अब बिना कवर के अन्डर कवर एजेंट रहेगी तो कोई क्या करेगा .. उसे कुछ ढंग का पहना देते यार …चिल मारो ये सब आजकल आम है ,,. चलो आगे दिखाओ..

दूसरा दिन

——————————————

“‘ सलीम ने हमारी एजेंट को अपने बाग़ में बुलाया और उससे इधर उधर की बाते की फिर घर जाने को बोल दिया “‘

तीसरा दिन

—————————————–

सलीम ने हमारी एजेंट का मोबाइल नंबर लिया … ”

अनारकली – “”क्या पका रहे हो यार कोई सीन वीन नहीं है क्या .. जैसा तुम लोग झिलमिलाहट के अंदर दिखाते हो…वो तो कुछ कर ही नहीं रहा है .. अगर कुछ करेगा नहीं तो उसको मारूंगी कैसे कही ये गे तो नहीं बन गया .. मुझे भी नहीं छूता है कहता है शादी के बाद …

एंकर--”"ठीक है अन्नू जी आइये हम सीधे उनके पास चलते है …”

(दोनों वहा पहुचते है ,साथ में कैमरे वाले..वहा का सीन ये है की एजेंट सबर्दास्ती सलीम को जकड़े हुए है . और सलीम छूटने की कोशिश कर रहा है … )

एंकर-- “”सलीम ये इमोशनल अत्याचार है और आप अन्नू द्वारा करवाए लायल्टी टेस्ट में सफल रहे है ..मुबारक हो…..पूरा देश आज आपको देख रहा है …आप अनारकली से कुछ कहना चाहेंगे..?”‘

सलीम–”" अनारकली.. हम तुम्हे बेपनाह मुहब्बत करते है ,, पर यार अब्बा को दीवार में नहीं चुनवा सकते.. उनकी एक डांट सुनके तो पजामा गीला हो जाता है.. और लिविंग रिलेशन अपना कल्चर नहीं है जानू….

(इतना सुनते ही अनारकली सलीम पे टूट पड़ती है .. गालियों और चप्पलो की बौछार… शुरू…)…. अकबर चैन की सांस लेते है … और बोल उठते है हैप्पी वैलेंटाइन डे…… बैक ग्राउंड में गाना बज उठता है …….

“”तौबा तेरा जलवा तौबा तेरा प्यार तेरा इमोशनल अत्याचार “”

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43 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

div81 के द्वारा
February 12, 2011

निखिल जी, हास्य के जरिये व्यंग का अच्छा तड़का लगाया है| आप का लेख पढ़ते हुए एक पल भी चेहरे से हसी गायब नहीं हुई |बधाई

    nikhil के द्वारा
    February 15, 2011

    दिव्या जी धन्यवाद सराहना के लिए

Deepak Sahu के द्वारा
February 12, 2011

बहुत सही निखिल जी! मन हर्षित हो गया! बधाई!

    nikhil के द्वारा
    February 15, 2011

    दीपक जी व्यंग्य पसंद आया इसके लिए आभारी हु

alkargupta1 के द्वारा
February 12, 2011

निखिल जी , बहुत ही बढ़िया व्यंग्यात्मक हास्य विनोद से भरपूर रचना !

    nikhil के द्वारा
    February 15, 2011

    अलका जी सराहना के लिए धन्यवाद

Ramesh bajpai के द्वारा
February 12, 2011

”प्लीज काल मी अन्नू ओके …. अक्चुली हुआ ये की मैंने सलीम से कहा की अगर तुम्हारा बाप शादी नहीं होने देता है तो कोई बात नहीं हम लिव इन रिलेशन में रहले.. या फिर बुड्ढ़े को दीवार में चुनवा दो..या तो अपना हिस्सा मांग लो ..पर उसने कुछ भी नहीं किया .. तब मुझे लगा की वो लायल नहीं है शायद ..”” एंकर–” ओके .. तो अन्नू आइये देखते है सलीम का टेस्ट” प्रिय निखिल जी बेहतरीन अंदाज में इस पोस्ट को पढ़ कर बहुत मजा आया | बधाई

    nikhil के द्वारा
    February 15, 2011

    आदरणीय बाजपेयी जी .. आपको व्यंग्य पसंद आया .. इस प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद

roshni के द्वारा
February 11, 2011

निखिल जी अनारकली और सलीम का loyalty टेस्ट बहुत बढ़िया काफी मजा आया बढ़िया व्यंग

    nikhil के द्वारा
    February 15, 2011

    रौशनी जी सराहना के लिए आभार

HIMANSHU BHATT के द्वारा
February 11, 2011

बहुत सुंदर पाण्डेय जी….. आपका जवाब नहीं…… धन्यवाद…………………………………………………

    nikhil के द्वारा
    February 15, 2011

    धन्यवाद हिमांशु जी

rajkamal के द्वारा
February 11, 2011

व्हाट एन ‘आइडिया’ सर जी “ जबरदस्त वयंग्य , नयी बोतल में पुराणी शराब की तरह .. क्या -२ तारीफ करू

    nikhil के द्वारा
    February 15, 2011

    राजकमल जी धन्यवाद

Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
February 11, 2011

खूबसूरत व्यंग……….”तौबा तेरा जलवा तौबा तेरा प्यार तेरा व्यंगात्मक अत्याचार “

    nikhil के द्वारा
    February 15, 2011

    धन्यवाद

chaatak के द्वारा
February 11, 2011

स्नेही श्री पाण्डेय जी, इस पोस्ट को पढ़ते पढ़ते तो पेट में बल पड़ गए| वेलेंटाइन डे पर इससे बेहतर हास्य शायद ही पढने को मिले| “सलीम को खूब धो रही है अनारकली .. आ बीच बीच में आपको कुछ गरिया भी रही है लेकिन तब्बे बीप का आवाज आ रहा है .” मान गए भाई आपके सेन्स आफ ह्यूमर को! बधाई!

    nikhil के द्वारा
    February 15, 2011

    चातक जी धन्यवाद सराहना के लिए

R K KHURANA के द्वारा
February 11, 2011

प्रिय निखिल जी, बहुत सुंदर ढंग से आपने अकबर बीरबल के किस्से को अज के स्वरुप में ढल कर हास्य का रूप दिया है ! बहुत बहुत सुंदर आर के खुराना

    nikhil के द्वारा
    February 15, 2011

    सर प्रणाम …………. इस उत्साहवर्धन के लिए आभार

आर.एन. शाही के द्वारा
February 11, 2011

बहुत शानदार प्रस्तुति निखिल जी । इससे पहले भी इसीसे मिलता-जुलता आपका व्यंग्य आया था, परन्तु यह व्यंग्य उम्दा और परिष्कृत है । लगे रहिये, बिल्कुल ठीक दिशा में बढ़ रहे हैं । बधाई ।

    nikhil के द्वारा
    February 15, 2011

    आदरणीय शाही जी अनमोल प्रतिक्रिया के लिय धन्यवाद

वाहिद काशीवासी के द्वारा
February 11, 2011

आपका ये अत्याचार तो बड़ा रास आया| मुबारक हो|

    nikhil के द्वारा
    February 15, 2011

    धन्यवाद वाहिद भाई

allrounder के द्वारा
February 11, 2011

निखिल भाई नमस्कार, भैया पहली बार देखा आपका ये रूप, सच कहता हूँ ब्लॉग लिखने से इनकम होने लगे तो आपके इस लेख पर फिल्म बना डालूं ! एक मजेदार प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई !

    nikhil के द्वारा
    February 15, 2011

    सचिन जी आपकी प्रतिक्रिया पाकर लेख सार्थक हो गया .. आपने ही व्यंग्य लिखने का सुझाव दिया था शायद आपको याद होगा..

February 11, 2011

भैया निखिल जी, तब्बे हमका चना के झाड़ पर चढ़ा रहे थे…..वाह-वाह भैया तबीयत हरी हो गई पढ़ के, बहुते हंसाया है….मैं तो बस इतना ही कहूँगा कि…..तौबा तेरा जलवा तौबा तेरा प्यार, तेरा इमोशनल अत्याचार………..

    nikhil के द्वारा
    February 15, 2011

    धन्यवाद् सर .. इस उत्साहवर्धन के लिए

baijnathpandey के द्वारा
February 11, 2011

आदरणीय निखिल जी …..सादर नमस्कार ……जनाब आपने कुछ भी नहीं छोड़ा ……..सारी सच्चाई इतनी साफगोई से बयां कर गए की खबर तक न लगी …..एक असरदार व्यंगपूर्ण आलेख ….बधाई

    nikhil के द्वारा
    February 15, 2011

    पाण्डेय जी धन्यवाद .. प्रतिक्रिया देने के लिए

deepak pandey के द्वारा
February 11, 2011

निखिल जी , शुरू से अंत तक हंसा हँसा के लोट पोट कर दिया इस लेख ने . उत्कृष्ट रचना.

    nikhil के द्वारा
    February 15, 2011

    धन्यवाद दीपक जी

Nikhil के द्वारा
February 11, 2011

बहुत खूब. बेहतरीन रचना. बधाई!

    nikhil के द्वारा
    February 15, 2011

    आभार..

Dharmesh Tiwari के द्वारा
February 11, 2011

निखिल जी नमस्कार,क्या जबरदस्त पेशगी किया है भाई साहब,,,,,,,,,,आज प्यार के एक रूप को कहीं हद तक दर्शाया है आपने,धन्यवाद!

    nikhil के द्वारा
    February 15, 2011

    धर्मेश जी व्यंग्य आपको पसंद आया .. ..इसके लिए धन्यवाद.

Aakash Tiwaari के द्वारा
February 11, 2011

श्री निखिल जी, बहुत ही खूबसूरत प्रस्तुती ..बहुत ही मेहनत की गयी है इसपर….बहुत ही मजेदार…..बधाई कबूल करें… आकाश तिवारी

    nikhil के द्वारा
    February 15, 2011

    आकाश जी धन्यवाद

vinita shukla के द्वारा
February 11, 2011

चुटीली भाषा में लिखा गया प्रभावशाली लेख. वर्तमान अधकचरी सोच पर करारा प्रहार. अच्छी पोस्ट के लिए बधाई.

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    February 12, 2011

    धन्यवाद विनीता जी इस सराहना के लिए

    kmmishra के द्वारा
    February 13, 2011

    निखिल बाबू ई कहां से सोच सोच कर मसाला तैयार करते हो । अकबर बादशाह की बोली में जो रसवा है उतना रस तो इमरती देवी में भी नहीं मिलता है । पढ़ते बखत इत्ता ढेर सारा मुस्किया गये कि मेहरारू शक करने लगी । कहती है लॉयलटी टेस्ट करवायेगी वो भी । कहां फंसवा देते हो भाई । लेख तो गजबै है । आभार ।

    nikhil के द्वारा
    February 15, 2011

    भ्राता श्री प्रणाम स्वीकार करे…. कहा थे आप .. आपके अनमोल आशीष को सुनकर मन प्रफुल्लित हो गया .. धन्यवाद .. आपका लायल्टी टेस्ट नहीं होगा.. निश्चिन्त रहे


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