सर झुकाकर आसमा को देखिये ...........

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'' प्यार का है असर उम्र भर के लिए-Valentine Contest ''

Posted On: 8 Feb, 2011 Others में

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बहुत प्रयास किया मैंने की गद्य में कुछ सार्थक व्याख्या प्रेम की कर सकू .. लेकिन बौधिक क्षमता और विषय के टेक्नीकल रूप पर थोडा हाथ तंग होने की वजह से नहीं कर पाया … सभी लेखक बहुत ही खुबसूरत अंदाज में तरह तरह के उदाह्रानो के साथ प्रेम उसके स्वरुप को व्याख्यायित कर रहे है .. ये देख कर बहुत सुखद एहसास हो रहा है … इतनी खुबसूरत रचनाये एक साथ हम सभी को जागरण मंच के माध्यम से पढने और लिखने को मिल रही है…..

मुझे लगता है हम प्रेम की परिभाषा नहीं कर सकते ,,ठीक वैसे ही जैसे इश्वर की परिभाषा नहीं दे सकते .. ..एक बच्चे की मुस्कराहट को व्याख्यायित नहीं कर सकते … प्रेम तो बस प्रेम ही है .. कोई भी व्यक्ति निश्चित समय नहीं बता सकता की उसे कब प्रेम हो गया .. कितनी मात्रा में हो गया, वैसे भी परिभाषित करने की जरुरत ही क्या हैअब प्रेम है तो है … ये तो जीवन धारा की तरह सतत प्रवाहमयी है .. व्यक्ति का जन्म होता है वह अपने आस पास दिखने वालो से पेम करता है फिर समय के साथ वह उस प्राकृतिक प्रेम की और उन्मुख होता है जिसकी प्रेरणा से वह व्यक्तिगत प्रेम से आगे बढ़कर समष्टिगत प्रेम की और उन्मुख ही जाता है और तब हार जीत .. लाभ – हानि की भावना नहीं रह जाती .. मिला तो भी खुश न मिला तो भी खुश .. इसी व्यवहार में प्रेम की सार्थकता है. ..

अगर इसे एक शब्द भी मान ले तो यह इतना व्यापक और सकारात्मक भाव लिए हुए है की हमें सिर्फ जीवन सहजता से जीने की शिक्षा देता है ,,यानी अगर आप सच्चे प्रेमी है तो आपके लिए स्थिति win and win की ही है … तो मित्रो इस अवसर पर एक ही बात . सच्चे प्रेमी बने …. और सिर्फ जीत का वरन करे.. न तो पाने पर अति उत्साह होगा और न ही खोने पर अवसाद , न तो किसी पर तेज़ाब फेका जायेगा , न कोई जहर खायेगा.. न कोई आनर किलिंग का शिकार होगा… न तो प्रेम लापरवाह होगा ..और न ही बेपरवाह .. बल्कि जिम्मेदार होगा ..अपने प्रति परिवार ,समाज राष्ट्र और पूरी मानवता के प्रति समर्पित और वही सच्चा प्रेम होगा .

————————————————————————————————

कुछ पंक्तिया .. आज सुबह सुबह ही लिख गई.. ……

…………………

प्यार का है असर उम्र भर के लिए ,

ये सुहाना सफ़र उम्र भर के लिए

…………………………

इस भटकती नजर का ठिकाना बना ,

दिल तुम्हारा मेरा आशियाना बना .

भूल बैठा हु सारे जहा को मै अब ……

एक नजर का असर उम्र भर के लिए,

……………………………………………………………………………….

images तुम हमारे हुए , हम तुम्हारे हुए ,

अपनी जद में शजर ,चाँद तारे हुए ..

आज कितना हसी रंग गया प्यार में,

तेरा घर मेरा घर उम्र भर के लिए …….

………………………………………………………………………………………………………

ख्वाब बन जाओ तुम , और सो जाऊ मै , images2

पलके नीची करो और खो जाऊ मै .

इस जहा की नजर से बेअसर -बेअसर,

बेखबर- बेखबर उम्र भर के लिए ……

———————————————————————

2251528719_cc6630a67f कोई राधा बनी ,कोई कान्हा हुआ ,

राम का दास तुलसी दीवाना हुआ .

प्रेम है सारे जग में भरा देख लो,

कोई तन्हा किधर उम्र भर के लिए ……….

प्यार का है असर उम्र भर के लिए ,

ये सुहाना सफ़र उम्र भर के लिए.

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42 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Shailesh Kumar Pandey के द्वारा
February 17, 2011

प्रेम की व्यापक प्रकृति पर सुन्दर लेख के साथ साथ प्रेम पूर्ण कविता मन को प्रसन्न कर गयी आपकी कविता बहुत ही अच्छी है आप बहुत अच्छी कवितायें लिखते हैं | कविता के भाव गति और लयात्मकता से सुखद अनुभूति होती है आभार ————————————————————— इस भटकती नजर का ठिकाना बना , दिल तुम्हारा मेरा आशियाना बना . भूल बैठा हु सारे जहा को मै अब …… एक नजर का असर उम्र भर के लिए ————————————————— कोई राधा बनी ,कोई कान्हा हुआ , राम का दास तुलसी दीवाना हुआ . प्रेम है सारे जग में भरा देख लो, कोई तन्हा किधर उम्र भर के लिए ………. प्यार का है असर उम्र भर के लिए , ये सुहाना सफ़र उम्र भर के लिए ———————————————- बहुत सुन्दर लगीं

    nikhil के द्वारा
    March 2, 2011

    शैलेश जी धन्यवाद सराहना के लिए

Nish aik bevkoof के द्वारा
February 10, 2011

निखिल भाई, अच्छी रचना के लिए बधाई, गद और पद का अच्छा संगम प्रस्तुत किया आपने, पढ़कर अच्छा लगा..ऐसे ही लिखते रहिये.

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    February 10, 2011

    प्रतिक्रिया देने के लिए धन्यवाद

nishamittal के द्वारा
February 10, 2011

पद्य रूपी गंगा और गध्य रूपी यमुना का सुंदर संयोग इतने सुंदर शब्दों में.शुभकामनाएं.

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    February 10, 2011

    निशा जी आभारी हु इस अनमोल सराहना के लिए

bhaijikahin by ARVIND PAREEK के द्वारा
February 10, 2011

प्रिय श्री निखिल पॉंडेय जी, गद्य की चाशनी के साथ पद्य की मिठाई का स्‍वाद लग रहा है कि बाकी स्‍वाद भुल जाऊँगा। पहले प्रेम की व्‍याख्‍या फिर प्‍यार के असर की बात भई वाह क्‍या कहनें। वास्‍तव में बहुत अच्‍छा लगा। बधाई। अरविन्‍द पारीक

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    February 10, 2011

    आदरणीय पारीक जी .. इस उत्साहवर्धन के लिए धन्यवाद

meenakshi srivastava के द्वारा
February 9, 2011

बहुत खूब दोनों ही रचना गद्य और सचित्र पद्य रचना बहुत सुंदर लिखी है. मीनाक्षी श्रीवास्तव

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    February 10, 2011

    धन्यवाद मीनाक्षी जी

rajeev dubey के द्वारा
February 9, 2011

बड़ी प्यारी रचना की है आपने, बधाई हो

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    February 10, 2011

    राजीव जी धन्यवाद

alkargupta1 के द्वारा
February 9, 2011

निखिल जी, इतनी सुन्दर रचना बहुत ही बढ़िया ! बधाई कॉन्टेस्ट के लिए मेरी हार्दिक शुभकामनाएं !

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    February 10, 2011

    अलका जी धन्यवाद

allrounder के द्वारा
February 9, 2011

निखिल भाई बेहद प्यारी रचना पर बधाई और प्रतियोगिता के लिए शुभकामनाये !

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    February 10, 2011

    सचिन भाई धन्यवाद

HIMANSHU BHATT के द्वारा
February 9, 2011

PYAR KA HAI ASAR UMR BHAR KE लिए….. AAPKI KAVITA KA BHI HAI ASAR UMR BHAR KE लिए….. BEHTARIN रचना….. DHANYVAAD NIKHIL JI ……

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    February 10, 2011

    हिमांशु जी बहुत बहुत आभारी हु .. आपकी सराहना के लिए

chaatak के द्वारा
February 9, 2011

स्नेही श्री निखिल जी, आपकी पोस्ट पढ़कर एक ताजगी का अहसास हुआ | प्रेम के सभी पक्षों पर जिस तरह सरल शब्दों में आपने लिखा वह प्रेमी, कुंठित और अतिउत्साही तीनो तरह के लोगों के लिए एक अच्छी सलाहियत भी है| कविता लाज़वाब है| बधाई!

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    February 10, 2011

    चातक जी आपने लेख को पढ़ा और सरह .. इसके लिए आभार..

R K KHURANA के द्वारा
February 8, 2011

प्रिय निखिल जी, ख्वाब बन जाओ तुम , और सो जाऊ मै , पलके नीची करो और खो जाऊ मै . सुंदर रचना के लिए बधाई खुराना

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    February 10, 2011

    सर बहुत बहुत धन्यवाद

Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
February 8, 2011

कोई राधा बनी ,कोई कान्हा हुआ , राम का दास तुलसी दीवाना हुआ . प्रेम है सारे जग में भरा देख लो, कोई तन्हा किधर उम्र भर के लिए ………. प्यार का है असर उम्र भर के लिए , ये सुहाना सफ़र उम्र भर के लिए खूबसूरत भाव ………. हार्दिक बधाई….

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    February 10, 2011

    पियूष जी आभारी हु आपने सराहा इस रचना को

baijnathpandey के द्वारा
February 8, 2011

ख्वाब बन जाओ तुम , और सो जाऊ मै , पलके नीची करो और खो जाऊ मै . इस जहा की नजर से बेअसर -बेअसर, बेखबर- बेखबर उम्र भर के लिए …… निखिल जी,आपने तो मन मोह लिया …..बहुत सुन्दर प्रस्तुति …..बधाई

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    February 10, 2011

    पाण्डेय जी आपको बहुत बहुत धन्यवाद ..आपने इस सुन्दर अंदाज में सराहना की…

rajkamal के द्वारा
February 8, 2011

kabhi suna था चाचा ग़ालिब का लिखा हुआ \\"निगाह को इक उम्र चाहिए असर होने तक कौन जीता है तेरी ज़ुल्फ़ की सहर (शाम )होने तक …. लेकिन आज आपने कुछ नए अंदाज़ में बात की , बहुत अच्छा लगा पढ़ कर , धन्यवाद

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    February 10, 2011

    राजकमल जी ..आपका हर अंदाज निराला है सराहना का भी ये अंदाज बहुत अच्छा लगा… आपको पसंद आया ये लेखन सार्थक हुआ..

वाहिद काशीवासी के द्वारा
February 8, 2011

आपकी इस रचना ने आनंदित कर दिया निखिल भाई|बेहतरीन प्रस्तुति के लिए साधुवाद,

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    February 10, 2011

    वाहिद भाई धन्यवाद ……..

roshni के द्वारा
February 8, 2011

निखिल जी कोई राधा बनी ,कोई कान्हा हुआ , राम का दास तुलसी दीवाना हुआ . प्रेम है सारे जग में भरा देख लो, कोई तन्हा किधर उम्र भर के लिए क्या कहने बहुत खूब लिखा आपने

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    February 10, 2011

    रौशनी जी आपने समय निकल कर इसे पढ़ा और सराहा इसके लिए आभार..

आर.एन. शाही के द्वारा
February 8, 2011

निखिल जी, प्रेम की व्याख्या में आपने गद्य और पद्य दोनों का संगम कराकर जैसे गंगा में डुबकी लगवा दी । बहुत ही सार्थक प्रयास … हार्दिक बधाई ।

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    February 10, 2011

    आदरणीय शाही जी .. आपकी अनमोल प्रतिक्रिया के लिए आभारी हु.. बहुत बहुत धन्यवाद

ashvinikumar के द्वारा
February 8, 2011

निखिल भाई I LOVE YOU बहुत प्यारा शब्द है,लेकिन आपको लगेगा भाई दुसरे के ब्लॉग पर जा के बोला तो जूते पड़ेंगे की यह आदमी कितना बत्तमीज है अब आप ही बताओ मै बत्तमीज या मुझे बत्तमीज कहने वाला बत्तमीज (जाकी रही भावना जैसी प्रभु मूरत देखी तिन्ह तैसी ) वैसे आपने आँचल वो लहराया दिखा की याद दिला दी …………………जय भारत

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    February 10, 2011

    अश्वनी जी धन्यवाद ..

Aakash Tiwaari के द्वारा
February 8, 2011

श्री निखिल जी, बहुत ही अच्छी और खूबसूरत रचना…..प्रेम पर लिखी बाते बहुत ही अच्छी लगी.. शुभकामनाओं सहित आकाश तिवारी http://aakashtiwaary.jagranjunction.com

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    February 10, 2011

    प्रिय आकाश जी बहुत बहुत धन्यवाद इस सराहना के लिए

Manoj के द्वारा
February 8, 2011

कोई राधा बनी ,कोई कान्हा हुआ , राम का दास तुलसी दीवाना हुआ . प्रेम है सारे जग में भरा देख लो, कोई तन्हा किधर उम्र भर के लिए ………. प्यार का है असर उम्र भर के लिए , ये सुहाना सफ़र उम्र भर के लिए……यह पंक्तियां दिल में रम सी गई  है….

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    February 10, 2011

    मनोज जी धन्यवाद..

vinitashukla के द्वारा
February 8, 2011

बहुत ही मनोयोग से लिखी गयी अच्छी रचना के लिए बधाई.

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    February 10, 2011

    विनीता जी आपको बहुत बहुत धन्यवाद इस प्रतिक्रिया के लिए


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