सर झुकाकर आसमा को देखिये ...........

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सद्र-ए-आलम बोले.-" अपनी हद में रहो "

Posted On: 7 Feb, 2011 Others में

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आज हम सभी के लिए सुकून का दिन है …सारा मंच प्रेममय हुआ है पुरे देश में तमाम भ्रष्टाचर महंगाई बेरोजगारी को भूल जब हम वैलेंटाइन डे के स्वागत के लिए जी जान लगा कर कंटेस्ट की तैयारियों में जुटे है …. इसी बीच एक खुशखबरी हैदराबाद से आई ..

जी हा  वही जिसका इंतज़ार हम सभी कई महीनो से कर रहे थे … की हमारे प्रधानमंत्री जी अपनामुह खोले और कुछ बोले… राष्ट्रमंडल खेलो में खूब खेल हुआ वे चुप रहे ,महाराष्ट्र में आदर्श का घोटाला हुआ वे कुछ नहीं बोले ,, टू जी स्पेक्ट्रम में मंत्री राजा जी ने रिकार्ड ही बना दिया पी एम् साहब मौन रहे ,,सी वि सी नियुक्ति का मामला हुआ .. वे चुप रहे..विदेशो में धन का मामला आया वे चुप ही रहे .,महंगाई आसमान पर चली गई वे चुप ही रहे … और भी कई ऐसे कारनामे सरकार में हुए मगर मनमोहन सिंह जी का मौन नहीं टूटा…

…………………………………………………………………………………


मगर कहते है न देर आये दुरुस्त आये.. हैदराबाद में(17  वे कामनवेल्थ ला कांफ्रेंस में ) बोले और क्या खूब बोलेजी नहीं ज्यादा खुश न हो वे सरकार के काम काज पे नहीं बोले… वे तो न्यायपालिका पे ही उलटी बंदूक तान कर बैठ गए… और न्यायधिशो पर अपने मनसबदारो द्वारा फ़तेह किये गए लक्ष्यों पर नकारात्मक टिप्पड़ी करने से सख्त लहजे में मना करते हुए हद में रहने की धमकी दे डाली ..उन्होंने सोचा होगा की न्यायपालिका बेमतलब न्याय का काम छोड़ के उन सरकारी कामो का भांडा फोड़ देती है जिनपर जनता को बहलाने के लिए उनके वक्ता दिन रात मेहनत करते है … जब कुछ तर्क नहीं मिलता तो उसे मीडिया के सर डाल देते है ….. जनता भी मीडिया को गाली देकर शांत हो जाती है .. मामला ठंडा भी नहीं हो पाता की तबतक न्यायपालिका बीच में टांग अड़ा कर सारे गड़े मुर्दे उखाड़ देती है और न्यायपालिका जब बोलती है तो तुरन अखबारों के मुख्या पृष्ठ पर ये मुए मीडिया वाले छाप देते है ....और फिर मजबूरी में मंत्री लोगो को जेल भेजने का नाटक करना पड़ता है जिसमे सरकार का समय बर्बाद होता है ..और सबसे बढ़कर विपक्ष को भी मुद्दा मिल जाता है चिल्लाने का.. .

manmohan singh cartoon

प्रधानमंत्री जी को मै इसके लिए कोई दोष नहीं दूंगा … बल्कि उनके वक्तव्य को इस बात का प्रतिक मानता हु की किसी के भी खिलाफ बोले तो…अब जाहिर है की सरकार के खिलाफ तो वे बोलेंगे नहीं….. हमें तो ये ही सोच कर खुश होना चाहिए की वे बोले तो… अन्यथा उनका मौन हमें सर के बाल नोचने को मजबूर कर चूका था ………….

हमें इस बात पर ही संतोष करना चाहिए की हमारी जान निकलने से पहले वे बोल पड़े …………..और इसका श्री न्यायपालिका को जाता है …

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18 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

subhash के द्वारा
February 8, 2011

pm ji ke liye yah thik hia khisiyani billi khambha noche

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    February 10, 2011

    जी हा सही कहा आपने कुछ ऐसी ही स्थिति है…

deepak pandey के द्वारा
February 8, 2011

वाह, क्या करार व्यंग्य किया है ,मज़ा आ गया..

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    February 10, 2011

    दीपक जी धन्वाद

rajni thakur के द्वारा
February 8, 2011

निखिल जी, व्यंग्य के माध्यम से क्या जबरदस्त प्रहार किया है आपने …अपने सद्र-ए-आलम पर !

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    February 10, 2011

    रजनी जी धन्वाद प्रतिक्रिया के लिए

वाहिद काशीवासी के द्वारा
February 8, 2011

देखिये अगली बार कब उनके मुखकमल से कमल रुपी शब्द प्रगट होते हैं| एक लाचार इंसान की व्यथा की स्पष्टवादी व्याख्या पर बधाई|

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    February 10, 2011

    वाहिद भाई प्रतिक्रिया के लिए आभार

HIMANSHU BHATT के द्वारा
February 8, 2011

निखिल जी….. नमस्कार…… यह प्रेम का ही जादू है जो सरे मुद्दों से ध्यान हटा कर….. सकारात्मक उर्जा से सराबोर कर देता है…… इस हेतु हमें जागरण जंक्शन का शुक्रगुजार होना चाहिए….. आपका प्रस्तुत लेख वर्तमान राजनैतिक व्यवस्था पर कड़ी चोट करता है…… आभार……………..

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    February 11, 2011

    हिमांशु जी प्रेम अपनी जगह है .. और जिमेदारिया अपनी जगह.. .. आपके उत्साह वर्धन के लिए आभार

abodhbaalak के द्वारा
February 8, 2011

निखिल जी आजकल आप कुछ ज्यादा ही ध्यान दे रहें हैं हमारे आदरणीय PM साब पर… (अरे मैडम से हुक्म आ गया होगा की आज आपको ये बोलना है, सो बोल दिया…. :) ) सुन्दर…………….. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    February 11, 2011

    प्रतिक्रिया के लिए आभार

February 7, 2011

निखिल भाई इस वेलेंटाइन डे की भसड के बीच में क्या खूब बोले हो. मेरा लेख ‘नेता और बाबू का फर्क’ भी इसी तर्ज पर है.

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    February 11, 2011

    राजेंद्र जी इस सराहना के लिए आभार

baijnathpandey के द्वारा
February 7, 2011

भई ये क्या बात हुई निखिल जी ……….नहीं बोले तो शिकवा , बोल दिए तो शिकायत ….चैन की साँस तो लेने दीजिये हमारे PM साब को ……यही तो वो गद्दी है जिसपर बैठते हीं अच्छे -अच्छों को नींद आ जाती है ………आराम से मुंह ढँक के सोने दीजिये उन्हें …….परदे में रहने दो ,पर्दा ना उठाओ….

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    February 11, 2011

    धन्यवाद

rajkamal के द्वारा
February 7, 2011

प्रिय निखिल जी …नमस्कार ! आखिर क्या बात (राज )है की बदले -२ से मेरे सरकार (पी.एम ) नजर आते है ?

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    February 11, 2011

    जी राजकमल जी ..यही सवाल तो सबके मन में उठा है


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