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राजा की कुंवारी बेटी

Posted On: 29 Jan, 2011 Others में

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शीर्षक पढ़कर आप हैरान होंगे …. पर उम्मीद है आप लेख पूरा पढ़ते पढ़ते समझ जायेंगे …….

कुछ दिन पूर्व अपने बैंक खाते से मैंने कुछ पैसे निकाले.. एक दूकान पर सामान लेने गया तो ये देख कर बहुत अच्छा लगा की जाली नोट जांचने वाली मशीन लगी है पर अगले ही पल ख़ुशी हवा हो गई जब मेरे नोटों में से 2 नोट 500 के नकली निकल गए….इतने में वहा ५-६ लोग आ गए और यथा बुद्धि सलाह देने लगे.. कोई बोला इसे बैंक में ले जाके वापस कर दे.. और एक सामाजिक कार्य करे … देश में जाली नोटों को ख़त्म करने में मदद करे.. तभी किसी ने कहा की बैंक जाओगे तो फस जाओगे (वे अपनी आपबीती का हवाला देते हुए बोले) ..”" वह सबसे पहले तो आपसे नोट ले लेंगे और आपको खली हाथ वापस भेज देंगे ,उससे पहले 25 सवाल होंगे और अगर पुलिस में मामला गया तो हजार तो गए ही २-३ हजार अलग से देने पड़ जायेंगे .. इससे बढ़िया है कही इधर- उधर चला दीजिये.. ..

………………………………………………………………………..

आप मेरी परेशानी का अंदाजा लगा सकते है ..मै ऐसी स्थिति में पहले कभी नहीं पड़ा … एक तो बेरोजगारी ऊपर से 1000 का झटका ऊपर से पुलिस की पूछ- ताछ का नरकीय भय .. देश भक्ति का बुखार उतर गया ..शायद इसके लिए आप मेरी आलोचना करे पर मै वहा से हट गया .. दूसरा उपाय अपनाते हुए उस नोट को दूसरी जगह चला दिया ..और घर लौट आया , सर से बहुत बड़ा बोझ उतर गया था .. लेकिन रात में जब चिंतन मनन का समय आया तो मन खुद को कोसने लगा .. की मैंने बहुत गलत किया ये देश के साथ छल है इत्यादि टाइप के इमोशनल ख्याल रात भर आते रहे ….और कब सुबह हो गई पता ही नहीं चला ..

एक सवाल पूछना चाहता हु अगर मेरी जगह आप सभी होते तो क्या करते ??

……………………………………………………………….

आंकड़े बताते है की नकली नोटों की मात्रा हमारे देश में लाखो करोण में है (अगर आपके पास आंकड़े है तो देने की कृपा करे ).. अब आप अंदाजा लगा सकते है की इस अर्थव्यवस्था में कितना बड़ा घुन लग चूका है है .. आये दिन ए टी एम् से जाली नोट निकलने की खबरे छपती है.. जाली नोटों के तस्कर हमेशा पकडे जाते रहते है .. मगर ये कीड़ा अपना विस्तार बढाता ही चला जा रहा है … इस बीच सरकार ने नकली नोटों की समस्या से लड़ने के लिए पालीमर नोट चलने पर विचार किया था जो की कागजी मुद्रा से ज्यादा सुरक्षित है और पर्यावरण के भी अनुकूल है ..ऐसे नोट आस्ट्रेलिया में प्रचलित है ..पर जाने हम कब अपनाएंगे..

कितने लोगो को तो पता ही नहीं है असली नकली नोट की पहचान करना .. हा वे खुद को होशियार दिखाने के लिए नोट को उलटते पलटते है और फिर रख लेते है…वास्तवकि आंकड़े बहुत खतरनाक तस्वीर दिखाते है … जाली नोट देश की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा दोनों के लिए खतरा है .

…………………………………………………………………………………….

अब इस शीर्षक का मतलब बता देता हु.“” एक बार सुल्तान फिरोजशाह तुगलक ने अपने वजीर खान- ए -जहा मकबूल से सिक्को के बारे में कुछ टिप्पड़ी करने को कहा .. तो उसने जवाब दिया राजा के सिक्के एक कुआरी पुत्री की तरह है जिसे सुन्दर और आकर्षक होने के बावजूद कोई पा नहीं सकता ,यदि कोई गलत या सही तरीके से उसे हड़पना चाहे तो पुत्री के गुणों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा “ठीक उसी तरह से यदि कोई सिक्को को इमानदारी या गलत ढंग से बिगाड़ने की कोशिश करे तो सिक्को की बदनामी होगी……“”. ....

New Indian Rupee symbol

मुद्रा का महत्व किसी राष्ट्र के लिए क्या होता है आप समझ ही सकते है ..राजा की वह बेटी है जिसमे राजा की जान बसी होती है … यह एक बेहद संवेदनशील मुद्दा है .. जिसपर हम इतनी ही बात कर पाते है की ये काम आई एस आई करती है ये नेपाल बंगलादेश से होकर आते है इत्यादि . बस और फिर भूल जाते है ……इसपर कुछ गंभीरता से नजर डालने की जरुरत है … क्योकि राजा की कुवारी बेटी पर खतरा बढ़ता जा रहा है …

सवाल फिर से मेरी जगह आप होते तो क्या करते???????

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30 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

February 1, 2011

निखिल जी मेरी सोच तो यही है कि अगर किसी आम आदमी के पास नकली नोट आ जाता है तो उसकी जिम्मेदारी सरकार को लेनी चाहिए क्योंकि इस सिस्टम की करता-धर्ता वही है. एक आम आदमी के लिए हजार रूपया भी बहुत मायने रखता है, इसलिए अगर इस वजह से उसको आर्थिक हानि होती है तो सरकार ही इसकी भरपाई करनी चाहिए. अगर मै सुझाव दे सकता तो यही देता कि RBI को हर बैंक में ऐसा एक सेल खोलना चाहिए जहाँ कि इस प्रकार के नकली नोट नागरिक की आइडेंटीटी नोट कर बदल देने चाहिए ताकि वे अन्यत्र न पहुँच पाए.

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    February 1, 2011

    आदरणीय राजेंद्र जी मै ऐसे ही किसी उत्तर की प्रतीक्षा कर रहा था … ये बहुत बढ़िया एक उपाय आपने बताया है …. वास्तव में ये सरकार की नैतिक जिम्मेदारी बनती है की वह अपनी व्यवस्थागत कमजोरियों का खामियाजा आम जनता को भुगतने से बचाए और ऐसे किसी सिल्की व्यवस्था हर बैंक में करे जहा … नागरिक की आइडेंटीटी नोट कर बदल देने चाहिए ताकि वे अन्यत्र न पहुँच पाए…… यही या ऐसा कुछ और उपाय… आपका बहुत बहुत आभार..

preetam thakur के द्वारा
February 1, 2011

निखिल जी ! एक ज्वलंत समस्या पर काल्पनिक खानी द्वारा प्रकाश डाल कर आपने सराहनीय लेख लिखा है | ये स्थिति तब पैदा होती है जब हम नोट को बारीकी से नहीं देखते | बैंक से नोट लेते ही एक एक को उन सारे पहलुओं से परखना चाहिए और अगर शक है तो वहीं बैंक काउंटर पर ही बदलना चाहिए | इस स्थिति में अगर आप चाहें तो बैंक के खिलाफ कानूनी करवाई भी होगी और बैंक के अन्दर जो virus इस धंदे में लगा है वो पकड़ा जायेगा | अगर आप ATM से निकाल रहे हों तो मशीन के सामने अपने मोबाइल का कैमरा चालू करके निकालें जिस पर नोटों के नम्बर आने चाहियें | इस तरह आप ये साबित कर सकेंगे के ये नोट ATM से ही निकला था | थोडा झंझट तो है पर अगर हर व्यक्ति सावधान रहे तो कुछ हद तक जाली नोट का काला कारोबार रोका जा सकता है | ये चीजें प्रगति के side effects हैं , होते ही रहेंगे, नई पीढ़ी के बीच कुछ ऐसे तत्व पैदा होते ही रहेंगे जो काले बाजार की पैदाईश हैं | इस में जादातर पुलिस और नौकरशाहों की संतानें मिलेंगी | दाऊद भी तो एक पुलिस वाले का बेटा है !

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    February 1, 2011

    आदरणीय प्रीतम जी . ..विनम्रता के साथ कहना चाहता हु की .ये कहानी नहीं है … आपकी बाते और सुझाव सही है हमें स्वयं ही जागरूक रहना पड़ेगा .. लेकिन मै आपको बताना चाहूँगा की हमारे देश में कई लाख करोण की मात्रा में जाली नोट है … और तमाम सरकारी दावो के बावजूद इनकी तस्करी और आवाजाही जारी है … आपके द्वार बताई गई सावधानिय हर कोई नहीं कर सकता .. क्योकि हर किसी के मोबाईल फोन में कैमरे नहीं है….जहा तक बैंको की बात है तो ये बात हम सभी जानते है और लगभग हर सप्ताह पढ़ते है खबरों में की अमुक बैंक के ATM से नकली नोट मिला … ऐसी घटनाएं आये दिन होती है… कितने बैंको के खिलाफ कार्यवाही हुई है …? आम ग्राहक ये मान कर चलता है की बहार किसी से लेने में नकली नोट मिलते है . उसे बैंको पर विश्वाश है …. मुख्य बात ये है की अगर कोई अपनी नैतिक जिम्मेदारी समझकर उस नकली नोट को बैंक में ले जाए .. तो उस नागरिक के प्रति सरकार या बैंक का क्या फर्ज होने चाहिए … क्योकि नकली नोट वापस करने पर या बैंक में देने पर उसे तो बदले में कुछ भी नहीं मिलता ..उलटे आर्थिक हानी हुई सो हुई पुलिस का चक्कर अलग से फस सकता है …. पर्तिक्रिया और सुझावों के लिए धन्यवाद अब मै सतर्क हु इस मामले में .. प्रयास करता हु की बड़े नोट ही न लू.. .. ATM में इतनी भीड़ होती है की अगर आप वह कैमरा सेट करने लगे तो लोग बहार से गालिया देना शुरू कर देंगे ….वास्तव में ये सभी उपाय नहीं है .. इसका उपाय है जाली नोटों की तस्करी में पकडे जाने वालो पर कठोरतम सजा का प्रावधान हो जैसे चीन या अरब देशो में है …

rajkamal के द्वारा
January 31, 2011

प्रिय निखिल भाई …नमस्कार ! इसमें पश्चाताप ता आत्मग्लानी वाली कोई बात नही है ….. इस महंगाई के जमाने में हम बड़ी ही नुश्किल से मेहनत से कुछ कम पाते है …. अगर वोह भी जाली करंसी में मिल जाए तों फिर उसको किसी दूसरी जगह पर चलाने में कोई भी हर्ज नही है ….. हम सरकार नही है , बल्कि सरकार को कर देने वाले नागरिक है ….. इसलिए हमारे मौलिक अधिकारों की रक्षा करना उसका पहला कर्तव्य है …. धन्यवाद

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    February 1, 2011

    राजकमल जी ..अभिवादन स्वीकार करे …. मै आत्मग्लानी नहीं कर रहा क्योकि मेरी जगह कोई भी होता तो 99 % संभावना यही है की वह दूसरा कदम ही उठता … सवाल व्यवस्था का है….. मान लीजिये किसी को गलती से कही कोई बड़ा नोट मिल जाता है …अगर कोई अपनी नैतिक जिम्मेदारी समझकर उस नकली नोट को बैंक में ले जाए .. तो उस नागरिक के प्रति सरकार या बैंक का क्या फर्ज होने चाहिए … क्योकि नकली नोट वापस करने पर या बैंक में देने पर उसे तो बदले में कुछ भी नहीं मिलता ..उलटे आर्थिक हानी हुई सो हुई पुलिस का चक्कर अलग से फस सकता है …… आभार

sumityadav के द्वारा
January 31, 2011

नकली नोटों की समस्या से अभी बहुत लोग दो-चार नहीं हुए हैं इसलिए उन्हें ये समस्या उतनी गंभीर भले न लगे। लेकिन ये समस्या विकराल है। ये हमारी अर्थव्यवस्था को अंदर से खोखला कर रही हैं। बढ़िया लेख के लिए बधाई निखिलजी।

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    February 1, 2011

    सुमित जी सही कहा आपने जबतक हम सभी समस्या से दो चार नही होते तबतक उसकी गंभीरता का आंकलन नहीं कर पाते है ..सराहना के लिए आभार

Alka Gupta के द्वारा
January 31, 2011

निखिल जी , आज इन जाली नोटों की माया सर्वत्र बिछी हुई है फिर असली और नकली में पहचान भी बहुत ही मुश्किल है वैसे ही आपके सवाल का जवाब भी थोडा कठिन ही है साधारणतः लोग इन जाली बड़े नोटों के लपेटे में आ ही जाते हैं फिर चुप बैठ जाते हैं…..! बहुत अच्छे विषय पर लिखा है आपने धन्यवाद !

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    February 1, 2011

    अलका जी आपकी अनमोल प्रतिक्रिया और सराहना के लिए आभार

roshni के द्वारा
January 31, 2011

निखिल जी उस जगह होना और उस जगह होने के लिए सोचना दोनों में बहुत अंतर है …….. हम में से सब सिर्फ उस जगह सोच कर सही उत्तर नहीं दे पायेगे ………… बहुत अच्छा लेख

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    February 1, 2011

    रौशनी जी लेख पसंद आया .. इसके लिए आभारी हु

R K KHURANA के द्वारा
January 31, 2011

प्रिय निखिल जी, बहुत सुंदर लेख है ! एक अलग ही विषय चुना है आपने ! बधाई खुराना

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    February 1, 2011

    आदरणीय खुराना जी …प्रणाम … आपकी आशीर्वाद स्वरुप अनमोल प्रतिक्रिया मिली ..इसके लिए आभारी हु

div81 के द्वारा
January 31, 2011

मुश्किल सवाल है जवाब गोलमाल है | जब राजा ही अपनी बेटी को सुरक्षित नहीं रख सकता तो प्रजा क्यूँ कर परेशां है कायदे कानून की धज्जियाँ तो उड़ाती खुद सरकार है प्रजा बेचारी तो हर बार होती हलकान है सब की होती अपनी मजबूरियां है आप क्यूँ होते परेशान है हर किसी का दिल होता थोडा थोडा बइमान है ……………………………………..बड़े नोट बनने ही नहीं चाहिए | न रहेगा बांस न बजेगी बांसुरी ……………..और पालीमर नोट वाला आईडिया भी अच्छा है | अच्छे लेख के लिए बधाई………… 

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    February 1, 2011

    दिव्या जी बहुत ही खुबसूरत अंदाज में आपने अपनी बात कही है … आपने सही पकड़ा .. राजा को ही चिंता नहीं है तो राष्ट्र का आम नागरिक क्या करेगा… पालीमर नोट एक उपाय हो सकता है ….या फिर बड़े नोट वापस ले लिए जाए… आपकी कविता जबरदस्त है… इसके लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद

abodhbaalak के द्वारा
January 31, 2011

निखिल जी आपकी जगह मै होता तो मै भी शायद वो ही करता जो की आपने किया, ये एक बड़ी समस्या है और सच तो ये है की बहुत कम ही लोग असली और नकली में अंतर कर पते हैं… सुन्दर रचना… http://abodhbaalak.jagranjunction.com

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    February 1, 2011

    जी अबोध जी सही कहा आपने … हम्मे से अधिकतर लोग असली नकली नोट में भी फर्क नहीं कर पाते है ..सराहना के लिए आभारी हु

nishamittal के द्वारा
January 31, 2011

निखिल जी आपकी समस्या आम आदमी से सम्बद्ध व्यवहारिक समस्या है जो सबके दिमाग में यही सवाल उपजाति है,और अंत में अंतरात्मा हारती है और चलायमान मन जीत जाता है.

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    February 1, 2011

    निशा जी अभिवादन…….. सही कहा आपने चलायमान मन जीत जाता है….. प्रतिक्रिया के लिए आभार

AMIT KR GUPTA के द्वारा
January 31, 2011

निखिल भाई उचित मुद्दा उठाने के लिए बधाई .आज हमारे देश में जली नोटों का धंधा महामारी की भांति फैला जा रहा हैं. इससे लड़ने के लिए पर्याप्त प्रचार -प्रसार ,करनी चाहिए. आज बहुत से ऐसे लोग हैं जिन्हें नोटों की पहचान करना नहीं आता हैं. आम जनता को भी अपनी जिम्मेदारियो को समझना होगा. नेपाल सीमा को सिल करना अति आवश्यक हैं. मैंने कुछ लेख लिखे हैं यदि कभी फुर्सत मिले तो उन्हें पढ़कर अपने शिकायतों और सुझाव से मुझे अवगत करावे. http://www.amitkrgupta.jagranjunction.com

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    February 1, 2011

    अमित जी आपकी अनमोल प्रतिक्रिया के लिए आभारी हु

Dharmesh Tiwari के द्वारा
January 31, 2011

भाई निखिल जी,आज जाली नोटों ने अपना सम्पूर्ण बिस्तार कर लिया है यही ब्यवस्था है क्या कहेंगे,एक अच्छा विषय,धन्यवाद!

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    February 1, 2011

    धर्मेश जी धन्यवाद

HIMANSHU BHATT के द्वारा
January 30, 2011

निखिल जी, नमस्कार, आपने बेहद संवेदनशील मुद्दा मंच पर उठाया है इसके लिए आप बधाई के पात्र हैं….. मेरे साथ एक बार यह हुआ था…. तो मैंने बैंक को रूपये वापस किये थे….. शायद उच्च न्यायालय में समीक्षा अधिकारी होने के कारण बैंक ने बिना किसी परेशानी के मुझे रूपये दे दिए हों….. लेकिन समस्या गंभीर है…… सबसे पहले तो सरकार को बड़े नोट तो बंद कर ही देने चाहिए….

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    February 1, 2011

    हिमांशु जी …इस सराहना के लिए आपका आभार … बड़े नोटों को बंद करना शायद इसका तात्कालिक और सबसे प्रभावी कदम होगा .. इसपर रामदेव जी ने प्रधानमंत्री जी से बात की थी और प्रधानमंत्री जी ने भी इसकदम को सही ठहराया था पर पता नहीं सरकार कब ऐसा करेगी

वाहिद काशीवासी के द्वारा
January 30, 2011

अच्छा प्रश्न उठाया आपने निखिल जी| मैंने भी दूसरा उपाय ही अपनाया है|देश के लिए प्रयास सिर्फ़ हमारा आपका दायित्व नहीं है सबका है| साधुवाद,

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    February 1, 2011

    वाहिद जी नमस्कार और आपका धन्यवाद् इस प्रतिक्रिया के लिए

Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
January 29, 2011

निखिल जी…… ये बड़े अफसोस की बात है… की इस समस्या से निजात पाने के कोई उपाय नहीं किए जा रहे हैं……… ओर कई बार मजबूर होकर हमें भी ये करना पड़ता है जिससे की देश को नुकसान हो….. ये इस देश का दुर्भाग्य है की यहाँ राजा की बेटी ही सबसे असुरक्षित हैं……….. अच्छे लेख के लिए बधाई……

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    February 1, 2011

    पियूष जी धन्यवाद इस प्रोत्साहन के लिए


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