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ये सत्ता गणतंत्र नहीं बनने देगी

Posted On: 26 Jan, 2011 Others में

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15 अगस्त को जब भारत स्वतंत्र हुआ तो वह स्वतंत्रता पूर्ण नहीं थी … वह पूर्ण हुई 26 जनवरी 1950 को उस समय नेहरु जी ने कहा की भारत पूर्ण गणतंत्र नहीं बना है बल्कि पूर्ण गणतंत्र बनने की प्रक्रिया में है … तबसे अबतक 61 वर्षो में हमने कभी ये जानने का प्रयास नहीं किया की ये प्रक्रिया गणतंत्र बनने की कहा तक पहुची …. ….


गणतंत्र की इस यात्रा में आज अगर हम देखे तो एक बड़ा हिस्सा जो की गणतंत्र का वास्तविक अधिकारी था वह अंतिम व्यक्ति अभी तक अपने अधिकारों से अनभिज्ञ है .. हम इस गणतंत्र को कैसे परिभाषित करे ये बड़ा यक्ष प्रश्न लगता है कभी कभी …..

जब इस देश का कृषि मंत्री ये कहे की रख रखाव की कमी के कारण लाखो टन अनाज सड गया और वो भी तब जब इस देश में करोणों लोग एक टाइम भूखे सोते है ….

या फिर इस देश का जिम्मेदार मंत्री महाभ्रष्टाचार के मुद्दे पर पर अपने लुटेरे नेताओं का पक्ष लेते हुए तमाम प्रतिष्ठित संस्थाओं को ही कटघरे में खड़ा करता है .. जहा एक विदेशी दलाल की जी हुजूरी में पूरा मंत्रिमंडल लग जाता है …और एकदूसरे पर कीचड़ उछालकर अपनी अपनी कालिख को ढकने का प्रयास करने में पूरी उर्जा लगा दी जाती है ..

जहा देश के एक कोने में तिरंगा फहराने को रोकने में पूरी सत्ता अपने ताकत लगा देती है ….. जहा एक राज्य का मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय सरकार के नेता एक खतरनाक आतंकवादी को फ़ासी न देने के पीछे ये तर्क देते है की इससे कश्मीर में दंगा हो जायेगा ,

देश के लुटेरो का नाम लेने में और लूट का अथाह धन देश में वापस लौटने में जिस बेशर्मी से अंतर राष्ट्रीय संधियों का बेतुका हवाला दिया जाता है ….

अमीर और गरीब की खाई अपनी सीमा के पार जा चुकी है ..इस देश का गरीब आज भी रोटी, कपडा, मकान की तलाश से बाहर अपनी सोच नहीं ला सका है क्योकि अभी उसे इनके ही लाले पड़े है, संसद और विधान सभाओं में लगातार पूंजीपतियों अपराधियों का प्रतिशत वर्ष दर वर्ष बढ़ता ही जाता है और जत्नता हर वर्ष छली जाने को मजबूर है ,…….

न्यायपालिका भी पूरी तरह पाक साफ़ नहीं पाती खुद को .. और जहा लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ धन दौलत की सुगंध में अपने आपको निष्पक्ष न रखकर बाजार और टी आर पी के पीछे भाग रहा है ,,

आज भी 40 प्रतिशत से अधिक शिक्षित मतदाता वोट नहीं देते, और पूंजीपति और दलाल राजनीतिक दलों के प्रायोजक बने हुए है और संसद उनके इशारो पर चलने को मजबूर है .

…………………………

विचारहीन ,सिद्धान्तहीन राजनीतिक दल , भ्रष्ट नौकरशाही .. और अपने लोकतान्त्रिक अधिकारों से अनभिज्ञ जनता ऐसी ही कुछ तस्वीर है हमारे लोकतंत्र की जो ये बताती है की लोकतंत्र हमारे लिए आज भी दूर की कौड़ी है वास्तविक लोकतंत्र से हम कोसो दूर है .

यानी हमपर अभी एक जिम्मेदारी है की गणतंत्र दिवस मानाने से पहले गणतंत्र को बनाने में अपना योगदान दे . प्रश् ये उठता है की हम ये योगदान कैसे करे ? इसका एक मात्र तरीका यही है की देश के शिक्षित युवा ,, डाक्टर , इंजिनियर , शिक्षक इत्यादि अपने जीवन में देश के ग्रामीण हिस्से को प्रमुखता दे वह जाने और लोगो को जागरूक करने का कोई भी मौका मिले तो उसका उपयोग जरुर करे ..

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मित्रो ऐसे कई लोग है जो गुमनाम रहकर देश के पिछड़े और कमजोर लाको में अपनी सेवाए दे रहे है . अपनी व्यावसायिकता से थोडा समय निकाल कर गावो में राष्ट्र के स्वाभिमान के लिए कार्य कर रहे है …ये सज्जन शक्तिया ही है जिनके कार्यो से देश में एक सामंजस्य बना हुआ है … कई ऐसे लोग है जो महिला उत्थान , ग्रामीण उत्थान ,, विकलांग बच्चो, शिक्षा स्वस्थ के क्षेत्र में अपनी अपनी क्षमता के जिसब से कार्य कर रहे है ….. और यकीं मानिए सरकारी वादों से लोकतंत्र नहीं बनेगा वह बनेगा इन्ही सज्जन शक्तियों के प्रयासों से …. तो क्यों न हम भी अपनी अपनी क्षमता के हिसाब से गणतंत्र के निर्माण में सहयोग करे … फिर सच्चा गणतंत्र मनायेगे ?…क्योकि गणतंत्र सिर्फ लिख देने से नहीं बनता .. और सत्ता पूर्ण गणतंत्र बनने नहीं देगी .…….

animated indian flag tiranga india

जय हिंद    जय भारत

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29 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

January 28, 2011

निकिल जी, मैं पियूष जी से पूर्णतया सहमत हूँ कि बहुत सार्थक लेख है. और बहुत सच कहा आपने कि …….गणतंत्र सिर्फ लिख देने या कह देने मात्र से नहीं बनता .. …गणतंत्र की वास्तविकता बताने के लिए बधाई.

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    January 28, 2011

    राजेंद्र जी इस प्रोत्साहन के लिए आभारी हु ….शुभकामनाये दे की इस तरफ हम सभी मिलकर आगे कुछ क्रियात्मक रूप से ला सके..

Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
January 27, 2011

निखिल जी गणतंत्र दिवस पर एक सार्थक लेख के लिए बधाई……. जय हिन्द…….. जय भारत…….

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    January 28, 2011

    जय हिंद पियूष जी सराहना के लिए धन्यवाद …

rajkamal के द्वारा
January 27, 2011

priy nikhil ji …nmskaar ! आपने बिलकुल सही बात कही है …. हमारे इसी मंच के निखिल झा जी यह काम स्वेच्छा से कर रहे है और पियूष भाई भी अपना समय निकाल कर अपना योगदान देते रहते है ….. हरेक जिम्मेदार और समर्थ नागरिक अपने हिस्से का पूरा ना सही अगर कुछ हद तक ही कुछ कर पाए तों हमारे देश की हालत और तकदीर बदलते देर नही लगेगी ….. सुंदर और ओजपूर्ण लेख पर तथा गणतंत्र दिवस की बधाई

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    January 27, 2011

    आदरणीय राजकमल जी ..अभिवादन …… मै स्वयं प्रयास में हु की राष्ट्र के हित के लिए अपना पूर्ण योगदान कर सकू… हम सभी को यथाशक्ति इस कार्य में लग जाना चाहिए …गणतंत्र दिवस की आपको भी शुभकामनाये… प्रतिक्रिया के लिए आभार

allrounder के द्वारा
January 27, 2011

निखिल जी गणतंत्र दिवस और एक सच्चे गणतंत्र मैं आने वाली बाधाओं पर प्रकाश डालते लेख पर बधाई !

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    January 27, 2011

    धन्यवाद सचिन जी बहुत बहुत आभारी हु आपके इस स्नेह का…

rachna varma के द्वारा
January 27, 2011

निखिल जी , नमस्कार , आपने गणतंत्र -दिवस पर एक बेहतरीन आलेख लिखा उसके लिए साधुवाद ! दरअसल आजादी के बाद इस देश की बागडोर जिन हाथो में थमाया गया वे विदेशी संस्कृति में पले-बढे तथा पश्चिमी सभ्यता के समर्थक और विकास का मतलब बस शहरो के विकास तक सीमित रख कर चले इस लिए गाँव और कृषि उपेक्षित होते चले गए और यह सिलसिला आज तक चल ही रहा है नतीजा शहर और गाँव के बीच फासले बढ़ते ही जा रहे है एक कृषि -प्रधान देश होने के बावजूद हमें बाहर से अनाज मंगवाना पड़ रहा है ! डाक्टर ,इंजीनियर की फ़ौज तैयार हो रही है मगर वे मोटी कमाई तथा सुविधाभोगी हो जाने के कारण गाँव में जाना नहीं चाहते पूरी व्यवस्था में आमूल -चूल परिवर्तन की आवश्यकता है तभी गणतंत्र का मतलब सार्थक होगा !

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    January 27, 2011

    रचना जी अभिवादन ….आपकी इस अनमोल प्रतिक्रिया के लिए आभारी हु .. आपका मूल्याङ्कन सही है ..हमारे सत्ताधीश देश की मिटटी से ही जन्मे मगर इस विदेशी हवा में उन्हें ज्यादा सुकून मिला इस कारन वे जनता की नब्ज नहीं पकड़ सके… उन्होंने जनता की कमजोरियों को दूर करने की जगह उनका फायदा उठाना शुरू कर दिया … .. मगर अभी भी कुछ ऐसे सज्जन शक्तिया है जो ग्रामीण क्षेत्रो में काम कर रही है .. मुझे भरोसा है की आज का युवा इसकी जरुरत समझकर सकारात्मक कार्यो में जरुर उतरेगा..

nishamittal के द्वारा
January 26, 2011

निखिल जी,शुभकामनाएं आपको .आपने सही कहा आज तक ह्मारदेश गणतन्त्र बन ही नहीं सका पहले इसको गणतन्त्र बनाएं तभी गणतन्त्र दिवस की सार्थकता है.अच्छा लेख आपका.

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    January 27, 2011

    प्रतिक्रिया के लिए आभार

anilarya के द्वारा
January 26, 2011

जब तक स्वशासन सुशासन में नहीं बदलेगा तब तक गणतंत्र अधूरा ही रहेगा…

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    January 27, 2011

    जी अनिल जी सही कहा अपने

Alka Gupta के द्वारा
January 26, 2011

निखिल जी , ये सत्ताधारी लोग क्या गणतंत्र बनायेंगे सभी अपने अपने स्वार्थ में लीन हैं और और गणतंत्र के नाम पर न जाने क्या क्या करते रहते हैं |इन गुमनामों को जानने की फुर्सत ही कहाँ इन्हें| आज युवा शक्ति , हर भारतीय नागरिक को आगे आकर सही अर्थ में गणतंत्र निर्माण में पूर्ण सहयोग देना होगा तभी हम सच्चा गणतंत्र मनाने के सही अधिकारी होंगे! काश ! आपके इस लेख से लोगों में जोश आ जाए !

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    January 27, 2011

    अलका जी युवा शक्ति का आह्वाहन करना और उन्हें मार्गदर्शन देना ही आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है नहीं तो भारत आधुनिक पूंजीवादी साम्राज्यवाद का शिकार बन जायेगा .. आपकी विस्तृत प्रतिक्रिया के लिए आभारी हु

Amit Dehati के द्वारा
January 26, 2011

बहुत ही तर्कसंगत लेख ……….निखिल जी …. ये रचना देश को एक नई आवाज देगी …… गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामना—— फूलों सा खिला खुशियों से भरा, सुख शांति का अम्बार रहे . गम पास न हो शुख आस न हो .. अधरों पे ख़ुशी का सार रहे . ऐसा ही मन कुछ कहता है , तेरा खुशनुमा संसार रहे ….. कृपया मुझे visit करके अपना विचार व्यक्त करें …… HAPPY REPUBLIC DAY ! शुक्रिया !

    Amit Dehati के द्वारा
    January 26, 2011

    कृपया मुझे visit करके अपना विचार व्यक्त करें …… http://amitdehati.jagranjunction.com HAPPY REPUBLIC DAY ! शुक्रिया !

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    January 27, 2011

    अमित जी आभार .. आपने अपना समय दिया और इन सुन्दर पंक्तियों को यहाँ रखा

alka singh के द्वारा
January 26, 2011

पिछले पाँच सालों में लगभग साठहजार लोंगों ने आत्महत्या की है .आखिर क्या वजह है कि इस देश के लोग जीने से अच्छा मरना बेहतर समझते हैं ?इनमें किसान ,छात्र ,बेरोजगार युवा और महिलाएं शामिल हैं .कुछ और करने से पहले हम अपने मताधिकार का प्रयोग ही ढंग से करना सीख लें यही बहुत बड़ी बात होगी .

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    January 27, 2011

    जी अलका जी ये आंकड़ा तो सही में ये बताता है … की लोकतंत्र में लोक की क्या स्थिति है और तंत्र किनकी सेवा में लगा है… ….सही सुझाव दिया है आपने कम से कम जो हथियार हमारे पास है उसका प्रयोग तो हम करे…

abodhbaalak के द्वारा
January 26, 2011

निखिल जी बहुत ही मन से लिखा लेख, जिसे आपने अपने तथ्यों से … ऐसे ही लिखते रहें http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    January 27, 2011

    आभार आपको इस प्रतिक्रिया के लिए

Shailesh Kumar Pandey के द्वारा
January 26, 2011

आदरनीय निखिल जी, आपने बिलकुल सही लिखा है, गणतंत्र सिर्फ लिख देने से नहीं बनता वास्तविकता ये है की, हम आज तक लिखते ही आ रहे हैं, हमें गणतंत्र पाने के लिए आमूलचूल परिवर्तन लाना होगा नहीं तो हम बस लिखते ही रह जायेंगे |

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    January 27, 2011

    शैलेश जी स्वयं को सक्रिय करना होगा … हम आज इतने विस्तृत मंच पर बाते कर रहे है ये एक शुरुआत ही है अन्यथा अभी तक कहा विचारों का आदान प्रदान इतने विस्तृत रूप में था… परिवर्तन होगा … इसकी शुरुआत इस वैचारिक आन्दोलन से ही होगी ..

January 26, 2011

निखिल जी, सही कहा आपने-’गणतंत्र सिर्फ लिख देने से नहीं बनता .. और सत्ता पूर्ण गणतंत्र बनने नहीं देगी ’.दर-असल जो लोग सत्ता में बॆठे हॆ-उनके स्वार्थ-गणतंत्र के नाम पर नॊटंकी करने में हॆं,पूर्ण गणतंत्र लाने में नहीं.इसलिए पिछले 61 साल से सत्ता का यह खेल लगातार चल रहा हॆ.मेरी एक कविता हॆ-’नया घर’.कुछ पंक्तियां देखिये- नहीं,मेरे दोस्त कुछ नहीं होगा- इस घर की, चंद ईटें बदलने से यदि कुछ – करना चाहते हो- तो पहले – इसकी हर दीवार गिराओ……………….

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    January 27, 2011

    वाह विनोद जी वो कहते है न जो काम हजार पन्नो की किताब नहीं कर पाती उसे कवी की चाँद पंक्तिया सहजता से कह जाती है … बहुत सटीक और अपने आप में पूर्ण अर्थ लिए हुए है आपकी ये पंक्तिया नया घर की… ..आपका आभार

rita singh 'sarjana' के द्वारा
January 26, 2011

निखिल जी , बिलकुल सच कहा “क्योकि गणतंत्र सिर्फ लिख देने से नहीं बनता .. और सत्ता पूर्ण गणतंत्र बनने नहीं देगी .……. ” हमारे देश के हर कोने में यही हालत हैं l जो कोई सच्चे दिल से देश हित में कार्य करते भी हैं तो उसे ट्रांसफर कर दिया जाता है या मार दिया जाता हैं l जिसका ताजा उदहारण कल की ले शहीद यशवंत जी आयल डिपो में छापा मारने गए मगर भ्रष्टचारियों ने जिन्दा जलाकर गणतंत्र दिवस के इस पावन पल को कलंकित कर दिया l अच्छी पोस्ट और गणतंत्र दिवस पर हार्दिक बधाई l

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    January 27, 2011

    रीता जी यशवंत जी की शहादत तो एक बहुत बड़ा कलंक है इस देश की व्यवस्था पर … ये बेहद दुखद घटना थी.. जिसने देश को शर्मशार किया ….कोने कोने से आवाज उठेगी तभी बड़े परिवर्तन होंगे प्रतिक्रिया के लिए आभार


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