सर झुकाकर आसमा को देखिये ...........

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क्यों न हम सब लाल चौक चले....?

Posted On: 25 Jan, 2011 पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

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सरकार से लेकर तमाम चैनल आज लाल चौक को युद्ध का मैदान और तिरंगा यात्रा को एक राष्ट्रीय अपराध घोषित करने पर तुले है ,,, सारे देश को ये बताया जा रहा है की अगर लाल चौक पर तिरंगा फहर गया तो आफत आ जाएगी ..तमाम बुद्धिजीवी, पक्ष और विपक्ष के नेता ये सवाल पूछ रहे है की लाल चौक ही क्यों….? उन्हें ये बताना चाहिए की लाल चौक भी क्या नहीं??

आज शाम की एक छोटी सी बातचीत ने मुझे ये लेख लिखने पर मजबूर कर दिया.. आज शाम को शहर में खादी ग्राम उद्योग की प्रदर्शनी में एक स्टाल पर गया वह कश्मीर के दो स्टाल लगे थे ..वहा डुरु(अनंतनाग ) और कुपवाड़ा जिलो के 4 युवक थे जिनकी उम्र 25 -30 वर्ष के बीच थी . दो के नाम याद है जिनसे बात हुई . जावेद और इकबाल , जावेद 12 वी पास और और इकबाल स्नातक था ..बातो बातो में परिचय हुआ … उनसे बाते करने में मुझे जितना अपनापन लगा उतना ही आश्चर्य हुआ ..क्योकि जिन प्रश्नों को मै बहुत संकोच करते हुए पूछ रहा था उनका जवाब वे उतने ही बेबाक अंदाज में दे रहे थे ..उस बातचीत को आपके सामने रखना चाहता हु …

……………………………………………………………………………………

प्रश्न- कश्मीर में तैनात सुरक्षा बल वहा की आम जनता को परेशान करते है. क्या अलगाववादियों का ये कहना सही है आम लोग के प्रति उनका व्यवहार कैसा है..?

जावेद- 1999 तक ऐसा था की हम सेना से भी परेशान थे और आतंकवादियो से भी पर सन २००० के बाद स्थिति में बहुत बदलाव आया है सेना का व्यवहार पहले से बेहतर हुआ है और वे अक्सर सहयोग भी करते है. परेशानी तो राजनीती से है नेता लोग अपने लाभ के लिए दंगा करवाते है ..

………………………………….

प्रश्नकश्मीर में कितने जिलो में लोग अलग होना चाहते है भारत से ??

जावेद– बहुत कम लोग है … मान लीजिये की आपके प्रदेश में 70 जिले है तो उसमे एक जिले से भी कम लोग है .. वहा के ३-४ जिलो में कुछ थोड़े से लोग है जो अलगाववादियों का झंडा उठाये है. वही लोग पत्थर फेकते है दंगा करते है और परेशानी आम लोगो को उठानी पड़ती है…

………………………………..

प्रश्न -उम्र अब्दुल्ला की सरकार का काम कैसा है?

इकबालभाई जी उससे बढ़िया कांग्रेस पी डी पी की सरकार थी .. इस सरकार से तो ये हंगामा करने वाले डरते ही नहीं नहीं है .. ये तो बहुत कमजोर है… आम आदमी के लिए ये कुछ भी नहीं कर रहे … जो नेता और उनके लोग है उनके पास तो नोट आ रहे है और हम जैसे लोग बस परेशान होते है..

…………………………………

प्रश्न२६ जनवरी को लाल चौक पर तिरंगा झंडा फहराने पर जो विवाद है उसके बारे में पता है?..

(सभी एक दुसरे को देख कर हसने लगे….. और बोले…. भाई जी २६ को हम तो लखनऊ में रहेंगे यहाँ से स्टाल वहा जायेंगे …. इस बार में हमने सुना है इसमें क्या है तिरंगा तो फहरा ही सकते है इसमें झगडा कैसा है …वहा तो उमर अब्दुल्ला को ही जाकर तिरंगा फहरा देना चाहिए मामला ही ख़तम हो जाता . )

………………………………………………………………………………………………………..

बस मुझे जवाब मिल गया था ..क्योकि किसी जगह की सही स्थिति की जानकारी वहा के बुद्धिजीवी विचारक नहीं बता सकते बल्कि वहा की खुली सडको में जान हथेली पर लेकर चलने वाला आम इंसान ही बता सकता है. और वह इंसान कहता है की उसे खतरा तिरंगा यात्रा से नहीं ,, देश की फ़ौज से नहीं बल्कि उन मुट्ठी भर पत्थर फेक कर बिलों में घुस जाने वाले गुंडों से है , अलगाववादी जहर उगलते आस्तीन के सापो से है और उन्हें वोट बैंक के लिए इस्तेमाल करते सत्ता के दलालों से है और सबसे बढ़कर उस नपुंसक सरकार से है जो सारे देश ,सारी दुनिया को चीख चीख कर बता रही है कश्मीर एक विवादित क्षेत्र है कश्मीरी हमारे नहीं है हम उनके नहीं है.... भारत सरकार और कश्मीर की सरकार को आगे आकर इस यात्रा का समर्थन करना चाहिए था .. उन्हें सामने आकर अलगाववादियों , पत्थरबाज गुंडों , और पकिस्तान को ये बतना चाहिए था की कश्मीर के मुद्दे पर पूरा देश एक है.. आखिर क्यों सरकार ये तर्क गढ़ रही है की इस यात्रा से कश्मीर में फिर पत्थर बरसेंगे आतंवादी हावी हो जायेंगे …ये सरकार कुछ अलगाववादियों के डर से पुरे देश के सामने कश्मीर की, वहा की जनता की गलत छवि पेश कर रही है ….कश्मीरियों के मन में सेना के प्रति सकारात्मक भाव जगाने उनका मनोबल बढ़ाने की जगह अलगाववादियों और पत्थरबाजो के प्रति डर बैठा रही है ..…. क्या ये सही है की उनके डर से हम चुप रहेंगे और उमर अब्दुल्ला जैसो को ये कहने देंगे की कश्मीर भारत का अंग नहीं …… एकदम नहीं अब मौन नहीं गर्जना होगी .. इस देश के हर व्यक्ति को लाल चौक जाना चाहिए ..1993 की घटना के लिए पुरे कश्मीर से खेद प्रकट करे और वहा कश्मीरियों के साथ मिलकर तिरंगा फहराए और जवाब दे बिलों में छुपे पत्थर बाजो को , भारत टूटने का सपना देखते पाकिस्तान और कश्मीर के अलगाववादी सियारों को ....

animated indian flag tiranga india


…. गणतंत्र दिवस की सभी को शुभकामनाये ……..आइये मानसिक यात्रा पर ही हम सभी इस वर्ष लाल चौक चले …… ये यात्रा राजनैतिक ही सही . मगर जरुरी है ….

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31 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

डा.. एस शंकर सिंह के द्वारा
January 31, 2011

प्रिय निखिल जी, सप्रेम नमस्कार. आपने दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया है. सरकार समझती है कि लाल चौक पर तिरंगा न फहराने देकर वह देश के सभी मुसलमानों का दिल जीत लेगी. इस प्रकार उसका वोट बैंक पक्का हो जाएगा. सरकार शायद सभी मुसलमानों को अलगाववादी समझती है. अलगाववादियों के सामने घुटने टेक कर वह सभी मुसलमानों को खुश कर लेगी. अगर किसी अच्छे उद्देश्य के लिए राजनीति की जाती है तो यह स्वागत योग्य है.

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    February 1, 2011

    आदरणीय डा साहब …अभिवादन…… मै एक बात नहीं समझ पाता हु की …आखिर कांग्रेस सरकार और कुछ और तथाकथित वर्ग विशेष का विशेष ख़याल रखने वाली पार्टिया अपने अन्दर नहीं झाकती क्या …मै भाजपा से ज्यादा सांप्रदायिक इन्हें मानता हु ये तो साफ़ साफ़ बंटवारे की और भारतीय समाज को दो भागो में बांटने की शाजिश रची जा रही है …. क्या कांग्रेस ने सोचा की लाल चौक और तिरंगे पर इस हद तक जाकर विरोध करने का क्या परिणाम होगा और अंतर्राष्ट्रीय मंचो पर देश की क्या छवि बनेगी… इस देश के प्रतिनिधि किसी हिस्से में राष्ट्रध्वज फहराने पर ही एकमत नहीं हो रहे…. दुखद किन्तु सत्य ही की इस प्रकरण से कश्मीर में अलगाववाद को गुणात्मक मजबूती मिलेगी… और अंतर्राष्ट्रीय मंचो में कश्मीर भारत का नहीं बल्कि भारत में भी एक विवादित मुद्दा माना जायेगा .. मैंने कोई काल्पनिक कथा नहीं लिखी … ये वास्तविक बात चित के अंश थे जो एक आम कश्मीरी से हुई थी और मै इस नतीजे पर पंहुचा हु की हमारी सरकारे कश्मीर पर पुरे राष्ट्र के सामने एक भ्रमजाल सा बनाये हुए है …… आपकी अनमोल प्रतिक्रिया के लिए आभारी हु

mohd tasavvar के द्वारा
January 29, 2011

इस साल से पहले गए हो कभी लाल चौक , क्या अब से पहले वह कभी रेपुब्लीक डे नहीं मनाया गया, क्यों इन हरामी नेताओ के चक्कर में आते हो , पोलिटिकल उल्लू सीधा किया जाता है इस तरह के मुद्दे उठाकर. भारत के लोग कब समझेगे इन नेताओ का कमीनापन.

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    January 31, 2011

    मित्र आपका आक्रोश अनुचित नहीं है .. राजनैतिक लाभ के लिए ऐसे बहुत से काम नेताओं द्वारा किये जाते है ..लेकिन यह एक बात आप ही बताये जब लाल चौक पर अलगावादी पकिस्तान का झंडा फहरा देते है तब कोई इतना बड़ा मुद्दा क्यों नहीं बनता .. ये तिरंगा यात्रा राजनैतिक थी तो राजनैतिक ही सही ..पुरे देश को हर पार्टी को इसमें शामिल होना चाहिए था ताकि अलगाववादियों को ये पता चले की पूरा देश इस मुद्दे पर एक मत है… इस तरह के विरोध पर तो पूरी दुनिया में एक गलत सन्देश गया है की कश्मीर मुद्दे पर भारत के ही लोग विभाजित है…. क्या ये ठीक है हमने खुद ही कश्मीर को विवादित बता कर पकिस्तान को एक मौका दे दिया है …अधिकांश लोग कह रहे है की लाल चौक क्यों… मई कहता हु की लाल चौक भी क्यों नहीं … आखिर तिरंगा फहराना है कोई खाई तो नहीं बनाना है ……… आपने पढ़कर प्रतिक्रिया दी इसके लिए आभार

sanjeev sharma के द्वारा
January 27, 2011

आपने आवाम के मर्म को बिलकुल सही पकड़ा है.वास्तव में जनता को तो कहीं पर कोई परेशानी नहीं है जो भी दिक्कतें हैं वे नेताओं की दें हैं.मैंने भी गणतंत्र पर कुछ लिखा है एक नज़र मार लीजिये… http://www.jugaali.blogspot.com

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    January 27, 2011

    संजीव जी आपकी अनमोल प्रतिक्रिया के लिए आभारी हु ..

shailandra singh के द्वारा
January 26, 2011

nikhil jee badiyaa aalekh badhai ho par laal chowk hee kyo? shree nagar yaa anya sthaan kyo nahee. jab sarkaar bharat ke sambidhan se chaltee hai to yeh haq sirf rajya paal ko hai naa ki kishee rajnetic partees ko. kyaa bhartiyaa netaa jammu kashmeer nahee jaate hai . kyaa wahaan par tainaat bhartiyaa sipaahee nahee hai? to fir dar kaisaa. rahee baat raajneet kee to abdulla koi naye nahee hai yeh purane nda ghatak hai? ab koi yeh kahe ki manneey rashrapati kee jagah koi rajnetic partee ke neta jhanda pahraayenge to kaisaa lagegaa? mubaarak ab yeh mudda khatm ho gaya kiyo ki abdulla ne dono netao se kahaa hai ki shreenagar me aakar jhanda phahrado swaagat hai. dono hee bharat ke ang hai. badiyaa hai mubarak ho.

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    January 27, 2011

    आदरणीय शैलेन्द्र जी … आपकी बात से मै सहमत हु .. लेकिन लाल चौक पर १९९३ की घटना के बाद एक नकारात्मक सन्देश भारतीय सेना और सरकार के विरुद्ध कश्मीरी जनमानस में गया जिसे इन अलगाववादियों ने भुनाया है और वह की अवाम को भारत के खिलाफ भड़काने में खूब प्रयोग किया है… आपको जानकारी होगी की उसी लाल चौक पर पकिस्तान का झन्डा ये अलगावादी फहरा चुके है …………. हम लाल चौक को उस गलती के प्रायश्चित के रूप में ले सकते थे .. सरकार के लोग और भाजपा के लोग वह जाते कश्मीरी अवाम से उस घटना पर खेद प्रकट करते और तिरंगा फहरा कर उन मुट्ठी भर सियारों को ये सन्देश देते की कश्मीर पर कोई विवाद नहीं है वह पूरी तरह हमारा है और हम उसके है … सवाल यही है की श्रीनगर ठीक है … तो लाल चौक पर क्यों नहीं..?.. खैर ये मामला शांत हो गया पर सरकार ने जो रवैया अपनाया था इसपर वह शर्मनाक ही कहा जायेगा.. आपकी प्रतिक्रिया के लिए आभारी हु

Alka Gupta के द्वारा
January 25, 2011

निखिल जी , इस तिरंगे के पीछे कितने ही वीर सपूतों की रक्त गाथाये जुडी हैं तब हमें तिरंगा मिला जिसे पूर्ण सम्मान के साथ फहराया जाना चाहिए इसके साथ ही राजनीति की जा रही….. आखिर कश्मीर भी तो भारत का ही अंग है……..मुट्ठीभर अलगाव वादियों के डर से केवल….. नहीं जब देश एक है तो तिरंगा अवश्य फहराया जाना ही चाहिए……इस lekh के माध्यम से और आवाजें भी बुलंद हों……..! अच्छे लेख के लिए बधाई !

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    January 25, 2011

    अलका जी इस अनमोल प्रतिक्रिया के लिए आभार प्रकट करता हु ….प्रयास वही होना चाहिए जैसा आपने कहा .. मुट्ठी भर अलगावादी गुंडों के डर से देश की आवाज को दबाना लोकतंत्र नहीं तानाशाही है ..और हम सभी को इसका विरोध करना चाहिए

Dharmesh Tiwari के द्वारा
January 25, 2011

निखिल जी भाजपा की लाल चौक पर तिरंगा फहराने वाली यात्रा से काफी ख़ुशी हुई थी लेकिन ये सरकार पता नहीं क्या दिखाना चाहती है,आपने बढ़िया आह्वाहन किया है,धन्यवाद!

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    January 25, 2011

    धर्मेश जी इस आह्वाहन को बल मिलता रहेगा जबतक आप जैसे राष्ट्रवादी युवा है …. बस ये एकता बनी रहे … धन्यवाद

roshni के द्वारा
January 25, 2011

निखिल जी, उमर अब्दुल्ला को ही जाकर तिरंगा फहरा देना चाहिए मामला ही ख़तम हो जाता .. मगर ये लोग विवाद खतम करना ही नहीं चाहते उमर अब्दुला ने ही सबसे पहले कहा था की लाल चौक पे तिरंगा फेहराया तो अच्छा नहीं होगा ….. क्या उमर अब्धुला के लिए भारत का तिरंगा कोई महत्व नहीं रखता , भारत के होते हुए वोह इसका सम्मान नहीं करते , तो फिर यहाँ कर ही क्या रहे है …….. हर हाल में २६ जनवरी को वहां तिरंगा लहराया ही जाना चहिये….. आप को भी गणतंत्र दिवस की शुभकामनाये

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    January 25, 2011

    रौशनी जी .. जब भारत की सरकार स्वयं तिरंगे को लेकर ऐसा व्यवहार कर रही है मानो तिरंगा फहराना कोई राष्ट्रद्रोह हो तो क्या कहा जाये … उमर अब्दुल्ला कोई नेता नहीं है वे तो बस अपने बाप दादा की जागीर समझ कर वह के राजा बने हुए है …मुश्किल नहीं है की कल अगर नक्सली कहे की हमारे इलाको में तिरंगा नहीं फह्रेगा तो सरकार उसके लिए भी तैयार हो जाये… विस्तृत प्रतिक्रिया के लिए आभार

Kamlesh Verma के द्वारा
January 25, 2011

कश्मीर में ध्वजारोहण, २६ जनवरी, २०११ ये मानते हुये कि ये एक राजनीतिक ड्रामा है, राष्ट्रीय अस्मिता से जुड़ा हुआ है. जब हम राष्ट्र को हीं मान नहीं देंगे, तो अंतर्राष्ट्रीय मापदंडो को मानने का तमगा लेकर के क्या करेंगे. वर्तमान सत्तासीन लोग कभी नहीं चाहेंगे कि वहां ध्वजारोहण हो. लेकिन उस प्रदेश में मौजूद ध्वजारोहण के समर्थक अगर उस दिन चूप रह गए तो भारतीय राष्ट्र पर और दाग नज़र आएगा.

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    January 25, 2011

    कमलेश जी .. पूरी दुनिया के सामने भरतीय राष्ट्र पर दाग तो कांग्रेस पार्टी ने ही लगा दिया … इसे विवादित बना कर और कश्मीर को असंवेदनशील राज्य घोषित करके … गनीमत ये है की उन्होंने उसे गैर राष्ट्र घोषित नहीं किया है …. मुट्ठी भर पत्थर बाजो से पुरे देश को भयभीत करने का ये काम अक्षम्य है … ये राजनितिक ड्रामा भी हो तो भी सरकार को पुरे देश के सामने ऐसा दिखाना चाहिए था की कश्मीर में केवल भारतीयों है….. लेकिन उन्होंने तो कश्मीर को ही विवादित बताकर पाकिस्तान का काम आसान कर दिया है

Amit kr Gupta, Hajipur के द्वारा
January 25, 2011

निखिल जी नमस्कार ,आपने काफी ही अच्छी लेख लिखा हैं. आपने लेख में कश्मीरी युवको की चर्चा कर अपने इस लेख बल दिया हैं. उनके बातो से साफ जाहिर होता हैं. की कश्मीर में आम जनता सैनिक से नहीं बल्कि पाकिस्तान परस्त अलागवादियो से परेशान हैं. अब इससे तो स्पष्ट हैं की सैनिक कानून में किसी प्रकार की संशोधन की आवश्यकता नहीं हैं. जहा तक तिरंगे फहराने की बात हैं तो लाल चौक पर तिरंगे क्यूँ नहीं फहराए जा सकते हैं. अगर भाजपा नहीं तो मुख्यमंत्री फहराए न .कश्मीर भारत का अटूट हिस्सा हैं और रहेगा. यह बात अल्गोवादियो को मन लेनी चाहिए.

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    January 25, 2011

    अमित जी … उन कश्मीरियों से आधे घंटे तक चली चर्चा के बाद ही मैंने इस विषय पर लिखा है और कश्मीर पर एक ऐसी घटिया राजनीति हो रही है की सरकार भारतकी अवाम को भी गुमराह कर रही है … और सही बात नहीं रख रही है … ये प्रचार करना की वहा तिरंगा फहराने से अशांति हो जाएगी कितना शर्मनाक है ..पुरे देश के लिए …. और ये नेता तो बेशर्मी की हद तक बेशर्म है इन्हें क्या कहे… आपकी अनमोल प्रतिक्रिया के लिए आभार

allrounder के द्वारा
January 25, 2011

निखिल जी, २६ जनवरी के पावन पर्व पर देश भक्ति से ओत प्रोत लेख के लिए बधाई! जबकि सारा देश हमारा है तो हम लाल चौक पर तिरंगा क्यों न लहरायें और जो इसका विरोध करे वे देश द्रोही ही कहे जायेंगे !

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    January 25, 2011

    सचिन जी सही कहा है इसका विरोध करने वालो को देशद्रोही ही कहना चाहिए … प्रतिक्रिया के लिए आभार

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    January 25, 2011

    प्रिय अमित आपकी प्रतिक्रिया पढ़कर बहुत हर्ष हुआ .. यकीं मानिए ऐसे बहुत से युवा है जो ऐसी सोच रखते है लेकिन उन्हें वह प्लेटफार्म नहीं मिल रहा है… मगर मित्र राष्ट्रवादी विचारो का ये वैचारिक आन्दोलन ही वह आधार देगा जिसपर हम आप जैसे राष्ट्रवादी योद्धा एक दुसरे से जुड़कर एक बड़ा आन्दोलन बन सकते है और अपने सपनो का भारत बना सकते है .. इस सम्बन्ध में आपसे जरुर बात करूँगा … आपना साथ और ये जस्बा बनाये रखे … हो सकता है की यह मंच ही वह ताकत बन जाये जो इन अवसरवादियों के साम्राज्य को तिनके की तरह उदा दे… अनमोल प्रतिक्रिया है मित्र आपका आभार ..

ashutosh के द्वारा
January 25, 2011

mere mitra aapne bilkul sahi farmaaya hai ,asal me saara kusoor in naapak netaaon ka aur is darpok sarkaar ka hi hai . gajab hai ki humko humare desh me humara hi tiranga fahrane par mushkilon ka saamna karna pad raha hai.

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    January 25, 2011

    आशुतोष जी .. सही शब्द आपने प्रयोग किया है ये नेता वास्तव में नापाक ही है .. एक तरफ जहा ये देश को लूट कर विदेशो को अमीर कर रहे है ..तो दूसरी तरफ अपने देश को ही तरह तरह के डर दिखा कर एक तरह्ह के भ्रम जाल में फ़साये हुए है …. तिरंगे के साथ ये राजनीती शर्मनाक है /….प्रतिक्रिया के लिए आभार

rajeev dubey के द्वारा
January 25, 2011

बड़ा अच्छा लगा आपका लेख. यह सच है. कांग्रेस देश को बांटे रखना चाहती है जिससे उसका शासन चलता रहे…यह लोग देश को गरीब बनाये रखना चाहते हैं जिससे गरीब लोग इन्हें मालिक मान कर पूजते रहें और यह लोग कृपा करके कभी कभी गरीबों को दान देते रहें…कांग्रेस को देश की सत्ता से हटाना होगा. तभी देश आगे बढेगा .

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    January 25, 2011

    राजीव जी सरकार के इस मकसद को हम कभी कामयाब नहीं होने देंगे … कश्मीर इस देश के लोगो के लिए आत्मसम्मान का प्रतिक है और इसके लिए जरुरत पड़ी तो आज भाजपा और कल पूरा देश कश्मीर जायेगा ,, प्रतिक्रिया के लिए आभार

Shailesh Kumar Pandey के द्वारा
January 25, 2011

आदरणीय निखिल जी ! सादर अभिवादन ! आप ने बिलकुल सही प्रश्न उठाया है और उचित आह्वाहन किया है ………. हम सब लाल चौक चलना चाहिए … क्योंकि वर्तमान सरकार का रवैया निंदनीय है, क्योंकि ये हमेश झुकाने का प्रस्ताव रखती रही है, अगर हम झुकते ही रहे हो हमें बार बार झुकाया जाएगा, हर बात के लिए झुकाया जाएगा | आज लाल चौक न जाओ कल दिल्ली न जाओ, परसों अपने घर कार्यालय में झण्डा मत फहराओ .. क्या है ये सब, ये लोग वोट बैंक की राजनीति में लगे हुए हैं, इनको भविष्य से कुछ नहीं लेना, या वहां तक सोच ही नहीं पा रहे हैं …. और अलगाववादी शक्तियों से कब तक भागते रहेंगे ? हमें उनके सामने आना ही होगा .. “शठे शाठ्यम समाचरेत” अच्छे लेख के लिए आभार

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    January 25, 2011

    प्रिय मित्र शैलेश जी … सही कहा आपने कल को सरकार कहेगी की नक्सलियों का इलाका अरक्षित है संवेदनशील है वहा भी मत जाओ .. सरकार खुद ही विभाजन के बीज बो रही है ..देश को गुमराह कर रही है… इस मुद्दे पर कोर्ट को सामने आना चाहिए था .. आखिर देश के किसी भी कोने में तिरंगा फहराने की व्यवस्था सरकार को करनी चाहिए न की उसे रोकने की .. प्रतिक्रिया के लिए आभारी हु

राहुल के द्वारा
January 25, 2011

वाकई काग्रेस की ऐसे झुकना देश के लिए शर्मनाक है…अगर आज अलगाववादियों के आगे झुक कर यह निठल्ली और लाचार सरकार लाल चौक पर झंडा फहराने से रोक रही है तो संभव है कल तो कुछ अलगावादियों के दबाव में सोनिया और मनमोहन सिंह लाल किला पर भी झंडा नही फहराएंगा… मैं आपके विचारों से सहमत हू….. मुझे तो लगता है आज अमत अब्दुला और कश्मीर के अलगावादियों की ताकत भारत के प्रधानमंत्री से भी ज्यादा है…न जानें कैसे फोब्स पत्रिका ने सोनिया को सबसे शक्तिशाली महिला की लिस्ट में शामिल किया…… ऐसी कमजोर सरकार न आज से पहले कहीं देखी थी और उम्मीद है न ही आज के बाद्फ कभी आएंगी. भ्रष्टाचार इन लोगों से स6भलता नहीं, महंगाई कम नहीं होती. नक्सलवाद और अलगाववाद भी बढ+ रहा है..यार ये सरकार सिर्फ नाम की है…..कुछ नहीं हो सकता भगवान इस सरकार का कार्यकाल जल्दी खत्म कर…

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    January 25, 2011

    मित्र राहुल जी ऐसे लोग सत्ता संभाले हुए है जिनके तर्क सुनकर सर पीट लेगा आदमी …. ये शांति की आड़ में आतंकवाद को मजबूत करने का खेल खेल रहे है .. बेहद शर्मनाक है ये …. इसपर प्रतिवाद करने में आपकी आवाज शामिल हुई आप का आभार…

    vidhayasagar के द्वारा
    January 28, 2011

    THANKS


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