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हिंदी के साथ घटिया मजाक करता जागरण

Posted On: 28 Nov, 2010 Others में

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१..फ्राईडे को एंटी ओबेसिटी डे के मौके पर वीएलसीसी में फ्री हेल्थ कैम्प ओर्गेनाइज किया गया. इस कैम्प में ओबेसिटी के रीजन्स के साथ साथ उसके हार्मफुल इफेक्ट्स और उससे निज़ात पाने के बारे में लोगो को अवेअर किया गया .

२.ओलम्पिक और वर्ल्ड चैम्पियनशिप के ब्रांज मेडल विनर विजेंद्र सिंह ने वन साइडेड फाइनल में उज्बेकिस्तान के अतोएव अबोस को 7-0 से हराकर बोक्सिंग के 75 केजी वेट कैटेगरी में गोल्ड मेडल जीता…..

…………………………………………………………………………………………………………

……….. डरिये नहीं मै समाचार वाचन करने नहीं जा रहा…. जागरण के आई नेक्स्ट की खबरों की भाषा की तरफ ध्यान दिलाना चाहता हु.... हम सब जानते है की हिंदी पत्रकारिता की दुनिया में दैनिक जागरण की क्या प्रतिष्ठा है ..मै स्वयं  पिछले २५ सालो से जबसे पढना शुरू किया दैनिक जागरण का नियमित पाठक रहा हु… और इसकी समाचार शैली ,,भाषा व स्तर के कारन कभी दूसरा समाचार पत्र लेने का प्रयास भी नहीं किया .

मगर कुछ दिनों से आई नेक्स्ट की भाषा शैली देख कर बेहद दुःख हुआ . दैनिक जागरण ने नयेपन की लालच में हिंदी के साथ कितना बेहूदा मजाक कर दिया है ...समाचार पत्र को बेचने के लिए क्या ऐसे प्रयोग हिंदी के लिए अहितकारी नहीं होंगे .? हम सभी जानते है की दैनिक जागरण की पाठको की संख्या करोणों में है .. ये भाषा कई लोगो को ठीक लग सकती है ..मगर इससे उस राष्ट्रभाषा की लडाई का क्या होगा जिसका एक बहुत बड़ा आधार जागरण है..?

..जागरण अगर आई नेक्स्ट को अंग्रेजी में निकलता तो मुझे बुरा नहीं लगता पर ये खिचड़ी बना कर हिंदी और अंग्रेजी दोनों के साथ सस्ता मजाक करना क्या जागरण को शोभा देता है….?

क्या हम ये मान ले की जागरण ने भी आधुनिकता का चोला ओढ़ लिया है और इस दौड़ में वह हिंगलिश का प्रयोग कर उन पश्चिम से आधुनिकता सीखने वाले युवाओं को अपने से जोड़ना चाहता है जिन्हें कई बार तो उन शब्दों के मतलब भी पता नहीं होते जो वे बोल जाते है और जिन्हें हम अक्सर टेलीविजन में बीप के अन्दर सिर्फ समझने की कोशिश करते है .?

………………………………………………………………………………………………………….

ये जिज्ञासावश लिखा गया लेख है क्योकि मै ऐसी खिचड़ी भाषा और हिंदी के साथ ऐसा मजाक करने की वजह समझ नहीं प़ा रहा …अतः आप सभी पाठको से इसपर विचार रखने का अनुरोध करता हु… जागरण के इस प्रयोग को आप किस तरह लेते है….????

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33 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Aakash Tiwaari के द्वारा
November 30, 2010

निखिल जी, मै आपकी बातों को माता हूँ मगर क्या आपकी बात उतनी सही है जितना उसे समझा जा रहा है….मेरी बात को जरा समझिएगा……देखिये i Next तो पूरा का पूरा नए जनरेसन के लिए है…अब नए के साथ कदम से कदम तो मिलाना ही पड़ेगा….इससे अंग्रेजी में कमजोर लोगों को जरूर कुछ फायदा मिलता होगा.. मगर अगर इसे भाषा का निरादर आपसब समझते है तो अलग बात है…. आकाश तिवारी

    nikhil pandey के द्वारा
    December 1, 2010

    प्रिय आकाश जी ..आपकी भावनाओं की क़द्र करता हु..और प्रतिक्रिया के लिए आभार प्रकट करते हुए सबसे पहले ये कहना चाहूँगा की भाषा आदर और निरादर की सीमा से परे होती है यहाँ आदर सम्मान की बात नहीं है … लेकिन हमाप और आने वाली पीढ़िय ही वो नेक्स्ट है जिसकी बाते हो रही है… मुझे हैरत है आपने इसका समर्थन की जबकि आप स्वयं एक बेहतरीन कवी और गजलकार है… क्या आप अपनी नै गजल को इस रूप में देखना पसंद करेंगे……?? हसीन मोमेंट्स की पार्टी मना लीजिये, अपनों की नफरत भुला दीजिये, किसी भी मोड़ पर स्टॉप हो जाए ये लाइफ अगर, दो ड्रॉप वाइन की लगा लीजिये.. मुझे क्षमा करे मेरा उद्देश्य केवल ये समझाना था की भाषा के साथ ऐसे प्रयोगों से दूरगामी प्रभाव पड़ते है .. मुश्किल नहीं है की कल को ऐसे प्रयोग कुछ आधुनिक उत्साही लोग करे…और आपका हिंदी साहित्य इन नए प्रयोगों में अपनी खूबसूरती खो दे …. कोई भी पाठक आपकी गजल की पंक्तियों को इस रूप में पढ़कर आनंद नहीं पा सकता ……इससे अंग्रेजी में कमजोर लोग अपने ग्रामर को जितना आता होगा वो भी तबाह कर लेंगे और हिंदी का जो स्वरुप बिगड़ेगा सो …… अलग….. आपसे विनम्र निवेदन है की इसपर एक बार पुनः विचार करे….

    Aakash Tiwaari के द्वारा
    December 2, 2010

    वाह पांडे जी वाह………..क्या कविता बना डाली आपने मेरी इकदम आधुनिक……बहुत खूब चलिए आपने बहुत अच्छे से समझा दिया मुझको और मुझ नादान और अल्पज्ञानी को आपकी बात बहुत ही अच्छे से समझ आ गयी…धन्यवाद…….

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    December 3, 2010

    प्रिय आकाश जी .शायद आपको मेरी बात बुरी लगी ….संभवतः मुझे उदाहरण कुछ और लेना चाहिए था…. मगर चातक जी और आप स्वयं बेहतरीन लेखक है और और आप जानते है की इस तरह के प्रयोगों से बाजार का तो भला हो जायेगा ..लेकिन हिंदी के साथ ये एक तरह का मजाक ही कहा जायेगा ..अंग्रेजी सिखने सिखाने का तर्क देना यहाँ उचित नहीं लगता इसके और भी तरीके हो सकते है ..किन्तु यदि आप को मेरी बात गलत लगी हो तो आप मुझे अल्पज्ञानी और बुद्धिहीन समझ कर क्षमा करे ..मेरा उद्देश्य आपको कष्ट पहुचना नहीं था आपकी कविता का प्रयोग मैंने इसीलिए किया ताकि आप समझ सके की ऐसी प्रयोगधर्मिता से हमारे साहित्य का सत्यानाश हो जायेगा…..कृपा करके इसके दूर गामी परिणामो पर ध्यान दे

    Aakash Tiwaari के द्वारा
    December 6, 2010

    क्या निखिल जी, आपने तो मेरी बात को मेरी बात से इकदम उल्टा ही समझ लिया..मैंने तो आपकी बात मान लिया फिर क्षमा मांगने वाली कोई बात ही नहीं..आपने बिलकुल सही किया मेरी कविता के रूप में मुझे उदाहरण देकर..वर्ना शायद मै इतने अच्छे से न समझ पाता.. आकाश तिवारी

Amit kr Gupta के द्वारा
November 30, 2010

निखिल जी नमस्कार , हिंदी के साथ तो यह तो अन्याय हैं . हिंदी हमारी राष्ट्र सह सम्पर्क भाषा हैं. आप मेरे लेख पढने के लिए इस add पर जा सकते हैं,. http://www.amitkrgupta.jagranjunction.com

    nikhil के द्वारा
    November 30, 2010

    अमित जी अनमोल प्रतिक्रिया हेतु धन्यवाद … आपके लेख मै जरुर पढूंगा

K M Mishra के द्वारा
November 29, 2010

पाण्डेय जी नमस्कार । हिंग्लीश के प्रयोग को मैं भी उचित नहीं मानता क्योंकि खिचड़ी भाषा से दोनो ही भाषाओं के साथ मजाक होता है ।

    nikhil के द्वारा
    November 30, 2010

    भ्राता श्री प्रणाम ……..मुझे भी अंग्रेजी से शिकायत नहीं है पर ये खिचड़ी नहीं पचती और दुर्भाग्य रूप से ऐसा जागरण द्वारा हो रहा है….

allrounder के द्वारा
November 29, 2010

निखिल भाई आपने सही कहा, बदलते वक्त के साथ हिंदी के साथ जो छेड़छाड़ की जा रही है, उससे हिंदी की जो mithaas है uska aanand kuchh kam hota najar aa raha है !

    nikhil के द्वारा
    November 30, 2010

    सचिन जी जागरण का ऐसा करना ही तो ज्यादा दुर्भाग्यपूर्ण है

R K KHURANA के द्वारा
November 29, 2010

मेरा जागरण जंक्शन टीम से भी निवेदन है की इस लेख के बारे में वो अपना मत रखे और स्तिथि को स्पष्ट करें ! अति धन्यवादी हूँगा . ! राम कृष्ण खुराना

    nikhil के द्वारा
    November 30, 2010

    अभिवादन स्वीकार करे मुझे भी यही उम्मीद है की जागरण को इसपर अपनी बात kahni चाहिए मगर अभी तक कोई नहीं आया

R K KHURANA के द्वारा
November 29, 2010

प्रिय निखिल जी, आपकी पीड़ा सही है ! परन्तु जैसे की चातक जी ने कहा है अगर वह सत्य है तो यह एक अच्छा प्रयास है ! मैं भी इसे पढना चाहूँगा ! क्योंकि विदेशी भाषा में मेरा हाथ भी तंग है ! फिर जहाँ तक हिंदी के मजाक उड़ाने की बात है तो हमरे नेता और सरकारी संस्थाए ये काम बखूबी निभा रही है ! इसी सन्दर्भ में मेरी कविता इसी मंच पर “हम हिंदी दिवस हैं मनाते” आई थी ! शायद अपने पढ़ी होगी ! यहाँ आपको मैं एक मजेदार बात बताना चाहता हूँ .! 1966 में मुझे बनारस हिन्दू विश्यविद्यालय (BHU )में एडमिशन मिला था ! मैं बस स्टैंड से एक रिक्शा पर बैठा और रिक्शा वाले को विश्यविद्यालय चलने को कहा ! वो रिक्शा वाला लगभा एक घंटा तक मुझे घुमाता रहा ! मैंने हार कर उससे पूछा _ क्या यूनिवर्सिटी इतनी दूर है ! तो रिक्शा वाले ने हैरान होकर पूछा _ क्या आपको यूनिवर्सिटी जाना है ? जब मैंने हां कहा तो रिक्शा वाला बोला आप मुझे पहले ही हिंदी में बता देते की आपको यूनिवर्सिटी जाना है मैं तो वह से तीन बार गुजर चूका हूँ ! आप तो इंग्लिश में विश्यविद्यालय-विश्यविद्यालय कह रहे थे इसी लिए मैं आपको घुमाता रहा ! आशा है आप मेरा आशय समझ गे होंगे ! राम कृष्ण खुराना

    nikhil के द्वारा
    November 30, 2010

    वाह क्या मजेदार और सर चकराने वाली घटना है ,,,,,, और सबसे बड़ी बात मई अत्यंत विनम्रता से बताना चाहूँगा ,,, की उपरोक्त उदाहरण 27 नवम्बर की आई नेक्स्ट हुबहू लिया है मैंने एक भी शब्द अलग से नहीं है…. विस्तृत प्रतिक्रिया के लिए आभार

Dharmesh Tiwari के द्वारा
November 29, 2010

निखिल जी नमस्ते,वैसे में भी अभी तक जागरण के इस नए पत्र(आई नेक्स्ट) पर नजर नहीं डाल पाया हूँ हाँ इसके बारे में सुना जरुर है,…………..और जैसा की आपने ऊपर अपने लेख में इस पत्र के बारे में दर्शाया है तो शायद जागरण के ऐसे पहल से समाज को कुछ लाभ मिले जिसको कुछ हद तक चातक जी ने इसके पछ को स्पस्ट भी किया है अपने प्रतिक्रिया के द्वारा,धन्यवाद!

    nikhil के द्वारा
    November 30, 2010

    धर्मेश जी अभिवादन …. हिन्गिल्श या sms की भाषा जो बन रही है इसके दायरे में सबसे ज्यादा युवा वर्ग है वह वर्ग जिसके हाथ में देश का भविष्य है …. ये खिचड़ी भाषा अंग्रेजी का कोई नुक्सान नहीं करेगी मगर हिंदी पर बहुत बुरे प्रभाव पड़ेंगे …

दीपक जोशी DEEPAK JOSHI के द्वारा
November 29, 2010

प्रिय निखिल जी, भई भाषा चाहे कोई भी हो वह अपने में इतनी श्रेष्‍ठ होती है कि उस का कोई अपमान कर ही नहीं सकता रही आप की नाराजगी की तो मेरे विचार से हिंदी एक ऐसी भाषा है जो आम बोलचाल की भाषा है और सरकार ने भी राजभाषा अधिनियम के तहत यह गजट पार किया है कि सरकारी कामकाज मे हिन्‍दी का प्रयोग किया जाए और आप यदि अंग्रेजी के शब्‍दों को अनुवादीत नही कर सकते तो उन्‍हें उसी प्रकार हिन्‍दी में ही लिख सकते है। मेरे विचार से शायद हिन्‍दी ही एक ऐसी भाषा है कि जिस में ही इतने विकल्‍प है कि आप हर शब्‍द चाहे वह किसी भी भाषा को हो उसे लिख कर व्‍यक्‍त कर सकते है तथा उस का मतलब समझ सकते है। -दीपकजोशी63

    nikhil के द्वारा
    November 30, 2010

    आदरणीय जोशी जी …….. मैंने इस लेख के माध्यम से किसी भासा का विरोध नहीं किया… बल्कि दो महान भाषाओं की खिचड़ी बनाकर …जो बेहूदा प्रयोग है उसे लक्ष्य किया है और इससे आप किसी भी तरह से सही नहीं ठहरा सकते…

Alka Gupta के द्वारा
November 29, 2010

दैनिक जागरण हिंदी भाषा के साथ ऐसा घटिया मज़ाक करेगा समझ नहीं पा रहीं हूँ क्योंकि मैंने देखा नहीं है आई-नेक्स्ट और हो सकता है उससे कुछ लोगों का हित हो रहा हो लेकिन यदि हिंदी भाषा के साथ ऐसा हो रहा है तो इतना ही कह सकती हूँ कि ऐसे  सम्मानित पत्र को भाषा केस्वरूप पर ध्यान देना चाहिए ।  

    nikhil के द्वारा
    November 30, 2010

    अलका जी अभिवादन…….उपरोक्त उदाहरण 27 नवम्बर की आई नेक्स्ट हुबहू लिया है मैंने एक भी शब्द अलग से नहीं है…. और जागरण का ऐसा प्रयोग करना मुझे बहुत बुरा लग रहा है….. आपकी अनमोल प्रतिक्रिया के लिए आभार

chaatak के द्वारा
November 28, 2010

स्नेही श्री निखिल जी, हिंदी भाषा के लिए आपका प्रेम देखकर बड़ी प्रसन्नता हुई| निश्चय ही किसी भी भाषा के साथ किया गया मज़ाक अशोभनीय के दर्जे में ही रखा जाएगा लेकिन आई-नेक्स्ट भाषा के साथ किसी भी तरह की फूहड़ता नहीं करता है| मैंने इस पत्र को देखा और पढ़ा है और मैं इसे जागरण का एक सराहनीय कदम मानता हूँ| ये एकमात्र ऐसा पत्र है जो अंग्रेजी से हिंदी या हिंदी से अंग्रेजी सीखने वालों के लिए किसी वरदान से कम नहीं| कमोवेश हिंदी से अंग्रेजी सीखने वालों को ध्यान में रखते हुए इस पत्र का प्रकाशन किया जा रहा है| मैं स्वयं भी ऐसे किशोरों और युवको को आई-नेक्स्ट पड़ने की सलाह देता हूँ जो अंग्रेजी बोलना चाहते हैं| आपको बुरा लगा क्योंकि आपने इसे जागरण का समाचार पत्र समझ लिया है लेकिन ऐसा नहीं है ये एक ऐसा पत्र है जो सर्वोत्तम तरीके से language switch over में लोगों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो रहा है| आप इसे इसके उपयोग की दृष्टि से देखें तो आप पायेंगे कि दैनिक जागरण की तरह ये पत्र भी लाजवाब है| आपने इस ब्लॉग को मंच पर लाकर अच्छा किया क्योंकि बहुत से लोगों को ये भ्रम हो सकता है कि जागरण भाषा के साथ मज़ाक कर रहा है जबकि ऐसा बिलकुल नहीं| विनम्रतापूर्वक आपका चातक

    nikhil के द्वारा
    November 30, 2010

    प्रिय चातक जी ..इस तर्क से मै पूरी तरह असहमत हु ..की हिंदी से अंग्रेजी सिखने के लिए ये प्रयोग उचित है…. अंग्रेजी सिखने के कई तरीके है मगर जो उदाहरण मैंने दिया है …. उसे आप न तो हिंदी के लिए उचित कह सकते है न अंग्रेजी के लिए….. क्योकि ये एक प्रकार की खिचड़ी भाषा है….. और ये खिचड़ी भाषा न तो आपको हिंदी ही सिखने देगी न ही अंग्रेजी…. एक उदाहरण ले….. आजकल जब हम सेल फोन पर सन्देश लिखते है तो अंग्रेजी में ही….. देखिये क्या करते है… hi frends vry gd mrng…. i wl cal u latr,   i m buzy … bt i came vry soon … tc .. चातक जी ये भी एक प्रयोग ही है मगर ये धीरे धीरे आदत बन चूका है और इस तरह से हम एक भाषा के साथ मजाक कर रहे है…. जहा तक हिंदी से अंग्रेजी सिखने की बात है…. ये आदत हिन्लिश वाली आगे बहुत बुरा रूप ले लेती है…..और आप जानते होंगे की विश्वा में अभी तक ग्रामर के हिसाब से सबसे शुद्ध अंग्रेजी भारत में ही बोली जाती है…. मै इसे बेहद बुरा मानता हु…. आई नेक्स्ट को आसान अंग्रेजी भाषा में निकाल दिया गया होता तो कोई बात नहीं ..लेकिन ये प्रयोग एक प्रकार का बेहूदा मजाक ही है….

आर.एन. शाही के द्वारा
November 28, 2010

निखिल जी, आई नेक्स्ट मैंने भी अब तक नहीं पढ़ा । ऐसा होना तो नहीं चाहिये, क्योंकि जागरण जैसे प्रकाशन का कोई विंग बिना सही योजनाओं, अभिप्राय एवं तार्किकता के जनसाधारण के बीच आ सकता है, इसमें संदेह है । सूचना के लिये साधुवाद ।

    nikhil के द्वारा
    November 30, 2010

    आदरणीय शाही जी अभिवादन………….उपरोक्त उदाहरण 27 नवम्बर की आई नेक्स्ट हुबहू लिया है मैंने एक भी शब्द अलग से नहीं है…. और जागरण का ऐसा प्रयोग करना मुझे बहुत बुरा लग रहा है…….क्योकि जागरण हिंदी का स्तम्भ है देश में…. और मुझे नहीं लगता की हिंदी में उसके मुख्या समाचार पत्र की भाषा में कोई कमी है .. मेरा विरोध अंग्रेजी के विरुद्ध नहीं है पर मै ये खिचड़ी को बुरा समझता हु…. आपकी अनमोल प्रतिक्रिया के लिए आभार

November 28, 2010

निखिल जी मैं आपसे सहमत हूँ और जागरण को इस और ध्यान देना चाहिए.

    nikhil के द्वारा
    November 30, 2010

    राजेंद्र जी आपकी प्रतिक्रिया का इंतज़ार था…. आपका आभारी हु….

suryaprakash tiwadi के द्वारा
November 28, 2010

हिंदी के साथ खिलवाड़ करना मीडिया की आदत बनते जा रही है.राष्ट्रभाषा का सम्मान कोई नहीं कर सकते तो उन्हें अपमान करने का भी अधिकार नहीं है.आपने जो मुद्दा उठाया है सराहनीय है.

    nikhil के द्वारा
    November 30, 2010

    सूर्य प्रकाश जी आपकी प्रतिक्रिया अनमोल है जागरण को जरुर इस्पे ध्यान देना चाहिए…. क्योकि अंग्रेजी सिखाने का ये तरीका बेहद बुरा है…. दो भाषाओं की खिचड़ी पकाकर जागरण ने गलत ही किया..

nishamittal के द्वारा
November 28, 2010

मैंने समाचार नहीं पढ़ा ये परन्तु अपने स्तर को बनाए रखते हुए हिंदी भाषा का प्रयोग सभी पत्रपत्रिकाओं को संभल कर करना चाहिय. भाषा का स्वरूप बिगाड़ने को तो दूरदर्शन ही बहुत है लेकिन जागरण जैसे सम्मानित पत्र को ऐसे प्रयोगों से बचना जरूरी है क्योंकि समाचारपत्र की भाषा जन जन की भाषा बन जाती है.

    nikhil के द्वारा
    November 30, 2010

    उपरोक्त उदाहरण 27 नवम्बर की आई नेक्स्ट हुबहू लिया है मैंने एक भी शब्द अलग से नहीं है…. और जागरण का ऐसा प्रयोग किसी भी दृष्टि से उचित नहीं ठहराया जा सकता …..निशा जी आपने सही कहा की भाषा का बिगड़ने के दूरगामी परिणाम होंगे क्योकि वह उस राष्ट्र के साहित्य का आधार होती है और समाचार पत्रों की भाषा तो जन जन तक पहुचती है उसे तो और भी सतर्क रहना चाहिए .. प्रतिक्रिया के लिए आभार निशा जी

Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
November 28, 2010

सही कहा है आपने वास्तव मे कई बार साहित्य ओर समाचार पत्र ही युवाओं को हिन्दी से जोड़ते है …….. अब गोल्ड मैडल इतना प्रचलित हो गया है की शायद आप किसी से स्वर्ण पदक कहें तो कोई समझ भी ना पाये…….. ओर एक जिम्मेदार समाचार पत्र होने के कारण जागरण को इस ओर ध्यान देना चाहिए………… एक सार्थक विषय पर इस लेख के लिए हार्दिक बधाई………..

    nikhil के द्वारा
    November 30, 2010

    पियूष जी आभार ..इस प्रतिक्रिया के लिए आप तो स्वयं एक कवी है आप समझ सकते है की ऐसे प्रयोगों की आदत से साहित्य में एक प्रकार का बदलाव आ जायेगा और यह किसी भी दृष्टि से सही नहीं कहा जा सकता


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