सर झुकाकर आसमा को देखिये ...........

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अयोध्या से बादशाह अकबर रिपोर्टिंग

Posted On: 4 Oct, 2010 में

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(बीरबल हडबडाये हुए से अकबर के सामने पहुचे और बोले )
….”.जहापनाह एतना इमरजेंसी में बुलवा लिए है मैडम जी का जन्म दिन है का ?”

नहीं यार हम कुछ सोचे है “– अकबर बोले,
का सोचे है सरकार “- बीरबल का सवाल उठा.
यार हम ऊ कैटरिना वाले रिपोर्टर से बहुत इंस्पायर हो गए है सोच रहे है की हम भी रिपोर्टिंग करे . का कहते हो ?“- अकबर का जवाब,
का कहते है जहापनाह …?- बीरबल तपाक से बोले,
काहे बे  हम नहीं कर सकते है का ..करना ही का है बस लाईट ,कैमरा, आ एक्शन इतने तो काम है.”– अकबर का जोश में उत्तर था.

पर हुजुर का रिपोर्टिंग कीजियेगा … ? कुछ आइडिया है की हवा में ही ?…. हिहिहिही ….”- बीरबल बोले,
अबे हम अयोध्या वाला मुद्दा पर घूम – घूम के सबका राय लेंगे ” – अकबर,
तुरंत बीरबल ने अगला सवाल दाग दिया.
…” लेकिन हुजुर अयोध्या का मुद्दा तो २ दिन पुराना हो गया “,

तुम साले जितना होशियार बनते हो उतना हो नहीं… अबे कही अयोध्या जैसा मुद्दा भी पुराना होता है … हल्का बयार बहा नहीं की आग लग जाए.. बस एक बार बाहर निकल के जय श्री राम .. चाहे अल्लाह हु अकबर बोलो फिर देखो… “- अकबर ने बात ख़त्म की ,

…………………………………………………………………………

(इसके बाद अकबर बीरबल भेस बदल कर माइक कैमरा उठाकर निकल पड़े,, कई लोग से पूछे मंदिर मस्जिद के बारे में….,कोई  कहा स्टेडियम तो स्कूल , .कोई कहा की मंदिर मस्जिद दुनो बना दो…., एक लड़की कही की सिटी माल बनवा दो ,,, ता एक सलमान खान टाइप बोला की एक जिम बनवा दो. यार ,तो कौनो इमरान हाश्मी टाइप बोला की डांस बार बनवा दो .. ता एक मलिका बोली की वैलेंटाइन डे मानाने के लिए पार्क बनवा दो…ऐसे जवाब सुन सुन के अकबर बीरबल का टाइम पास हुआसामने एक चाय वाला मिला ….

…………………………………………………………………………

अकबर-–”"  भाई  इस फैसले से तुम्हारी चाय का टेस्ट कुछ बदला की नहीं ?”

चाय वाला – “न भाई , हमनी के ता उहे हाल बा ,, उहे स्वाद बा ,, ई दूकान में ता मंदिरों बा मस्जिदों बा .. आ ई सब नेता लोगन के चाआआ आ आ ………………………)

(अभी बात ख़त्म नहीं हुई की तभी एक मोटे से नेता गुलगुले यादव ने माइक ले लिया और चीख पड़े …..)

“”हमारे भोले भाले मुसलमान भाइयो को ठग लिया गया है ई सब ससुरी राज्य सरकार ,केंद्र सरकार आ ई रथ वालो का किया धहरा है हम चुप नहीं बैठेंगे.. मुसलमानों के साथ इंसाफ नहीं हुआ.. हम हड़ताल करेंगे , चक्का जाम , आमरण अनशन सब करेंगे.. .. आ देखो बेटा जौन मुसलमान अमन शांति आ सुलह का बात बतियाये ता बेटा एतना  फतवा ठोकेंगे की रो मारोगे.. आआअ …

अभी गुलगुले जी बात ख़त्म भी नहीं किये की सिंह साहब माइक छीन लिएआ दहाड़ उठे.

“‘एक्को इंच जमीं नहीं देंगे .. का समझे हो हिन्दू जनता के भोलापन का फायदा उठा कर ई केंद्र , आ राज्य  सरकार आ, सपा का साजिश है ,, हम सुप्रीम कोर्ट तकले जायंगे , भगवान् राम के पास जायेंगे .. बाकी एक्को बित्ता नहीं छोड़ेंगे…. हिन्दू समाज आहत हो गया है … ‘”

…………………………………………………………………………

(अभी सिंह साहब का बात ख़त्म नहीं हुआ की भारी भरकम हाथ आगे बढ़ा आ माइक ले के किनारे आ गयाबाप रे ऊ तो अब का नाम ले .अकबर बादशाहों घबडा के माइक छोड़  दिए ………… बस उनका बात सुन लीजिये………..)

“”ये सब केंद्र सरकार , भाजपा ,,आ सपा की और मनुवादियों की शाजिश है ई राज्य की लोकतान्त्रिक सरकार को अस्थिर करने की. आ एक बात साफ़ साफ़ बता देते है की ऊ परिसर का रखवाली अब हमसे नहीं होगा… एक बात बताइए हम आम जन के भावना का सुरक्षा का जिम्मेदारी ले की जगह जगह अपना आ अपने हाथी का मूर्ति सब लगा है करोणों का ,उसका सुरक्षा करे…. अरे भाई .. हर मूर्ति में कई कई योजना का पैसा है .. कौनो हमरे हाथ से परसवे लेके भाग गया तब का करेंगे आ चाहे हाथी का एक दाते निकाल ले गया … तो कौन जवाबदेह होगा बताइए,,,…?”"

…………………………………………………..

अभी ऊ कुछ और बोले तबतक माइक अपने आप जादू से एक लुंगी वाले नेता जी के पास चला गया ,. उनके बगल में एक पगड़ी धारी बाबा जी भी थे .. वे गंभीर होके बोले….)

“” देखिये कुच्छो फैसला हो जाये.. लेकिन एक बात बता देते है की हम विपक्ष वालो को छोड़ेंगे नहीं जेतना लोग गुम्बद गिराए थे सबको पकड़ पकड़ के उनके बॉडी में एतना छेद करेंगे की बेटा लोग कन्फ्युजे रहेंगे की सांस कहा से ले आ..###### ही ही ही ही …..बेटा लोग एंडरसन वाला मामला में बहुत नचाये थे .. अब देखो सी बी आई , डी बी आई .. का का लगाते है पीछे ……
आ परिसर का सुरक्षा हम काहे करे बे हम कौनो चौकीदार है का.
. ..


तभी पीछे से दाढ़ी बाबा बोले……..

“”मैडम जी का सन्देश है की शांति रखे . मन हो तो रखो न हो तो मत रखो न यार वैसे भी बहुत दिन से कौनो हंगामा नहीं हुआ… …………ही ही ही ही ही………कम से कम इसी में महंगाई बेरोजगारी ,नक्सलवाद आ कश्मीर भुलाओगे भूलेंगे सब “”

…………………………………………………………………………

अकबर बेहोश होने वाले थे……….. तभी भीड़ में से एक बच्चा आगे आया और बोला…..

“” अंकल अंकल हमको भी इंडियन आइडल में जाना है एक बार गाना सुन लो हमारा भी इन सबसे अच्छा गाते है..…..” बीडी जलाई ले .. जिगर से पिया…. डिंग डांग डिंग  डिंग डांग डिंग  ….जिगर में बड़ी आग है…….. “”
और अकबर .. बीरबल बेहोश हो गए.

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29 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Coolbaby के द्वारा
November 10, 2010

wow! Great ……..Really I am rolling into laughter…….:-) :-) God keeps you smilng

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    November 10, 2010

    धन्यवाद

priyasingh के द्वारा
November 10, 2010

अकबर बीरबल को लेकर अयोध्या जैसे संवेदनशील मुद्दे पर बहुत ही अच्छा व्यंग्य …………. तबियत खुश हो गई पढ़कर…………

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    November 10, 2010

    प्रिया जी आपको लेख पसंद आया …..धन्यवाद

Manish Singh "गमेदिल" के द्वारा
October 30, 2010

हास्य-व्यंग में ही बहुत कुछ कह गए है महोदय……………….. मज़ा आ गया…………… http://manishgumedil.jagranjunction.com

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    October 30, 2010

    धन्यवाद मनीष जी

s.p.singh के द्वारा
October 8, 2010

निखिल जी लाजवाब , बीडी जलाई ले .. जिगर से पिया…. डिंग डांग डिंग डिंग डांग डिंग ….जिगर में बड़ी आग है…….. “” अकबर तो अकबर अगर रिपोर्टिंग करने स्वयं यमराज भी आते तो शयद जिगर की आग से भस्म ही हो जाते , यह इण्डिया है और \" It can happen only in india \"

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    October 10, 2010

    प्रतिक्रिया के लिए आभार

O P PAREEK के द्वारा
October 6, 2010

निखिलजी, आपका अकबर-बीरबल संवाद बेहद पसंद आया. अयोध्या जैसे गंभीर मसले पर इतना अच्छा कटीला व्यंग्य लिख कर आपने इसमें से टेंसन वाला तत्त्व ख़त्म तो किया ही साथ-साथ पाठकों का मनोरंजन भी कर दिया याने एक पंथ दो काज. आप के द्वारा मेरे अयोध्या वाले ब्लॉग की प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद .पढने में जो परेशानी ई उसे ठीक कर दिया गया है. संभव हो तो पुनरवलोकन कर सकते हैं. oppareek43

    nikhil के द्वारा
    October 6, 2010

    पारीक जी .. पोस्ट आपको पसंद आई ..और आपने इतनी बढ़िया प्रतिक्रिया दी उसके लिए आभार… उस पोस्ट को मै दुबारा जरुर पढूंगा,,,, .

aftabazmat के द्वारा
October 5, 2010

निखिल जी आपने बहुत अच्छे अंदाज में बहुत गंभीर विषय पर व्यंग्य लिखा है। मैं आपको दिल से बधाई देता हूं।

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    October 5, 2010

    आफताब भाई ..बहुत बहुत धन्यवाद .. आपकी सराहना के लिए…

ashvini kumar के द्वारा
October 5, 2010

(फुलझड़ी नही पटाका है ,कुछ के लिए धमाका है )

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    October 5, 2010

    धन्यवाद अश्वनी जी…. प्रतिक्रिया देने के लिए

Ramesh bajpai के द्वारा
October 5, 2010

प्रिय निखिल जी थोडा विलम्ब हो गया . बहुत अच्छा प्रहार .सटीक व मजेदार आपकी प्रस्तुतिने सब को आनन्द मग्न कर दिया है . प्रिय मिश्रा जी ने कितना बढ़िया कमेन्ट दिया है बहुत बहुत badhai

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    October 5, 2010

    सर प्रणाम ……… आपने अपना समय निकाल कर इसे पढ़ा और सराहा मेरे लिए ये आशीर्वचन अनमोल और प्रेरणा देने वाले है… आभार

RaJ के द्वारा
October 5, 2010

इस तमाशे को इस व्यंग से ही ठीक से समझा जा सकता है बधाई

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    October 5, 2010

    धन्यवाद राज

Shailesh Kumar Pandey के द्वारा
October 4, 2010

अरे निखिल जी आजकल आप कवन बाजा बजाई रहे हैं …… एक नेता नेताइन के बाल बच्चा (जिनकारे बाटें), चाहे (नाते रिश्तेदार, नौकर चाकर, जिनकरे बाल बछा न बाटें) भूखे मरी जैहें तो आपके का मिली, बेचारन के रोटियों पर आप पहरा लगावत हैं …… बहुत बढ़िया निखिल जी ! रंगे सियारों को पानी लाइए इनका रंग सबको पता चल जाएगा आभार

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    October 5, 2010

    “रंगे सियारों को पानी लाइए इनका रंग सबको पता चल जाएगा ” प्रिय शैलेश जी यही कहना चाहता था मै इस व्यंग से ……रंगे सियारों का रंग सबको पता चले… चाहे वे किसी भी पक्ष के हो .. धनयवाद आपकी टिप्पड़ी के लिए

R K KHURANA के द्वारा
October 4, 2010

प्रिय निखिल जी, अकबर बीरबल के माध्यम से अच्छा व्याग लिखा है ! आज के नेता जो लोगो को भड़का कर अपनी रोज़ी रोटी का जुगाड़ करते हैं उन पर करार व्यंग है ! राम कृष्ण खुराना

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    October 4, 2010

    आदरणीय खुराना जी… आपकी अनमोल प्रतिक्रिया के लिए आभारी हु…

आर.एन. शाही के द्वारा
October 4, 2010

लगातर हास्य-व्यंग्य के छक्के पर छक्के मार रहे हैं निखिल जी । मज़ेदार … बधाई ।

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    October 4, 2010

    प्रणाम के साथ धन्यवाद स्वीकार करे …. ये आशीष वचन ही प्रेरित करते है

kmmishra के द्वारा
October 4, 2010

प्रिय पांड़े ई तुम कऊन सा नया धंधा इस्टार्ट कियो हो बाबू । हंसाय हंसाय के पगलवा दोगे क्या । हम सच्ची कहत हैं हंसी के मारे मरि मरा गये तो तुम्है परि दफा 302 लगेगा । बताये देते हैं अभैनय से । आनांद आ गया । जिये मेरे शेर ।

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    October 4, 2010

    प्रणाम भ्राता श्री ,,,,,,,,,,,, ठीक है अब हम चुपाय जात है ३०२ से तो ठीके होइहे …….. धन्यवाद आपकी आशीर्वाद स्वरुप प्रतिक्रिया के लिए

syeds के द्वारा
October 4, 2010

ज़बरदस्त व्यंग, उत्कृष्ट लेखन शैली….बस एक आग्रह है,

    syeds के द्वारा
    October 4, 2010

    ज़बरदस्त व्यंग, उत्कृष्ट लेखन शैली….बस एक आग्रह है,कृपया कुछ शब्दों(जैसे ‘साले’) का इस्तेमाल अच्छा नहीं लगता

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    October 4, 2010

    syeds जी नमश्कार , आपसे शिकायत के लिए क्षमा प्रार्थी हु…. और आपको लेख पसंद आया इसके लिए आभारी …. . आपकी आपत्ति पर आगे से ध्यान रखूँगा …. साथ ही इस तरफ ध्यान देने और सुझाव देने के लिए धन्यवाद …


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