सर झुकाकर आसमा को देखिये ...........

राष्ट्रवादी,राजनीतिक,सामाजिक चर्चा,विचार मंथन

55 Posts

1032 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 150 postid : 166

हिंदी की कहानी हिंदी की जुबानी -अंतिम भाग

Posted On 27 Apr, 2010 में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

मुझे याद है सर्वप्रथम विनोवा भावे ने मुझे संयुक्त राष्ट्र संघ में मान्यता प्राप्त करवाने के लिए प्रयास करने की बात कही थी .. अटल बिहारी वाजपेयी और तेलगू भाषी नरसिम्हा राव ने जब संयुक्त राष्ट्र संघ को हिंदी में संबोधित किया तब पुरे देश के साथ मैंने भी गौरवान्वित महसूस किया और कुछ लोगो ने ये विचार दिया की शायद संयुक्त राष्ट्र संघ की भाषा बनने पर मेरे दिन बहुरे…पर एकतरह से देखा जाये तो संयुक्त राष्ट्र संघ में मुझे ये स्थान स्वयमेव मिल जाना चाहिए था..

ससार में लगभग 2800 भाषाए है. इनमे अंग्रेजी और चीनी के बाद तीसरे स्थान पर लगभग 50 करोण से ज्यादा लोगो द्वारा बोली जाने वाली हिंदी भाषा आती है ..जरा सोचिये स. रा. में 6 भाषाओ को मान्यता है इनमे २ ही कार्यकारी भाषाए है अंग्रेजी और फ्रेंच. इनमे फ्रेंच बोलने वालो की संख्या हिंदी बोलने वालो की संख्या की 1/3 ही है .. यही नहीं एशिया महादीप की भाषाओ में हिंदी एकमात्र भाषा है जो अपने देश से बहार बोली और समझी जाती है .बर्मा ,मलाया ,लंका,मरिश्शस ,फिजी, त्रिनिदाद,व द.पू.अफ्रीका में हिंदी भाषी काफी संख्या में है .

1975 में नागपुर में प्रथम विश्व हिंदी सम्मलेन में रुसी विद्वान प्रो.येगेनी चैलिशेव ने कहा था .. “”समसामयिक विश्व में बढती सकारात्मक भूमिका अदा कर रहे महान एशियाई देश की एक सर्वाधिक प्रचलित और विकसित भाषा के रूप में हिंदी को विश्वभाषा बनना चाहिए “” पिछले 30 -32 वर्षो से लगातार हिंदी सम्मेलनों में ये प्रस्ताव पारित हो रहा है ..क्योकि अगर 22 देशो की 50 करोण की जनसँख्या द्वारा बोली जाने वाली हिंदी स.रा. की भाषा बन जाती है तो विश्व का एक बड़ा हिस्सा स.रा. की गतिविधियों से अवगत होगा और अपनी बात प्रभावी ढंग से कह सकेगा ..इससे वैश्विक सहयोग बढेगा .

कुछ लोगो का बेतुका तर्क ये है की अगर हिंदी को स.रा. की भाषा बनाया जायेगा तो दक्षिण भारत में राजनितिक प्रतिक्रिया होगी.. ये बात समझनी होगी की जैसे गाँधी जी को राष्ट्रपिता कहने से सुभाष चन्द्र बोस, तिलक, भगत सिंह इत्यादि की प्रतिष्ठा कम नहीं होती है कमल के राष्ट्रीय पुष्प बनने से गुलाब की सुगंध मंद नहीं होती वैसे ही मेरे राष्ट्र भाषा बनने से अन्य भाषाओ का निरादर नहीं होता है ..

आचार्य क्षितिज मोहन सेन ने कहा था..” आदर्श और साधना की एकता मनुष्य को एकता अवश्य देती है पर भाषा की भिन्नता उस एकता को जाग्रत नहीं होने देती “”..आपको ये बात स्वीकार करनी चाहिए की मेरे साथ राष्ट्र की एकता ,अखंडता और भावना जुडी हुई है .बस सरकार को चाहिए की पूरी इच्छाशक्ति के साथ हिंदी का ध्वज थाम कर आगे बढे. जुलाई 1928 में यंग इंडिया में गाँधी जी ने लिखा था–”यदि मै तानाशाह होता तो आज ही विदेशी भाषा में शिक्षा देना बंद कर देता .शिक्षको को स्वदेशी भाषा अपनाने पर मजबूर कर देता ,जो आनाकानी करते उन्हें बर्खास्त कर देता ,मै पाठ्यपुस्तको के तैयार होने का इंतजार नहीं करता

इस कथन को प्रेरणा के रूप में लेना चाहिए .अहिन्दी भाषियों के मन से भय और भ्रम दूर किया जाये, तकनिकी शिक्षा में आज हिंदी का प्रयोग बाधा है ,उसे और प्रोत्साहित किया जाये ,और राजकीय कार्यो में हिंदी का प्रयोग बढाया जाये . आप ये ध्यान रखिये की मै एक समृद्ध और प्रगतिशील भाषा हु और मेरी क्षमता बढ़ी ही है इसलिए आधुनिक वैश्विक परिस्थितियों से सामंजस्य बैठाने के प्रयास किये जाये . माइक्रोसोफ्ट व अन्य कंपनियों ने कम्पूटर और अन्य सुचना तकनिकी समाधान भारतीय भाषाओ में प्रस्तुत किये है ,कई अहिन्दीभाषी क्षेत्रो के विद्वान लेखक हिंदी में लिख रहे है , साहित्य ,विज्ञानं, दर्शन, कृषि ,इत्यादि साहित्य हिंदी में उपलब्ध है .हमेशा ये ध्यान रखे की व्यवसायिक युग में उन्नति उसीकी होती है जिसकी बाजार में मांग हो हिंदी भाषी क्षेत्र इतना विशाल है की देशी विदेशी शक्तियों के लिए इसकी उपेक्षा कर पाना असंभव हो जायेगा ..अतः जरुरत मांग बढ़ाने की है .संख्या बल हमारे पक्ष में है. मुझे केवल हिंदी दिवस की शोभा न बनाये

मेरे सफ़र की अबतक की कहानी आपने पढ़ी है आप ये जान चुके है की .. आज मै क्षेत्रीय सीमाओं के बंधन तोड़ कर सभी दिशाओ में गतिमान हु . देश की केंद्रीय शक्ति जैसे जैसे बढ़ेगी मेरी ताकत भी बढ़ेगी, मेरे नष्ट होने का तो प्रश्न ही नहीं है क्योकि राजनीती से बढ़कर मुझे जनता का बल प्राप्त है .आज भी जब संकट का समय आता है और निर्णायक दृष्टिकोण अपनाने के लिए जब भी आह्वान की जरुरत पड़ती है जब भी आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता की बात होती है तो मै ही देश की एकता और अखंडता के प्रतीक के रूप में खड़ी होती हु .

अहिन्दी भाषियों को कठिनाई नहीं होनी चाहिए उन्हें देश भावनात्मक एकता के प्रतीक के रूप में मुझे अपनाना चाहिए.यदि ये उनका त्याग है तो ये त्याग उन्हें करना चाहिए …अंग्रेजी बोलने से पहले ये एक बार जरुर सोचे की आप एक विदेशी भाषा बोल रहे है .हिंदी के समर्थन का अर्थ किसी अन्य भाषा का विरोध नहीं है ..बल्कि मात्र हिंदी को राष्ट्रवादी भावना के प्रतीक के रूप में प्रतिष्ठा देना है. राजनीती और वोट का मुद्दा न बना कर राष्ट्र की एकता और अस्मिता का प्रश्न बनाया जाना चाहिए .तभी भारत शक्तिशाली राष्ट्र बनेगा और एक भाषा में जब भारत विश्व मंच पर हिंदी का प्रश्न उठाएगा तो उसकी उपेक्षा कर पाना किसी के लिए भी असंभव होगा ….

हिंदी के लिए निखिल की कुछ पंक्तिया…………….

हिंदी को सम्मान मिले राष्ट्र शक्ति बने ,

भावो और विचारो की,युग-युग के संस्कारो की ,

नित विकास पथ पर चलते भारत के कर्णधारो की,

राष्ट्र चेतना और एकता की अभिव्यक्ति बने …….

हिंदी को सम्मान मिले राष्ट्र शक्ति बने ,


शेष धुंध भी छट जाये ,स्वतंत्र राष्ट्र एक-स्वर गए ,

ज्ञान युगों का गुंजित हो, भारत विश्वगुरु कहलाये.

साम्राज्यवाद की जंजीरों से अंतिम मुक्ति बने .,,..

हिंदी को सम्मान मिले राष्ट्र शक्ति बने ,

मै तमाम अवरोधों के बाद भी निरंतर उसी उर्जा से गतिमान हु …..और ये सफ़र जारी है ….

आपकी अपनी “हिंदी”

जय हिंद

| NEXT

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (6 votes, average: 4.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

10 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

rajkamal के द्वारा
June 5, 2010

tap 20-20 me aa ne ke liye badhai

    nikhil के द्वारा
    June 9, 2010

    बहुत बहुत धन्यवाद …आपका……………. काफी दिनों से दूर था जागरण मंच से

priya के द्वारा
May 4, 2010

आप ने हिंदी की जो जानकारी लोगो को दी .वो एक सराहनीय प्रयास है अपनी राष्ट्रभाषा को सबसे परचित करवाने का.आप के इस प्रयास के लिए आप को धन्यवाद ………प्रयास जारी रखिये …………..

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    May 4, 2010

    धन्यवाद प्रिया जी , आपके उत्साहवर्धन के लिए…….

R K KHURANA के द्वारा
April 28, 2010

प्रिय निखिल जी, हिंदी के सम्मान के लिए तो कुछ लोग प्रयासरत हैं परन्तु हमारी सरकार ही इसे हतोत्साहित कराती ही तो क्या हो सकता है ! फिर भी हम लोग अपना कम किये जा रहें है ! हिंदी तो अभी तक पूरे भारत में लागू नहीं हो सकी है तो आगे क्या कहा जाय ! हमें तो प्रयास करते रहना होगा ! धन्यवाद्

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    April 28, 2010

    जी ,आपने सही कहा समस्याए है पर प्रयास भी साथ में ही हो रहा है परिणाम भी जरुर मिलेगा….. ऐसी उम्मीद है हिंदी मंचो पर बोलने और लिखने वालो की संख्या बहुत ज्यादा है ऐसे ही कभी हिंदी की भी बात होगी और वह गति पकड़ कर अपने लक्ष्य तक पहुच जाएगी , धन्यवाद

Arunesh Mishra के द्वारा
April 28, 2010

निखिल जी, बहुत ही सधे तरीके से आप ने हिंदी की जीवनी सब के सामने प्रस्तुत करी. आप का हिंदी भाषा के बारे में किया गया शोध काफी गूढ़ और रोचक है. बहुत धन्याद आप को.

    nikhil pandey के द्वारा
    March 28, 2011

    धन्यवाद अरुणेश जी

Manoj के द्वारा
April 27, 2010

हिंदी को आगे बढाने के प्रयास में आपके ब्लॉग बहुत सराहनीय रहे , आपने जिस तरह से हिंदी के सफर को पननों पर उतारा वह कमाल काथा. ऐसे ही चलते फिरते प्रयासों से हो सकता है कि हिंदी जिंदा रहे कही नही तो कम से कम हम जैसों के दिलों में तो जरुर रहें. जब संपोर्ण भारत में हिंदी को उसका स्थान मिल जाएगा तो हो सकता है भेदभाव और जातिवाद ही थोडा कम हो.

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    April 27, 2010

    मनोज जी धन्यवाद .. ये प्रयास तो अब चलता ही रहेगा .. ऐसे ही कई व्यक्तिगत प्रयास जब मिलजायेंगे तो कोई न कोई सकारात्मक परिणाम जरुर देंगे


topic of the week



latest from jagran