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सोने की चिडिया की पुकार- “हम तो है परदेस में “

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कुछ  दिन  पहले  की बात  है  मुझसे  एक  बच्चे  ने  पुछा  भैया  ये  स्विस  बैंक  क्या  है  और कहा  है

,वही उसका  मित्र  खड़ा  था  उसने मेरे  कुछ  बताने  से  पहले  ही  कहा  की स्विस  बैंक  बहुत  दूर  है

और  वहा  पर  केवल  बड़े  बड़े  नेताओ  मंत्रियो  ही  पैसा   जमा  कर  सकते  है  ,मुझे  हसी  आ  गई .

बचे ने  फिर  कहा  केवल  नेता  क्यों  ? सवाल  सही  था  और जवाब  और भी  मासूम   ,दुसरे  बच्चे

ने जवाब दिया  क्योकि  बैंक  बहुत   दूर  है  और  वहा  केवल  नेता  लोग  ही जा  पाते  है,  मै  उनके

किसी  भी  नए  सवाल  मुझे  जवाब  देने  की स्थिति  में  नहीं  था इसलिए   उन्हें जाने  को कहा  और

वापस  घर  आ गया  …पर  उनकी बाते  दिमाग  में चल रही  थी .

हमारे  नेताओ  के  कारनामे  बच्चो बच्चो  की जबान  पर  आ  चुके  है  उन्हें  भले  ये  न  पता  हो  की

लोग    नेता   क्यों  बनते  है  पर   वो  ये  जानते  है  की   नेता   होने  मुझे  मतलब  कुछ  बुरा  होना  ही

होता   है .
बहरहाल   मै  जनता  हु इससे  नेताओ  की  सेहत  पर  कोई  प्रभाव  नहीं  पड़ेगा  …..पर  क्या  आप

जानते  है  …..

#  ग्लोबल  फिनेंसिअल  इंटेग्रिटी  -यू एस ए के अनुसार  भारत  से  हर  वर्ष  १,३५,००० करोड़  रुपये

स्विस  बैंक  में  जमा कराये  जाते  है.

# स्विस  बैंक  द्वारा जरी प्रारंभिक  सूचना  के  अनुसार  जिन  ५  देशो   की  सबसे  ज्यादा   बेनामी

संपत्ति  जमा  है  उनमे  हमारा  देश  १५०० अरब डॉलर  के  साथ  पहले  नंबर  पर  है   ..

#  काली  कमाई  में   रूस ,  ब्रिटेन , और  चीन  तो  कही  आस-पास  भी  नहीं दीखते है .

#और मजेदार  बात  ये  है  की  भारत  का  कुल  विदेशी  ऋण  १५५  अरब  डॉलर  ही  है.

तो  ये  उपलब्धि   तो  है  ही  हमारे  नेताओ   और   काले धंधे  वालो  की , इसका  पूरा  श्रेय  जहा  एक

तरफ  हमारी  लोकतान्त्रिक  व्यवस्था   का  है  वही  दूसरी  तरफ  हमारी  न्याय  व्यवस्था  की

कछुआ  चाल  का  भी है,

अब  अगर  देश  में  कोई  भूखा  मरता  है ,  किसान  आत्महत्या   करते   है  या  महंगाई   ,गरीबी

बढती  है  तो   क्या  किया  जाये  मजबूरी  है   मरने की  ………..  क्योकि  हम  कर  तो  कुछ  सकते

नहीं  अमेरिका  तो  हम  है  नहीं  जो  दबाव  बनाये  बैंक  पर  हम  तो  नेपाल  और  बंगलादेश  पर

दबाव  नहीं  बना  पाते  वो  तो  फिर  स्विस बैंक  है

लोकशाही   में  प्रतिनिधि  शाह हो  गए  और  लोक  तबाह   ,,, आंकड़े  कुछ  भी  कहे    कितनी  भी

विकास  और  प्रगति  की  दलीले  दे  पर  सच  यही  है  की  विकास  के इस  आईने  में  वो  अंतिम

व्यक्ति   अभी  वेटिंग  लिस्ट  में  ही  है ,

स्विस  बैंक  के  आंकड़े  ये  बताते  है  की  हमारे  नेताओ   ने   भ्रष्टाचार  में   ६० वर्षो  में  कितनी

प्रगति  की  है  .

किसी  शायर  की  ये  लाइने   सही  ही कहती  है  ..

तुमने  बदले  हमसे  गिन-गिन  के  लिए ,
हमने  क्या  चाहा  था  इस  दिन  के  लिए .

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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

आशिष के द्वारा
February 10, 2010

चलिए निखिल जी, कही तो भारतीय आगे है वरना हर क्षेत्र में पीछडना हमारी आदत है, यहा तो आगे है . वौसे आपके अगले पोस्ट का इंतजार है…………….

    nikhil pandey के द्वारा
    March 28, 2011

    आशीष जी प्रतिक्रिया के लिए आभार


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